Tomato Price Hike: टमाटर सुर्ख लाल तो आलू के चढ़े भाव, जानें क्यों बढ़ रही कीमतें? 7 दिन में मिलेगी राहत!
Tomato Price Hike: मानसून सीजन में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। भारी बारिश के कारण आपूर्ति प्रभावित होने से भारत के कई हिस्सों में आलू, प्याज और टमाटर की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि दिल्ली, कानपुर और कोलकाता सहित कई शहरों में टमाटर की खुदरा कीमतें 70-90 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गई हैं, जिससे घरों पर बड़ा असर पड़ा है।
यह इस साल टमाटर की कीमतों में अब तक की सबसे तेज बढ़ोतरी है। हालांकि, जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि दक्षिणी राज्यों से ताजा फसलें बाजारों में आने वाली हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मदर डेयरी द्वारा संचालित सफल किराना स्टोर पर टमाटर 75 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इसके अलावा, हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक ऑनलाइन क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने शनिवार को टमाटर 86 रुपये प्रति किलो पर सूचीबद्ध किया।
आंकड़ों में समझें उछाल
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि जून में टमाटर की कीमतों में एक साल पहले की तुलना में कमी आई है, लेकिन पिछले महीने की तुलना में यह सब्जी अधिक महंगी रही। उदाहरण के लिए, 2 जुलाई को टमाटर की औसत उपभोक्ता कीमतें 15% घटकर 54.42 रुपये प्रति किलोग्राम रह गईं, जो एक साल पहले 64.5 रुपये प्रति किलोग्राम थीं। हालांकि, एक महीने पहले की तुलना में कीमतों में 71% की तेजी आई है, जो 31.74 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 54.42 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। गुरुवार से कीमतें और भी अधिक बढ़ने लगी हैं।
7 दिन में दामों में गिरावट की उम्मीद
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने आशा व्यक्त की है कि आंध्र प्रदेश के चित्तूर और कर्नाटक के कोलार जैसे प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में अच्छी फसल की स्थिति के कारण कीमतों में एक सप्ताह के भीतर गिरावट आएगी।
प्याज और आलू का भी चढ़ा भाव
इसके अलावा, प्याज और आलू की खुदरा कीमतें एक साल पहले की तुलना में लगभग 81% और 57% बढ़ गई हैं, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई है और केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं में चिंता बढ़ गई है। पिछले साल प्रतिकूल मौसम और कम उत्पादन ने इन आवश्यक किराना वस्तुओं की कीमतों को ऊंचा रखा है।
टमाटर के महंगा होने की क्या है वजह?
- फसल की बर्बादी: बारिश के कारण खेतों में पानी भर जाता है, जिससे टमाटर की फसल सड़ जाती है या खराब हो जाती है। इससे बाजार में टमाटर की उपलब्धता कम हो जाती है।
- सप्लाई चेन में रुकावटें: भारी बारिश के कारण परिवहन और सप्लाई चेन प्रभावित होती है, जिससे बाजार में टमाटर की आपूर्ति कम हो जाती है।
- खेती पर असर: लगातार बारिश के कारण किसानों को टमाटर की खेती में कठिनाई होती है, जिससे उत्पादन कम हो जाता है।
- काला बाजारी: काला बाजारी (Black Marketing) का मतलब है कि बाजार में टमाटर की कृत्रिम कमी पैदा करके उसकी कीमतों को अनावश्यक रूप से बढ़ाना। टमाटर की काला बाजारी एक गंभीर समस्या है, खासकर तब जब टमाटर की कीमतें तेजी से बढ़ रही होती हैं।
- भंडारण: व्यापारी बड़े पैमाने पर टमाटर का भंडारण करके बाजार में उसकी कृत्रिम कमी पैदा कर सकते हैं।
पिछले साल जुलाई में टमाटर था 200 पार!
भारत में टमाटर की कीमतें कई बार अत्यधिक बढ़ी हैं, लेकिन पिछले साल जुलाई में टमाटर की कीमतें 200 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई थीं। यह वृद्धि मुख्य रूप से बेमौसम बारिश, आपूर्ति चेन में रुकावटें और फसल की बर्बादी के कारण हुई थी। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में टमाटर की खेती करने वाले किसान मालामाल हो गए थे।












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