लोक सभा चुनाव 2014 में है तीन प्रधानमंत्री...

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दिल्‍ली। लोक सभा चुनाव 2014 पहले के सभी आम चुनावों से बिल्‍कुल अलग है। इस आम चुनाव में वोट बटोरने के लिए राजनीतिक पार्टियों को वोट बटोरने के लिए पहले से ज्‍यादा जद्दोजहद करनी पड़ रही है। अगर पूरे लोकसभा चुनाव 2014 पर नजर डालेंगे तो ऐसे करीब 8 बिंदु हैं जो इस चुनाव को अन्‍य आम चुनाव से बिल्‍कुल अलग कर देते हैं।

1. नए चेहरे- लोकसभा चुनाव 2014 में प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार के रूप में तीन नए चेहरे सामने आए हैं। पहला चेहरा भाजपा के नरेंद्र मोदी, दूसरा कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी और तीसरा चेहरा आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल।
2. नई सोच-नए विचार- अन्‍ना के आंदोलन और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के मैदान में उतरने से लोक सभा चुनाव 2014 में प्रतियोगिता बहुत ही बढ़ गई है। प्रतियोगिता बढ़ने का परिणाम यही रहा कि भाजपा समेत कांग्रेस को एक मुद्दे पर मतभेद करना आवश्‍यक हो गया। ऐसे में भाजपा से नरेंद्र मोदी ने विकास की बात कही तो कांग्रेस के राहुल गांधी ने धर्म निरपेक्षता का दामन थामा। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने देश को भ्रष्‍टाचार से मुक्‍त कराने का वादा कर लोगों को लुभाने की ठानी।
3. नए मतदाता- लोकसभा चुनाव 2014 के लिए देशभर में कुल 800 मिलियन मतदाता हैं। जिसमें से 23 मिलियन मतदाता नए हैं और इनकी उम्र 18-19 वर्ष के बीच में हैं। यह आम चुनाव नए मतदाताओं पर अत्‍यंत निर्भर है।
4. नया चुनावी अभियान- पहले तो लोग गांवों में जाते थे, बैनर चिपकाते थे और नारेबाजी कर लोगों को चुनाव में अपने प्रति वोट डालने के लिए प्रेरित करते थे लेकिन वर्ष 2014 में यह माहौल पूरी तरह से बदल गया। सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपने चुनावी अभियान के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट का सहारा ले लिया है। ये सत्‍य है कि अब भी चुनाव प्रचार के लिए लोग घरों में जाते हैं और जन सभाएं करते हैं।

5. नए गठबंधन- लोकसभा चुनाव 2014 में एक नई बात सामने आई है और वह है नए गठबंधन। एक तरु जहां कांग्रेस की बुराई करने वाले लालू प्रसाद यादव ने अपनी पार्टी की लाज बचाने के लिए कांग्रेस का ही दामन थामा वहीं दूसरी ओर राम विलास पासवान बेझिझक भाजपा में शामिल हो गए।
6. नई तकनीकी- लोकसभा चुनाव 2014 के लिए राजनीतिक पार्टियां अब नई तकनीकियों का प्रयोग जमकर कर रही हैं। हर नेता लोगों का रुझान जानने के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट और फेसबुक का सहारा लेता है। यह कहना कतई अतिश्‍योक्ति नहीं होगा कि दिल्‍ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार सोशल नेटवर्किंग साइट की बदौलत ही आई थी।
7- नए नियम- चुनाव आयोग ने भी समय की बहार को बदलता देख एक नया नियम लागू कर दिया है। लोकसभा चुनाव 2014 में वोटिंग मशीन पर मतदाताओं को एक नया नाम 'नोटा' देखने को मिलेगा। कोई भी मतदाता इस बटन का तब प्रयोग कर सकता है जब वो किसी भी पार्टी को चुनना नहीं चाहता है।

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