ज्यादा देर करते हैं कार की सवारी तो सावधान! अंदर मौजूद केमिकल दे सकता है कैंसर की बीमारी, स्टडी में बड़ा दावा
दुनिया में यूरोप के बाद अब अन्य देशों में कई घातक बीमारी तेजी से फैल रही है। इस बीच एक अध्ययन में बड़ा दावा किया गया है। स्टडी में ये दावा कैंसर की बीमारी को लेकर किया गया है। ताजा शोध में सामने आया कि कार के इंटीरियर डेकोरेशन में एक ऐसा केमिकल मौजूद है, जो कैंसर को बढ़ावा देता है।
आजकल दुनिया में हाईटेक कार की मांग तेज हो चली है, जिसमें सुरक्षा के अपडेटेड उपकरण लगे होते हैं। कार में दुर्घटना के दौरान मौजूद लोगों की सिक्योरिटी के लिए अब एआई ऑपरेटेड डिवाइस का भी इस्तेमाल होने लगा है। इस बीच एक अध्ययन में कहा गया है की कार की सीट पर अधिक समय तक बैठे रहना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

ऐसे में भीड़भाड़ वाली जगहों पर कार में लंबे समय तक फंसे रहना के भी अपने दुष्प्रभाव हैं। इस दौरान आप कैंसर की बढ़ावा देने वाली दूषित हवा में तो सांस लेते ही हैं, इसके साथ कार की सीट में मौजूद फायर रिटार्डेंट कैंसर को बढ़ावा दे सकता है।
शोध में क्या पाया गया?
नए शोध में अमेरिका में परीक्षण की गई लगभग सभी (99%) कारों में फायर रिटार्डेंट पाया गया। इसमें ट्राइस (1,3-डाइक्लोरो-2-प्रोपाइल) फॉस्फेट (टीडीसीआईपीपी) और ट्राइस (2-क्लोरोइथाइल) फॉस्फेट (टीसीईपी) केमिकल भी शामिल हैं।
99% कारों में होता है ये केमिकल
जिसमें पता चला है कि 99% कारों में टीसीआईपीपी नामक एक फ्लेम रिटार्डेंट होता है। अधिकांश कारों में दो और फ्लेम रिटार्डेंट, टीडीसीआईपीपी और टीसीईपी भी होते थे, जिन्हें कैंसर बढ़ाने की वजह माना जाता था। साइंटिस्ट्स के मुताबिक फ्लेम रिटार्डेंट कैंसर के अलावा न्यूरोलॉजिकल और प्रजनन से जुड़ी बीमारी को भी बढ़ावा दे सकते हैं।
क्यों है ये समस्या?
कैंसर तंत्रिका संबंधी बीमारी है। हाल में ये कम आयुवर्ग के बच्चों में भी पाई गई है। दरअसल, फ्लेम रिटार्डेंट या अग्निशामक भी ज्वाला मंदक संभावित रूप से उच्च कैंसर दर की वजह हैं। फ्लेम रिटार्डेंट में फास्फेट और क्लोरीन की मौजूदगी इसका मुख्य कारण है।












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