कोरोना की दूसरी लहर में अनाथ हुए ये मासूम, रिश्‍तेदारों ने भी नहीं दिया सहारा

नई दिल्‍ली, 4 मई: कोरोना महामारी की दूसरी लहर में हर दिन सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है। इन महामारी में कई मासूम बच्‍चों ने अपने मां-बाप दोनों को खो दिया है। वहीं कुछ ऐसे बच्‍चे हैं जिन्‍होंने अपने मां या पिता को खो दिया है। ऐसे में जीवित माता-पिता वित्तीय और मनोवैज्ञानिक रूप से उनकी देखभाल करने में असमर्थ हैं। वहीं उनके रिश्‍तेदारों ने भी इन मासूमों को अपननाने से इंकार कर दिया है जिस कारण वो बेसहारा हो गए हैं।

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नवजात शिशु के मां-बाप, दादी-दादी की कोरोना से हुई मौत, रिश्‍तेदारों ने नहीं दिया सहारा

कोरोना की दूसरी लहर में ऐसे कई मां-बाप को कोरोना ने लील लिख जिनके छोटे-छोटे बच्‍चे है। कोलकाता में, एक नवजात शिशु ने हाल ही में अपने माता-पिता और दादा-दादी सभी को कोरोना महामारी के चलते खो दिया। बच्‍चा भी कोरोना की चपेट में आया लेकिन वो बच गया। बच्चे के रिश्तेदार कथित तौर पर उसकी देखभाल करने से इंकार कर दिया। अंत में उस बच्‍ची के बूढ़े नाना, जो दूसरे शहर में रहते हैं, वो आकर अपने साथ उस मासूम बच्‍ची को लेकर गए। वो भी जब पुलिस ने जबरदस्‍ती की तब वो अपने साथ ले गए।

रिश्‍तेदार के न अपनाने से बच्‍चों हुए बेसहारा

पश्चिम बंगाल के एक पत्रकार अनुराधा शर्मा ने कहा कोविड में अनाथ हुए बच्‍चों की ये दर्द अब और बढ़ता जा रहा है। उन्‍होंने कहा इन बच्चों की देखभाल करने के लिए रिश्तेदारों की अनिच्छा शायद अस्थायी थी लेकिन "अभी हम सभी के लिए नाजुक मानसिक स्थिति" है।

मां-बाप की कोरोना से हुई मौत,दो बेटे अपना जीवन समाप्‍त करने का बना रहे थे प्‍लान

वहीं कर्नाटक में दो ऐसे केस सामने आए जिसमें माता-पिता को खो चुके बच्चों को बिना किसी समर्थन के छोड़ दिया गया। एक अन्य मामले में, दिल्ली पुलिस ने दो भाई-बहनों को बचाया जिनके माता-पिता की कोरोना के चलते मौत हो गई थी जिसके बाद ये दोनों भाई निराश होकर अपना जीवन समाप्त करने की योजना बना रहे थे। इनमें से कई मामलों में, रिश्तेदारों का पहला सहारा है। लेकिन अगर वो इन मासूमों को नहीं स्‍वीकारतें हैं, तो राज्य सरकार को इन बच्‍चों की देखभाल के लिए कोई महत्‍वपूण कदम उठाना चाहिए।

बच्‍चों के भविष्‍य के लिए सरकार को उठाना चाहिए जरूरी कदम

दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में लगभग 50 झुग्गियों में काम करने वाले एक एनजीओ के संस्थापक और निदेशक सोनल कपूर ने कहाने कहा उन्होंने हाल के दिनों में बहुत मुश्किल केस देखे। ऐसे कई मामले हैं जिनमें माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गई है। आज जो महत्वपूर्ण है वह ऐसे मामलों की एक संस्थागत प्रतिक्रिया है। लोग गोद लेने के लिए बुला रहे हैं, लेकिन इन बच्चों के भविष्य और कल्याण के लिए एक उचित कानूनी तंत्र का पालन किया जाना चाहिए।

दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स ने दी ये चेतावनी

इन बच्चों को गोद लेने की कई कॉल सोशल मीडिया पर चल रही हैं। लेकिन कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि ये तरीका बच्‍चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (DCPCR) ने लोगों से सोशल मीडिया पर गलत काम करने की गलत सूचना न देने का आग्रह किया है। आयोग ने इच्छुक परिवारों को गोद लेने की पहल करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी।

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    बच्‍चों के लिए जारी किया गया ये हेल्‍पलाइन नंबर

    उन्‍होंने कहा "किसी को भी विश्वास न करें जो कहता है कि वह आपको गोद लेने के लिए बच्चा दे सकता है। वे या तो झूठ बोल रहे हैं या गुमराह कर रहे हैं या बस अवैध प्रथाओं में शामिल हैं। सलाह के लिए अपने वकील मित्रों के पास पहुंचें। आयोग ने अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों या जिनके माता-पिता अस्पताल में भर्ती हैं, उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक हेल्पलाइन (+ 91-9311551393) शुरू की है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि महामारी के परिणामस्वरूप अन्य जटिल स्थितियां भी पैदा हो रही हैं। समाज के गरीब वर्गों में, महामारी ने पिछले साल से कई तरह से बच्चों को प्रभावित किया है।"यह सिर्फ इस साल और महामारी के इस चरण में नहीं है। पिछले साल भी हमने बच्चों को कई तरह से प्रभावित होते देखा था। हमें स्लम में बच्चों के यौन शोषण के मामले मिले हैं, क्योंकि उन्हें असुरक्षित छोड़ दिया गया था। '

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