Tirupati Laddu: कैसे और कौन बनाता है तिरुपति लड्डू? क्या है भगवान को चढ़ाए जाने वाले 'प्रसादम' का इतिहास?
Tirupati Laddu: आंध्र प्रदेश में स्थित भगवान वेंकटेश्वर का तिरूपति मंदिर (Tirupati Tirumala Balaji) विश्व प्रसिद्ध है। दुनिया के सबसे अमीर भगवान तिरूपति मंदिर में भक्तों को दिया जाने वाले "प्रसादम" तिरुपत लड्डू सुर्खियों में है क्योंकि इसकी पवित्रता और शुद्धता सवालों के घेरे में है।
दरअसल, राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गुजरात लैब की रिपोर्ट साझा करते हुए खुलासा किया है कि पिछली YSRCP सरकार में तिरुपति के पवित्र लड्डू में घी की जगह पशु की चर्बी का इस्तेमाल किया गया। हालांकि अब तिरुपति प्रसादम में शुद्ध घी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
जिस तिरुपति लड्डू को हाथ में पाकर भक्त खुद को धन्य मानता है इसे आखिर कौन और कैसे तैयार करता है? साथ ही जानते हैं इस टेस्टी और पवित्र "प्रसादम" तिरुपति लड्डू का इतिहास क्या है?

कौन तैयार करवाता है तिरुपति लड्डू?
भगवान वेंकटेश्वर के तिरुपति मंदिर की देखभाल समेत सभी प्रशासनिक कार्य तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम प्रशासन (TTD) संभालता है। मंदिर परिसर में ही बने 300 साल पुराने किचन 'पोटू'में तिरूपति लड्डू TTD ट्रस्ट तैयार करवाता है। मंदिर का ये पवित्र प्रसाद 200 ब्राह्मण मिलकर बड़ी ही पवित्रता से तैयार करते हैं।
तिरुपति लड्डू से हर साल होती है कितनी कमाई?
एक दिन में 3.50 लाख लड्डू बनाए जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार इससे ट्रस्ट को हर साल 500 करोड़ रुपये की कमाई होती है। वर्ष 2015 में 1.8 मिलियन लड्डू बेचे गये थे जो अब तक सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
एक दिन में तैयार किए जाने वाले लड्डू की सामग्रियां
बेसन,आटा - 10 टन
2. काजू - 700 किलो .
शुद्ध घी - 500 लीटर
चीनी - 10 टन
इलायची - 150 किलो
मिश्री - 500 किलो
किशमिश - 540 किलो
तिरुपति लड्डू बनाने की विधि?
पहले तिरुपति लड्डओं को ब्राह्मण हाथ से बनाते थे लेकिन इसकी मांग बढ़ने के बाद इसे स्वाचालित मशीनों से तैयार किया जाने लगा। पहले आटा और बेसन समेत अन्य कच्ची सामग्रियों को ऑटोमैटिक मशीन में डाला जाता है। इस मशीन में खौलता देशी घी मिक्स किया जाता है।
जिसके बाद लड्डुओं की बूंदियां तैयार होती हैं और उसे दूसरी मशीन में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसके बाद इसमें इलाइची, किशमिश, काजू, चीनी और चाशी मिक्स की जाती है। इस प्रोसेस के बाद इस तैयार मटीरियल को लड्डुओं का शेप देने के लिए मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। जिसके बाद काउंटर पर भक्तों को वितरित करने के लिए भेज दिया जाता है।
309 साल पुराना है तिरूपति लड्डू का इतिहास
भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ाए जाने वाले इस तिरूपति लड्डू का 309 साल पुराना इतिहास है। इतना ही नहीं तिरुपति लड्डू को सालों पहले GI टैग भी मिल चुका है। 2 अगस्त 1715 में पहली बार ये लड्डू भक्तों में वितरित किया गया था। कल्याणम अयंगर ने मंदिर में तिरुपति लड्डू बनाने की शुरूआत की थी। हालांकि शुरूआत में जैसा लड्डू प्रसाद में दिया जाता था उससे अब का तिरुपति लड्डू अलग है। इसमें समय-समय पर कई परिवर्तन हुए।
लड्डू से जुड़ी लोककथा
तिरुपति लड्डू को श्री वारी के नाम से भी जाना जाता है। श्री वारी नाम से जुड़ी एक लोककथा है। जिसके अनुसार एक बार भगवान वेंकटेश्वर भगवान विष्णु के विवाह के लिए धन एकत्र करकने के लिए धरती पर आए। तब तिरुपति की एक महिला ने उन्हें चावल के आटे और गुड़ से मिली मिठाई दी। जिसके बाद भगवान वेंकटेश्वर ने महिला को आर्शीवाद दिया कि उसे मंदिर में शाश्वत भेंट मिलेगी। जिसके बाद से ये प्रसाद में लड्डू के रूप में प्रसाद की परंपरा की शुरूआत हुई।












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