पूर्वोत्तर के ये तीन राज्य HIV का नया अड्डा बने, संक्रमण में जबरदस्त बढ़ोतरी

नई दिल्ली। भारत में एचआईवी के मामले पिछले कुछ समय में कम हुए हैं, लेकिन इसके साथ ही चिंता करने वाली बात यह है कि मेघायल, मिजोरम, त्रिपुरा में एचआईवी के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। महिला एवं स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पूर्वोत्तर के इन तीनों ही राज्यों में एचआईवी के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लोकसशभा में एक सवाल के जवाब में मंत्रालय की ओर से इस बाबत जानकारी देते हुए कहा गया कि पूर्वोत्तर के इन तीन राज्यों में इंजेक्शन से ड्रग लेने और असुरक्षित यौन संबंध की वजह से एचआईवी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।

महिलाओं में बढ़ा संक्रमण

महिलाओं में बढ़ा संक्रमण

मिजोरम के तीन स्थान और त्रिपुरा के एक स्थान पर इंजेक्शन की वजह से सबसे ज्यादा एचआईवी का खतरा बढ़ा है, इन जगहों को मिला दिया जाएगा तो इसके अलावा देश में सिर्फ 6.3 फीसदी ही एचआईवी के मामले हैं जोकि इंजेक्शन से फैले हैं। एजवाल, चंफई और कोलासिब में इंजेक्शन द्वारा एचआईवी के 37.44 फीसदी, 33.06, 38.14 फीसदी बढ़ा है। यही नहीं इन चारों ही जगहों पर महिलाओं में एचआईवी के मामले सबसे अधिक बढ़े हैं। त्रिपुरा के दो, मिजोरम व मेघालय में महिलाओं में एचआईवी का संक्रमण सबसे अधिक बढ़ा है।

गर्भवती महिलाओं में भी बढ़ा संक्रमण

गर्भवती महिलाओं में भी बढ़ा संक्रमण

मिजोरम के एजवाल जिले में 24.68 फीसदी एचआईवी का संक्रमण महिलाओं में बढ़ा है, जबकि भारत से इसकी तुलना करें तो देश में महिलाओं में संक्रमण सिर्फ 1.6 फीसदी बढ़ा है। वहीं अगर गर्भवती महिलाओं में एचआईवी संक्रमण की बात करें तो मिजोरम में छह जगहों पर संक्रमण सबसे अधिक बढ़ा है, जबकि मेगालय में एक और त्रिपुरा में एक साइट पर सबसे अधिक संक्रमण बढ़ा है।

21 लाख एड्स से संक्रमित

21 लाख एड्स से संक्रमित

नेशनल एड्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर समीरन पांडा ने बताया कि एचआईवी के संक्रमण के बारे में इन जिलों में बात होनी चाहिए। हमे जरूरत है कि जानकारी और बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करें जिससे लोगों को एचआईवी संक्रमण से बचाया जा सके। पांडा ने बताया कि एचआईवी से संक्रमित 12.28 लाख लोगों का एंटी रेट्रोवायरल ट्रीमटमेंट चल रहा है, उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि देश में कुल 21 लाख लोग जोकि एचआईवी से संक्रमित है उनमे से 90 फीसदी लोगों को एआरटी के तहत लाया जाएगा। डॉक्टर पांडा ने बताया कि अगर हम अपने लक्ष्य की बात करें तो हम अभी भी 6 लाख लोगों को इसमे शामिल नहीं कर पाए हैं, ऐसे में हमारा लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित किया जाए।

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