पश्चिमी विक्षोभ के चलते देश के कई राज्यों में भारी बारिश के आसार, बुरहानपुर में पारा पहुंचा 43 डिग्री
नई दिल्ली। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण देश के मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। अप्रैल महीने में ही सूर्य देवता आग बरसा रहे हैं। बहुत सारे राज्यों में पारा 40 या उसके पार पहुंच चुका है। चुभती गर्मी से परेशान लोग यही सोच रहे हैं कि अभी ये आलम है तो मई-जून में क्या हाल होगा। हालांकि भारतीय मौसम विभाग ने आज से लेकर अगले 24 घंटों में कुछ जगहों पर भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया है, विभाग ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में आंधी-तूफान देखने को मिल सकता है, जिससे गर्मी से तप रही दिल्ली के ताप में कुछ कमी आएगी।

पटना में 9 अप्रैल को मेघ बरस सकते हैं
तो वहीं हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बारिश के आसार दिख रहे हैं और इसलिए विभाग ने तीन दिन का 'यलो अलर्ट' हिमाचल में जारी किया हुआ है। तो वहीं यूपी-बिहार के कुछ शहरों में भी बादल बरस सकते हैं। पटना में 9 अप्रैल को मेघ बरस सकते हैं।
ओलावृष्टि की संभावना
विभाग ने कहा कि चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला में मौसम काफी खराब हो सकता है, यहां ओलावृष्टि की संभावना है। तो वहीं लद्दाख, चमोली, उत्तरकाशी में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि असम, मिजोरम, मेघालय, मिजोरम में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं।

बुरहानपुर में पारा 43 डिग्री पहुंच गया
तो वहीं मध्य प्रदेश में अभी से ही चुभने वाली गर्मी पड़ रही है। बुरहानपुर में बुधवार को अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जिसके बाद वो इस सीजन का अब तक सबसे ज्यादा गर्म शहर बन गया है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और चेन्नई में जमकर गर्मी पड़ रही है, हालांकि आज केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बारिश होने की आशंका है।

राजस्थान और गुजरात में 'हीटवेव'
स्काईमेट के मुताबिक इस दिल्ली, हिमाचल, कश्मीर, उत्तराखंड, एमपी, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु में बारिश होने के आसार हैं। राजस्थान और गुजरात में 'हीटवेव' भी चल सकती है। तो वहीं दिल्ली में लू की संभावना नहीं है, हालांकि अगले 24 घंटों में राजधानी में आंधी-पानी आ सकता है।

आखिर 'मानसून' कहते किसे हैं?
मानसून हिंद-अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आनी वाली हवाओं को कहते हैं जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में बरसात कराती हैं। ये ऐसी मौसमी पवन होती हैं, जो दक्षिणी एशिया क्षेत्र में जून से सितंबर तक, केवल 4 महीने एक्टिव रहती हैं। हाइड्रोलोजी में मानसून का मतलब है- ऐसी हवा जो बारिश कराए।












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