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2017 के वो मामले, जिनमें फैसले देकर छा गया सुप्रीम कोर्ट

By Dharmender Kumar
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    नई दिल्ली। साल 2017 के बीतने में थोड़े ही दिन बचे हैं। सियासी उलटफेर, खेल की दुनिया में बने रिकॉर्ड और सिनेमा की सुर्खियों के बीच यह साल सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसलों को लेकर भी याद किया जाएगा। कई बड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले सालभर सुर्खियों में छाए रहे। तीन तलाक से लेकर निजता के अधिकार तक सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले दिए, जिनके लिए लोगों ने सर्वोच्च न्याय संस्था की जमकर तारीफ की। आइए जानते हैं उन बड़े मामलों के बारे में, जिनमें अपने फैसले से सुप्रीम कोर्ट 'हीरो' के तौर पर खड़ा हुआ नजर आया।

    गुलरुख गुप्‍ता को पारसी मंदिर में प्रवेश की इजाजत

    गुलरुख गुप्‍ता को पारसी मंदिर में प्रवेश की इजाजत

    गुजरात में पारसी समुदाय की महिला गुलरुख गुप्‍ता को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए पारसी मंदिरों में प्रवेश की इजाजत दी। गुलरुख गुप्ता के अपने समाज से बाहर हिंदू पुरुष से शादी करने पर पारसी मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। इस संबंध में अहमदाबाद हाईकोर्ट ने पारसी रीति रिवाज में हिस्सा लेने की मनाही के पारसी ट्रस्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि विवाह के बाद महिला का धर्म पति के धर्म में तब्दील हो गया है। इसके बाद महिला सुप्रीम कोर्ट पहुंची और इंसाफ मांगा। महिला ने कहा कि उसने हिन्दू पुरुष से स्पेशल मैरिज एक्ट में शादी की थी, धर्म परिवर्तन नहीं किया था। उसे पारसी रिवाज से पिता के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने का हक मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने महिला की याचिका पर गुजरात की बालसाड पारसी ट्रस्ट से महिला की मांग पर विचार कर जवाब देने को कहा, जिसके लिए ट्रस्ट ने कोर्ट में सहमति जताई।

    गर्भपात के लिए पति की इजाजत की जरूरत नहीं

    गर्भपात के लिए पति की इजाजत की जरूरत नहीं

    सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले के तहत इस साल महिलाओं को बड़ा अधिकार दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गर्भपात कराना है या नहीं, यह पूरी तरह से महिला के उपर निर्भर करता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें कहा गया था कि गर्भपात कराने से पहले महिला को पुरुष की भी इजाजत लेनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि महिला को यह पूरा अधिकार है कि वह बच्चे को जन्म देना चाहती है या फिर उसे गिराना चाहती है।

    दागी नेताओं के लिए स्पेशल कोर्ट

    दागी नेताओं के लिए स्पेशल कोर्ट

    साल 2017 में ही सुप्रीम कोर्ट ने 1,581 सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए 12 विशेष अदालतों की स्थापना के लिए सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपी सांसदों के खिलाफ लंबित मामलों के आंकड़ों को संगठित करने के लिए केंद्र को दो महीने का समय दिया और निर्देश दिया कि विशेष अदालत 1 मार्च, 2018 तक चालू हो जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट के साथ परामर्श कर राज्य सरकारें फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि वे 1 मार्च, 2018 से काम करना शुरू कर दें।

    निजता का अधिकार, मौलिक अधिकार

    निजता का अधिकार, मौलिक अधिकार

    इसी साल सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संवैधानिक पीठ ने निजता के अधिकार पर अपना फैसला सुनाते हुए इसे मौलिक अधिकार माना। आधार कार्ड योजना को दी गई चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया। केंद्र सरकार के लिए यह फैसला किसी झटके से कम नहीं था क्योंकि सरकार ने इससे पहले कोर्ट में ये दलील दी थी कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। 9 जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से आधार की सूचना लीक ना करने का फैसला सुनाया, साथ ही कहा कि निजता की सीमा तय करना संभव नहीं है। राइट टू प्राइवेसी का मामला सुप्रीम कोर्ट इसलिए पहुंचा क्योंकि आधार कार्ड की वैधानिकता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दायर की गई थी। इन याचिकाओं में कहा गया है कि बायोमैट्रिक जानकारी लेना निजता का हनन है। इस फैसले के बाद यह तय हो गया कि किसी के आधार की जानकारी लीक नहीं की जा सकती।

    रेप माना जाएगा नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध

    रेप माना जाएगा नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध

    साल 2017 में नाबालिक पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 15 से 18 वर्ष की उम्र की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाने को रेप करार दिया। कोर्ट ने कहा कि शारीरिक संबध के लिए विवाह की उम्र कम नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि अगर नाबालिग पत्नी एक वर्ष के भीतर इस बात की शिकायत करती है तो इसे रेप माना जाएगा। साथ ही कोर्ट ने एक बार फिर से दोहराया कि शारीरिक संबंध बनाने के लिए उम्र को 18 वर्ष से कम नहीं किया जा सकता है।

    निर्भया के चारों दरिंदों की फांसी बरकरार

    निर्भया के चारों दरिंदों की फांसी बरकरार

    निर्भया गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा। गैंगरेप के चार दोषियों मुकेश, अक्षय, पवन और विनय को साकेत की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसर 14 मार्च 2014 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी। दोषियों की अपील पर जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस बानुमति की बेंच ने निर्भया के साथ गैंगरेप करने वाले चार दरिंदों पर फैसला सुनाते हुए उनकी फांसी की सजा बरकरार रखी है।

    बिना पटाखे दिल्ली-एनसीआर की दिवाली

    बिना पटाखे दिल्ली-एनसीआर की दिवाली

    इस साल दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी। पटाखों की बिक्री को लेकर 11 नवंबर 2016 के रोक के आदेश को फिर से बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में 1 नवंबर तक पटाखों की बिक्री बैन करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को लेकर हिंदू संगठनों ने काफी हंगामा किया लेकिन पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश कायम रखा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दीपावली के बाद वायु की गुणवत्ता को देखते हुए इस मामले में सुनवाई की जाएगी।

    तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को आजादी

    तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को आजादी

    व्हॉट्सऐप, चिट्ठी और फोन पर तलाक देने की खबरों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए तीन तलाक को जब असंवैधानिक करार दिया, तो मुस्लिम महिलाओं ने राहत की सांस ली। सदियों से चली आ रही तीन तलाक की परंपरा को खत्म कर कोर्ट ने एतिहासिक फैसला दिया। हालांकि मुस्लिमों संगठनों ने इस फैसले के विरोध किया। इस प्रथा की आड़ में मुस्लिम महिलाओं को उनके पति एसएमएस और फोन पर ही तलाक दे रहे थे, जोकि मुस्लिम महिलाओं के लिए किसी नरक से कम नहीं था। कोर्ट ने तीन-दो के बहुमत से फैसला देते हुए कहा कि एक साथ तीन तलाक संविधान में दिए गए समानता के मौलिक अधिकार का हनन है।

    31 मार्च तक लिंक कराएं आधार कार्ड

    31 मार्च तक लिंक कराएं आधार कार्ड

    साल 2017 में ही सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड पर आम जनता को बड़ी राहत देते हुए सभी सेवाओं से आधार लिंक कराने की डेडलाइन 31 मार्च 2018 तक बढ़ा दी। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला आधार एक्ट की वैधनिकता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। हालांकि केंद्र सरकार ने ही सुप्रीम कोर्ट में आधार लिंक कराने की डेडलाइन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सहमति दे दी।

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    English summary
    top verdict of supreme court in year 2017.

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