COVID-19 के नए वैरिएंट को लेकर TIGS का बयान, दुनियाभर में XE के 600 केस, हमें घबराने की जरूरत नहीं
नई दिल्ली, 2 अप्रैल। चीन और दक्षिण कोरिया में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामलो ने दुनिया भर के देशों को एक बार फिर से चिंता में डाल दिया है। अब कोरोने के नए वैरिएंट एक्सई (XE) को काफी घातक माना जा रहा है। यह कोविड के वैरिएंट बीए.2 (BA.2) वहीं टाटा इंस्टीट्यूट फॉर जेनेटिक्स एंड सोसाइटी (Tata Institute for Genetics and Society) ने कोरोना के नए वैरिएंट की आशंकाओं को लेकर आश्वस्त किया है। TIGS की ओर से कहा गया है कि इससे हमे घबराने की जरूरत नहीं है।

टाटा इंटीट्यूट ऑफ जेनेटिक्स एण्ड सोसाइटी (Tata Institute for Genetics and Society) के निदेशक राकेश मिश्रा कोरोना नए वैरिएंट एक्सई (XE) को लेकर बात की है। उन्होंने कहा कि कोरोना नया म्यूटेंट एसई जनवरी महीने के मध्य में आया था लेकिन हमें इसको लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। केवल 600 मामले पूरी दुनिया में इस म्यूटेंट से संक्रमण के दर्ज किए गए हैं। TIGS के निदेशक ने कहा कि हमें इसके बारे में अध्ययन करने की जरूत है।
कई रिपोर्टों ने कोविड के एक नए उत्परिवर्ती के उद्भव को हरी झंडी दिखाई है, जिसे एक्सई या पुनः संयोजक संस्करण के रूप में जाना जाता है। प्रारंभिक अवलोकन से पता चलता है कि यह BA.2 की तुलना में अधिक पारगम्य हो सकता है। हालांकि, टाटा इंस्टीट्यूट फॉर जेनेटिक्स एंड सोसाइटी ने इस नए संस्करण के बारे में आशंकाओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जरूरत है इसका गहराई से अध्ययन करने की।
वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट की मानें तो यह म्यूटेंट बीए.2 से अधिक खतरनाक है। क्योंकि यह पुराने म्यूटेंट से अधिक पारदर्शी है। दरअसल, चीन और दक्षिण कोरिया में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। भारत में रोजाना करीब 1000 हजार एक्टिव केस दर्ज किए जा रहे हैं। इन सबके बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया है कि कोरोना का एक नया वैरिएंट एक्सई दस्तक दे रहा है जो ओमिक्रॉन से करीब 10 फीसद अधिक संक्रामक है।
क्या है XE वैरिएंट?
नोवेल कोरोनावायरस का एक नया म्यूटेंट XE है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे अधिक घातक मान रहा है। Omicron के BA.2 के सब- वैरिएंट की तुलना में यह लगभग 10 प्रतिशत अधिक तेजी फैलता है। कोरोना का नया वैरिएंट XE, Omicron के दो सब वैरिएंट - BA.1 और BA.2 का एक रूप है। डब्ल्यूएचओ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि एक्सई को पहली बार 19 जनवरी को ब्रिटेन में पाया गया था। अब तक दुनियाभर में इस संक्रमण से 600 लोग प्रभावित हुए हैं।












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