TN Election: थलापति विजय ने चुनाव में गठबंधन से क्यों बनाई दूरी, आखिर क्या है TVK का 'नो अलायंस' गेम प्लान?
TN Election 2026: तमिलनाडु की राजनीति में इस बार मुकाबला केवल पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के बीच नहीं है। सुपरस्टार जोसेफ विजय, जिन्हें उनके फालोवर्स प्यार से 'थलपति' कहते हैं, अपनी नई पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के साथ चुनावी मैदान में अकेले उतर चुके हैं।
जहां राज्य की अन्य बड़ी पार्टियां गठबंधन के सहारे चुनावी मैदान में उतर रही हैं, वहीं विजय ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी।

वहीं विजय ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे और राज्य की सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। 23 अप्रैल को होने वाले इस चुनाव में TVK का यह फैसला सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर रहा है क्या यह रणनीति है या जोखिम है?
दो सीटों से चुनावी मैदान में उतरे विजय, हर सीट पर ठोकी ताल
विजय इस चुनाव में दो सीटों पेरंबूर और त्रिची ईस्ट से चुनाव लड़ रहे हैं। TVK ने तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। इसके अलावा पार्टी पुडुचेरी में भी चुनाव लड़ रही है। विजय का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संघर्ष है। उनका दावा है कि TVK ही भ्रष्ट और पुरानी राजनीति को चुनौती देने की क्षमता रखती है।
विजय ने गठबंधन से क्यों बनाई दूरी? मजबूरी या वैचारिक लड़ाई
TVK के महासचिव आधव अर्जुना ने मीडिया से बातचीत में बताया कि, विजय के पास गठबंधन के कई प्रस्ताव थे। कुछ पार्टियों ने तो उन्हें 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री पद और 50% सीटों का ऑफर भी दिया था, लेकिन विजय ने इसे ठुकरा दिया।
विजय का कहना है कि वे 'धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय' के सिद्धांतों पर कोई समझौता नहीं करेंगे। गठबंधन करने पर उन्हें अपनी विचारधारा के साथ समझौता करना पड़ता। विजय अक्सर अपनी रैलियों में भाजपा को अपना वैचारिक दुश्मन बताते रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि वे दिल्ली (केंद्र में भाजपा की सरकार) के किसी भी दबाव में नहीं झुकेंगे।
विजय के पास एक बड़े युवा वोटर्स हैं जिनका समर्थन TVK के लिए काफी महत्तवपूर्ण है। वे जानते हैं कि यदि वे किसी बड़े दल के साथ गठबंधन करते, तो उनकी अपनी पार्टी की पहचान नहीं बन पाएगी। वे जनता को दिखाना चाहते हैं कि केवल TVK ही DMK और भ्रष्टाचार से लड़ने का दम रखती है।
अनुभव की कमी विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती
TVK की स्थापना 2024 में हुई थी, यानी पार्टी अभी राजनीतिक तौर पर नई है। ऐसे में अनुभव की कमी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विजय की लोकप्रियता भले ही फिल्मों से आई हो, लेकिन उसे वोट में बदलना आसान नहीं होगा। कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि विजय को अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर ज्यादा सक्रिय होना पड़ेगा।
TVK के लिए रास्ता जोखिम भरा लेकिन लंबी रेस का दांव
राजनीतिक रणनीतिकार निरंजन रमेश बाबू का मानना है कि विजय के पास युवाओं का जबरदस्त समर्थन है, लेकिन उनका फैन बेस मुख्य रूप से फिल्मी है। उन्होंने कहा, विजय राजनीति में एक 'नवजात शिशु' की तरह हैं। DMK और AIADMK का संगठन जमीन पर बहुत मजबूत है।
विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए कम से कम 10 साल कड़ी मेहनत करनी होगी। तमिलनाडु की सभी सीटों पर 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे। क्या विजय अपनी 'अकेले लड़ने' की रणनीति से तमिलनाडु की सत्ता का समीकरण बदल पाएंगे? या फिर वे केवल एक 'वोट कटवा' पार्टी बनकर रह जाएंगे? यह तो 4 मई को ही साफ होगा, लेकिन एक बात तय है विजय ने तमिलनाडु के चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय और रोमांचक बना दिया है।












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