केजरीवाल की आहट से वाराणसी में 'झाडू' व्यवसायियों की मौज

To take on Narendra Modi in Varanasi, Kejriwal's core team plans to replicate Delhi battle plan
वाराणसी। देश की राजधानी दिल्ली में केजरीवाल के आने से झाड़ू की मांग अचानक ही बढ़ गई थी। कुछ वैसी ही स्थिति अब भोले बाबा की नगरी में दिखने वाली है। केजरीवाल के आने की आहट मात्र से शहर में कई वर्षो से मंद पड़े झाड़ू कारोबोरियों की सक्रियता अचानक ही बढ़ गई है। कारोबोरियों को झाड़ू तैयार करने के लिए लगातार आर्डर मिल रहे हैं।

काशी में केजरीवाल की रैली से पहले ही यहां झाड़ू की मांग अचानक बढ़ गई है। कारोबारियों को हजारों रुपये के ऑर्डर मिले हैं और इसके बाद ही व्यापारियों ने बड़े पैमाने पर झाड़ू तैयार करने का काम भी शुरू कर दिया है। कारोबारियों का साफ तौर पर कहना है कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल से कोई मतलब नहीं है। हां, इतना जरूर है कि झाड़ू का आर्डर मिलने से लोगों को बैठे बिठाये एक काम मिल गया है, वरना झाड़ू की ऐसी मांग तो दीपावली में ही होती है।

कारोबारियों की मानें तो केजरीवाल की रैली से पहले 60 हजार रुपये के झाड़ू तैयार करने के आर्डर मिले हैं, जिसके बाद झाड़ू कारीगर अपने काम में जुट गए हैं। झाड़ू उद्योग से जुड़े कारीगर भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि आम आदमी पार्टी (आप) के चुनाव चिन्ह झाड़ू की वजह से ही झाड़ू उद्योग को फिर से बल मिला है। झाड़ू के कारोबार में शहर में करीब एक दर्जन से ज्यादा व्यापारी जुड़े हैं। इनमें छोटे से लेकर बड़े कारोबारी तक शामिल हैं।

बेनियाबाग में इस उद्योग से जुड़े असलम खान कहते हैं, "झाड़ू की मांग दीपावली के दिन ज्यादा होती है, लेकिन केजरीवाल की रैली की वजह से पिछले दिनों इसके कारोबार में तेजी आई है और हजारों रुपये के आर्डर मिले हैं।" कारोबारियों ने बताया कि बेनियाबाग, लहरतारा, मडुवाडीह और पड़ाव के आसपास काम करने वाले कारीगर ज्यादातर इसी झाड़ू उद्योग से जुड़े हैं। बडे पैमाने पर मांग बढ़ने की वजह से असम और बंगाल से सींक मंगाए जा रहे हैं, ताकि समय पर झाड़ू तैयार किया जा सके।

झाड़ू कारीगर रामलाल ने बताया कि डलिया और दौरी तैयार करने में ज्यादा समय लगता है, लेकिन झाड़ू तैयार करने में ज्यादा समय नहीं लगता। सींक को हल्का सा छीलकर उसे बांध दिया जाता है। हां, छीलने में समय लगता है। उसे झाड़ू तैयार करने का काम मिला है, जिसे 24 मार्च तक देना है।

उल्लेखनीय है कि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के बनारस से लड़ने के बाद से ही चुनावी फिजा बदल गई है। केजरीवाल ने भी घोषणा की है कि वह बनारस में रैली के दौरान जनता से रायशुमारी कर यहां से लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला करेंगे। केजरीवाल की रैली पहले 23 मार्च को होने वाली थी, लेकिन अब 25 मार्च को वह वाराणसी में अपनी रैली करेंगे।

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