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फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है ये किडनैपिंग केस

By Bbc Hindi
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    अपहरण, दिल्ली क्राइम ब्रांच, दिलशाद गार्डेन
    Getty Images
    अपहरण, दिल्ली क्राइम ब्रांच, दिलशाद गार्डेन

    पांचवें फ्लोर का एक फ्लैट. फ्लैट का एक कमरा. कमरे के एक कोने मे दुबक कर बैठा एक छोटा सा बच्चा.

    तभी कमरे का दरवाज़ा खुलता है और पुलिस दाख़िल होती है. फायरिंग शुरू होती है. एक ओर से बदमाश गोलिया दाग रहे थे, दूसरी तरफ़ से पुलिस.

    और अंत में...

    अगर आपको ये किसी बॉलीवुड मसाला फ़िल्म का प्लॉट लग रहा है तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. ये हक़ीकत है.

    25 जनवरी को दिल्ली के दिलशाद गार्डन से जिस बच्चे को बदमाशों ने अगवा कर लिया था, दिल्ली पुलिस ने उसे सकुशल छुड़ा लिया है.

    अपहरण को अंजाम देने वाले तीन बदमाशों में एक की मौत हो गई है और एक अन्य घायल है. वहीं तीसरे अभियुक्त को हिरासत में ले लिया गया है.

    बच्चा सही-सलामत है और अपने मां-बाप के पास है.

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    अपहरण, दिल्ली क्राइम ब्रांच, दिलशाद गार्डेन
    Getty Images
    अपहरण, दिल्ली क्राइम ब्रांच, दिलशाद गार्डेन

    कैसे दिया था घटना को अंजाम?

    12 दिनों तक अपहरणकर्ताओं के चंगुल में रहने के बाद बच्चे को छुड़ा लिया गया है. ये मामला दिल्ली क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था.

    हालांकि उन्होंने इस ऑपरेशन में उत्तर प्रदेश पुलिस की भी मदद ली. डीसीपी नायक इस ऑपरेशन को लीड कर रहे थे.

    स्पेशल कमिश्नर ऑफ़ पुलिस क्राइम आर पी उपाध्याय ने बीबीसी से बात करते हुए बताया कि 25 जनवरी को जीटीबी एन्क्लेव के पास स्कूल बस से बच्चे का अपहरण हुआ था.

    बस में 15 बच्चे और एक फीमेल कर्मचारी थी. बदमाशों ने पहले बस रुकवाई, ड्राइवर की जांघ में गोली मारी और बच्चे को उठा लिया.

    ये सभी प्राइमरी क्लास में पढ़ने वाले बच्चे थे और स्कूल में होने वाले फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता के लिए जा रहे थे.

    क्यों किया था अपहरण?

    आर पी उपाध्याय के मुताबिक ये मामला आपसी रंजिश का नहीं था. इस घटना को पैसों के लिए अंजाम दिया गया था.

    अपहरण के बाद बदमाशों ने कई बार धमकी भरे फ़ोन किए और 60 लाख रुपये के फ़िरौती मांगी.

    बच्चे के पिता कारोबारी हैं और कंफ़ेक्शनरी का काम है.

    आर पी उपाध्याय ने बताया कि बदमाश बहुत दिनों से बच्चे पर नज़र रखे थे और ये उनकी चौथी कोशिश थी.

    इससे पहले भी उन्होंने बच्चे को तीन बार उठाने की कोशिश की थी, लेकिन हर बार अलग-अलग कारण से सफल नहीं हो पाए.

    कैसे दिया ऑपरेशन को अंजाम?

    आरपी उपाध्याय बताते हैं कि इस पूरे ऑपरेशन में फ़ील्ड इंटेलिजेंस से सबसे ज़्यादा मदद मिली.

    इसके अलावा जहां से बच्चे का अपहरण हुआ था वहीं से एक सीसीटीवी फुटेज भी मिली. फुटेज में बाइक नज़र आ रही थी.

    इसके अलावा फ़ोन डिटेल्स और भागने का रास्ता, सर्विलांस और इंटेलिजेंस से सबसे ज़्यादा मदद मिली.

    वो बताते हैं कि कुछ दिन पहले हमें सूचना मिली कि गाज़ियाबाद के साहिबाबाद में एक बिल्डिंग के पांचवे फ्लोर पर तीन लोग रहते हैं और उनके साथ एक बच्चा भी है.

    तीन लोगों में से सिर्फ़ एक शख़्स ही बाहर जाता नज़र आता था जबकि दो लोग घर के अंदर ही रहते थे. वो बाहर से खाना-वगैरह खरीद कर लाता था.

    अपहरण, दिल्ली क्राइम ब्रांच, दिलशाद गार्डेन
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    अपहरण, दिल्ली क्राइम ब्रांच, दिलशाद गार्डेन

    दो दिन से उन पर नज़र रखी जा रही थी

    5 फरवरी की रात को करीब 11 बजे पुलिस ने उस आदमी को दबोच लिया. वो खाना खरीदने ही जा रहा था. पुलिस ने उससे सारी डिटेल ली.

    उसने बताया कि ऊपर दो लोग और हैं और उनके पास हथियार भी हैं.

    इसके बाद पुलिस उस शख्स को लेकर लेकर ऊपर पहुंची और बदमाशों से बच्चे को सही सलामत सौंपने के लिए कहा लेकिन उन्होंने फ़ायरिंग शुरू कर दी.

    जवाब में पुलिस ने भी फ़ायरिग की. जिसमें दो बदमाश घायल हो गए.

    पुलिस के मुताबिक, घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया, जिनमें से एक की बाद में मौत हो गई. इस पूरे ऑपरेशन में 20 से 25 पुलिसवाले शामिल थे.

    बाद में पुलिस ने बच्चे का मेडिकल कराकर उसे घरवालों को सौंप दिया.

    वहीं इस ऑपरेशन को सुपरवाइज़ कर रहे ज्वॉइंट सीपी, क्राइम आलोक कुमार ने बताया कि क्राइम ब्रांच के पास ये मामला अपहरण के दो-तीन दिन बाद आया.

    अपहरण, दिल्ली क्राइम ब्रांच, दिलशाद गार्डेन
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    अपहरण, दिल्ली क्राइम ब्रांच, दिलशाद गार्डेन

    मां-बाप को नहीं थी उम्मीद

    आलोक कुमार बताते हैं कि क्राइम ब्रांच के पास कई लीड थी. साहिबाबाद में अपहरणकर्ता किराए का मकान लेकर रह रहे थे.

    जब पुलिस उस फ्लैट पर पहुंची तो बदमाशों ने फ़ायरिंग शुरू कर दी. दोनों तरफ़ से गोलियां चल रही थीं. फायरिंग में दो पुलिसवालों के बुलेटप्रूफ़ वेस्ट पर भी गोली लगी.

    आनंद कुमार बताते हैं कि जब हमने बच्चे को मां-बाप के सौंपा तो वो बहुत भावुक क्षण था.

    शायद उन्होंने उम्मीद ही छोड़ दी थी कि 12 दिन बाद बाद भी उनका बच्चा उन्हें वापस मिल पाएगा.

    हालांकि बच्चा पूरी तरह ठीक है. लेकिन फिलहाल घबराहट की वजह से ज़्यादा बात नहीं कर रहा.

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    BBC Hindi
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    English summary
    This kidnapping case is not less than a movie story

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