थर्ड वेव का मेगा ऐक्शन प्लान तैयार, किस तरह की रहेगी तैयारी ? जानिए
नई दिल्ली, 23 मई: केंद्र सरकार ने कोरोना की संभावित तीसरी लहर के लिए एक मेगा ऐक्शन प्लान तैयार किया है और इसे पूरा करने के लिए जुलाई के आखिर की समय-सीमा तय कर दी गई है। यानी तबतक सरकार के ऐक्शन प्लान के मुताबिक तीसरी लहर के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली जानी हैं। तीसरी लहर के लिए हर उन चीजों पर फोकस किया जा रहा है, जिसकी वजह से दूसरी लहर में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। इसमें ऑक्सीजन, ऑक्सीजन सप्लाई चेन, अस्पताल, बेड, वेंटिलेटर और दवाइयां सभी चीजों की संभावित आवश्यकताओं के हिसाब से योजना बनाई गई है।

हर जिले में एक या अधिक ऑक्सीजन प्लांट लगेंगे
केंद्र सरकार के एम्पावर्ड ग्रुप ने तीसरी लहर के लिए मोटे तौर पर तीन बिंदुओं पर फोकस किया है- लोकल स्तर पर ऑक्सीजन की सप्लाई, बिना रुकावट दवाइयों की सप्लाई के लिए ग्रीन चैनल और अस्पतालों में हर संकट का सामना करने लायक तैयारी। ईटी के खबर के मुताबिक बैठक में इन सभी तैयारियों को पूरा कर लेने के लिए जुलाई की डेडलाइन मुकर्रर की गई है। दूसरी लहर के अनुभव को देखते हुए ऑक्सीजन सप्लाई को पहली प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए केंद्र की रणनीति ये है कि उसने स्थानीय स्तर पर ऑक्सीजन उपलब्धता की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है, ताकि लंबी दूरी से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) की ढुलाई में आने वाली चुनौतियों को कम से कम किया जा सके। इसके लिए एम्पावर्ड ग्रुप-टू डेडलाइन से पहले देश के हर जिले में एक या अधिक ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए काम काम कर रहा है।
Recommended Video

1,657 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट जुलाई से होंगे ऑपरेशनल
इस योजना के तहत ऑक्सीजन की समस्या से पूरी तरह से छुटकारा पाने के लिए प्रेशर स्विंग एड्सॉर्प्शन (पीएसए) ऑक्सीजन पर जोर है। तय किया गया है कि करीब 1,657 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट जुलाई तक काम करना शुरू कर दें। इन रणनीतियों को तैयार करने में जुटे एक बड़े अधिकारी ने बताया है कि, 'सच तो यह है कि योजना के मुताबिक जुलाई के अंत तक अधिकतर जिलों के पास एक या उससे ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट होंगे। इसके पीछे आइडिया है कि अगर मामलों में अचानक इजाफा होता है या अस्पतालों से ऑक्सीजन की मांग में अचानक बढ़ोतरी होती है तो उसे कम से कम समय में आपूर्ति किए जाने की क्षमता पास में ही मौजूद रहे और दूसरी लहर की तरह लंबी दूरी से उसका इंतजाम न करना पड़े।' 1,657 पीएसए ऑक्सीजन प्लांट में से 1,051 प्लांट पीएम केयर फंड से तैयार किए जाएंगे। इनमें से 218 इस महीने के अंत तक, 400 जून में और बाकी 433 पीएसए प्लांट जुलाई तक तैयार हो जाएंगे। यही नहीं करीब 700 प्लांट स्वास्थ्य मंत्रालय और 500 डीआरडीओ तैयार करवाएगा। जबकि, लगभग 108 पीएसए प्लांट पेट्रोलियम मंत्रालय, 13 विदेशी सहायता से और 313 राज्यों की ओर से लगाए जाएंगे। इन पीएसए प्लांट से करीब 2,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन होगा।

150 नाइट्रोजन प्लांट भी ऑक्सीजन का करेंगे उत्पादन
वन इंडिया आपको पहले भी बता चुका है कि इतने बड़ी संख्या में लगाए जा रहे ऑक्सीजन प्लांट को चलाने के लिए प्रशिक्षित लोगों की भी जरूरत पड़ेगी। इसके लिए आईआईटी-कानपुर और नेवी ट्रेनिंग मैनुअल तैयार कर रहा है और इसके लिए थर्ड पार्टी टेक्नीशियनों की भी सहायता ली जा सकती है। वहीं पीएम केयर फंड से बनने वाले पीएसए ऑक्सीजन प्लांट के लिए जहां साइट खोजी जानी है,उसकी जिम्मेदारी केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को दी गई है। इन ऑक्सीजन प्लांट के अलावा 150 ऐसे नाइट्रोजन प्लांट की भी पहचान की गई है, जिसे ऑक्सीजन उत्पाद इकाई के तौर पर बदला जा सके और इसपर काम शुरू भी हो चुका है। इनके अलावा 1.27 लाख ऑक्सीजन सिलेंडर के ऑर्डर दिए जा चुके हैं और 2.06 लाख सिलेंडर अतिरिक्त खरीदे जाने हैं। 1 लाख ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर खरीदने की मंजूरी दे दी गई है और 82,673 के ऑर्डर जारी हो चुके हैं। 14,000 वर्ल्ड बैंक की सहायता से भी आने हैं।

क्रायोजेनिक स्टोरेज बनाने की भी तैयारी
कोरोना की दूसरी लहर में मेडिकल ऑक्सीजन का जो हाहाकार मचा उसकी बड़ी वजह यह भी थी कि इसकी ढुलाई के लिए जरूरी संख्या में टैंकर उपलब्ध नहीं थे। इस समय देश मे 1,172 ऑक्सीजन टैंकर हैं और 100 का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा 248 क्रायोजेनिक टैंकर आयात किए जाएंगे। पर्याप्त संख्या में ऑक्सीजन प्लांट, मेडिकल ऑक्सीजन ढोने वाले टैंकर के बाद तीसरी प्राथमिकता अस्पतालों को तीसरी लहर के खतरे की आशंका के मद्देनजर तैयार करने की है। इसबार केंद्र सरकार देश के करीब 900 अस्पतालों तक मेडिकल ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए क्रायोजिनक स्टोरेज की योजना भी तैयार कर रही है। यह स्टोरेज मुख्य रूप से बड़े शहरों में बनाए जाएंगे, जहां मल्टी-स्पेशियलिटी या सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल मौजूद हैं, ताकि ऑक्सीजन का बफर स्टॉक मौजूद रहे और बहुत ही कम समय में उनकी जरूरतों को पूरा किया जा सके। इनके अलावा 450 लीटर वाले छोटे टैंकर भी खरीदे जा रहे हैं, जिससे 50 से 100 बेड वाले अस्पतालों तक इसकी सप्लाई पहुंचाई जा सके। इन टैंकरों को चलाने के लिए 2,500 ड्राइवरों को स्पेशल ट्रेनिंग भी दिए जाने की तैयारी है।

16 जंबो अस्पताल बनेंगे
सरकार की योजनाओं में अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड की संख्या बढ़ाने पर भी फोकस है। 16 जंबो अस्पताल बनाए जाने हैं, जिसमें करीब 13,000 बेड होंगे। ऐसे अस्पताल खासकर स्टील प्लांट और ऑयल रिफाइनरियों के बगल में बनाए जाएंगे, ताकि ऑक्सीजन का कोई टेंशन न रहे। इसके तहत 4,100 बेड बीना, बठिंडा, मुंबई, कोचिन और पानीपत रिफाइनियों के पास तैयार किए जाएंगे। जबकि रिलायंस रिफायनरी के नजदीक 500 बेड पहले से ही तैयार हो चुका है और 3,600 अतिरिक्त बेड भी जल्दी ही इसमें शामिल होने वाले हैं। वहीं, हजीरा, डोलवी, विजयनगर, हिसार, राउरकेला, भिलाई, बोकारो, दुर्गापुर, बर्नपुर,विशाखापट्टनम, कलिंगानगर और अंगुल स्टील प्लांट के पास जो जंबो अस्पताल बनेंगे उसमें 8,150 बेड तैयार होंगे। इसके अलावा वेंटिलेटर की सप्लाई भी बढ़ाई जा रही है और पीएम केयर फंड से दिए गए 50,000 वेंटिलेटर की वार्षिक मेंटेनेंस भी एक साल के लिए बढ़ा दी गई है।

दवा की सप्लाई के लिए बनेगा 'ग्रीन चैनल'
दूसरी लहर में देश कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में दवाइयों की किल्लत, जमाखोरी और कालाबाजारी का भी सामना कर रहा है। लेकिन, तीसरी लहर में इस संकट से आसानी से निपटा जा सके इसके लिए दवाइयों के आसानी और बिना रुकावट सप्लाई के लिए सरकार 'ग्रीन चैनल' बनाने की तैयारी है। जल्द ही कोविड-19 के इलाज में सहायक विशेष दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक जुटाने के लिए टेंडर मंगवाए जाने हैं। 2-3 महीने के अंदर देश के पास तीसरी लहर के लायक दवा मौजूद हो, इसके लिए दवा कंपनियों के साथ भी चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं।












Click it and Unblock the Notifications