Third Front for 2024: अब अरविंद केजरीवाल ने शुरू की तीसरे मोर्चे कवायद, 7 मुख्यमंत्री को मनाने में जुटे

आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने तीसरे मोर्चे की कवायद तेज कर दी है। उन्होंने 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक साथ मंच पर लाने की कोशिश की शुरू की है।

Arvind Kejriwal

Third Front for 2024: अगले लोकसभा चुनाव में अब तकरीबन एक साल का ही समय बचा है, ऐसे में विपक्षी दलों ने आगामी चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। तमाम क्षेत्रीय दल भी अपनी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष को तैयार करने की तैयारियां अलग-अलग स्तर पर शुरू हो गई है। एक तरफ जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों को साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने भी तीसरे मोर्चे की तैयारी शुरू कर दी है।

कई विपक्षी दल भी कांग्रेस से बना रहे दूरी
अहम बात यह है कि तीसरे मोर्च के गठन के लिए तमाम क्षेत्रीय दल कांग्रेस से दूरी बनाना चाहते हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह कांग्रेस और भाजपा दोनों से दूर रहना चाहते हैं। अखिलेश यादव ने यहां तक कह दिया है कि कांग्रेस को 2024 की अपनी भूमिका को पहले तय करना चाहिए। कुछ ऐसे ही तेवर अरविंद केजरीवाल ने भी तीसरे मोर्चे को लेकर दिखाया है। सूत्रों की मानें तो अरविंद केजरीवाल ने भी साफ किया है कि वह गैर भाजपा-गैर कांग्रेस राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साथ लाना चाहते हैं। अरविंद केजरीवाल ने इन मुख्यमंत्रियों को डिनर पर न्योता दिया है। हालांकि अभी तक इन मुख्यमंत्रियों की ओर से सिर्फ आश्वासन मिला है, लेकिन ये सभी एक टेबल पर नहीं आ सके हैं।

केजरीवाल की कवायद में कुछ साथ, कुछ दूर

अरविंद केजरीवाल लगातार केंद्र के खिलाफ हमालवर हैं, जिस तरह से दिल्ली में लेफ्टिनेंट गवर्नर से के साथ अरविंद केजरीवाल की 2014 से सीधी तकरार चल रही है, उसके उसके बाद केजरीवाल ने 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों साथ लाने की कोशिश की और इसके लिए उन्होंने 18 मार्च को में दिल्ली आने का न्योता दिया था। । केजरीवाल ऐसे मुख्यमंत्रियों का गुट बनाने में जुटे हैं जो केंद्र के खिलाफ ऐसे मुद्दों पर साथ आने के लिए तैयार हैं। 5 फरवरी को जो पत्र भेजा गया था, उसमे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को भी न्योता दिया गया था, लेकिन उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इसे ठुकरा दिया था।

के चंद्रशेखर राव
पिछले कुछ सालों से के चंद्रशेखर राव लगातार गैर भाजपा और गैर कांग्रेस गठबंधन तैयार करने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन अभी तक उन्हें अपने इस प्रयास में कुछ खास सफलता नहीं मिल सकी है। अलग-अलग क्षेत्रीय दलों की ओर से उन्हें ठंडी प्रतिक्रिया ही मिली है। ऐसे में अब केसीआर अपनी ही पार्टी को दूसरे राज्यों में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

ममता बनर्जी
बिहार और पश्चिम बंगाल सरकार के सूत्रों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अरविंद केजरीवाल की ओर से न्योता मिला है। दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की गई है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बात करें तो 2019 में विपक्षी की अगुवाई करने वाली सबसे अग्रणी नेता थीं। उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है कि 2024 में एकला चलो रे के फार्मूले पर चलेंगी।

नीतीश कुमार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बात करें तो कई लोगों को लगता है कि वह तीसरे मोर्चे का नेतृत्व करना चाहते हैं। हालांकि भाजपा से अलग होने के बाद उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री पद की रेस में नहीं हैं। तेजस्वी यादव भी यह कह चुके हैं कि ना तो मैं और ना ही नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। ना ही मैं मुख्यमंत्री बनना चाहता हूं। हम जहां हैं वहां खुश हैं।

हेमंत सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही यह कह चुके हैं कि हम इतना कमजोर नहीं है कि एनडीए का 2024 में सपना पूरा हो जाए। हम पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेंगे। देश में विपक्ष को एकजुट होना चाहिए, तभी एकजुट गठबंधन लंबी छलांग लगा सकता है, इसके लिए हमे कभी-कभी दो कदम पीछे भी हटना पड़ता है।

एमके स्टालिन
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की बात करें तो भाजपा को हराने के लिए हमे अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर ऊपर उठना होगा और एकजुट होना पड़ेगा। 2024 का चुनाव इस बात पर निर्भर नहीं है कि कौन जीतेगा बल्कि इस बात पर निर्भर है कि किसे हराना है। हमे इस बात पर ध्यान देना होगा सत्ता पर किसका नियंत्रण नहीं होना चाहिए। भाजपा को हराना सभी विपक्षी दलों का लक्ष्य होना चाहिए। हालांकि गैर कांग्रेसी विपक्ष गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि यह व्यवहारिक नहीं है। हमे मतभेदों को पीछे छोड़कर एकजुट होना पड़ेगा, तीसरा मोर्चा बेमानी है।

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