'बगदादी और ओवैसी में कोई फर्क नहीं, जुबान से फैला रहे आतंक'
Recommended Video
नई
दिल्ली। अयोध्या पर आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद से ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार तीखे बयान दे रहे हैं, अब उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा है कि मुझे मेरी मस्जिद वापस चाहिए, जिसके बाद ओवैसी कुछ लोगों के निशाने पर आ गए हैं, केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के बाद अब शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने तीखा हमला बोला है, उन्होंने कहा कि आतंकी संगठन आईएसआईएस के पूर्व सरगना अबु बकर अल बगदादी और औवेसी में कोई फर्क नहीं है, औवेसी जुबान से आतंक फैला रहे हैं। id="toptextpromo"> id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'>
'बगदादी और ओवैसी में कोई फर्क नहीं'
गौरतलब है कि अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एआईएमआईएम प्रमुख व लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने असंतोष जताते हुए कहा था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को इस पर विचार करना चाहिए था।
'ओवैसी जुबान (भाषणों) के जरिए आतंक फैला रहे हैं'
जिस पर रिएक्शन देते हुए रिजवी ने कहा कि यही सही वक्त है ओवैसी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर प्रतिबंध लगने का, उन्होंने कहा कि आतंक फैलाने के लिए बगदादी के पास हथियार और गोला बारूद थे, वहीं ओवैसी जुबान (भाषणों) के जरिए आतंक फैलाने का काम कर रहे हैं।

'लगातार तीखे दे रहे हैं ओवैसी'
मालूम हो कि इससे पहले जब 9 नवंबर को कोर्ट का फैसला आया था, तब ओवैसी ने कहा था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरह हम भी फैसले से सहमत नहीं हैं, कोर्ट से भी चूक हो सकती है, जिन्होंने बाबरी मस्जिद को गिराया, उन्हें ट्रस्ट बनाकर राम मंदिर बनाने का काम दिया गया है, अगर वहां पर मस्जिद रहती तो सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला लेता। ये कानून के खिलाफ है, बाबरी मस्जिद नहीं गिरती तो फैसला क्या आता। हमें हिंदुस्तान के संविधान पर भरोसा है, हम अपने अधिकार के लिए लड़ रहे थे, पांच एकड़ जमीन की खैरात की हमें जरूरत नहीं है। आपको बता दें कि अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद बयान देने के चलते असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ अखिल भारतीय हिंदू महासभा की ओर से उनके खिलाफ केस भी दर्ज कराया गया है।

SC ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को अतार्किक करार दिया
9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया था। निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही पक्षकार माना था। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को अतार्किक करार दिया। कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को कहीं और 5 एकड़ की जमीन दी जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाए और इसमें निर्मोही अखाड़े को भी शामिल किया जाए।












Click it and Unblock the Notifications