बीजेपी का ये खराब रिकॉर्ड कांग्रेस को चिंता में डालने की है सबसे बड़ी वजह

नई दिल्‍ली। 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व वाली बीजेपी ने कांग्रेस को अब तक की बुरी शिकस्‍त दी। परिणाम यह हुआ कि पार्टी सिर्फ 44 लोकसभा सीटों तक सिमट गई। 2014 लोकसभा चुनाव के बाद भी कांग्रेस ने एक के बाद एक राज्‍यों में चुनाव हारे। अगले आम चुनाव से पहले मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और राजस्‍थान में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्‍कर होनी है। निश्चित रूप से सत्‍ता विरोधी लहर का सामना बीजेपी को करना पड़ेगा, ऐसे में कांग्रेस के पास सुनहरा मौका है, लेकिन कांग्रेस का खराब स्‍ट्राइक रेट उसके लिए बड़ी चुनौती है। आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस की तुलना में बीजेपी की वोट प्रतिशत कोई बहुत अच्‍छा नहीं रहा है, लेकिन बीजेपी कम वोट शेयर पाकर भी ज्‍यादा सीटें जीत जाती है और कांग्रेस वोट प्रतिशत की तुलना में उतनी सीटें नहीं जीत पाती है। यही कारण है कि 34 साल में कांग्रेस पार्टी को बहुमत के दम पर एक बार भी केंद्र सत्‍ता नहीं मिली। आखिरी बार इंदिरा गांधी की हत्‍या के बाद 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को राजीव गांधी के नेतृत्‍व में पूर्ण बहुमत मिला था। कांग्रेस को 48 प्रतिशत से थोड़ा ज्‍यादा वोट मिला था और 400 से ज्‍यादा सीटें जीतकर पार्टी सत्‍ता में आई थी। इसके बाद से कांग्रेस का स्‍ट्राइक रेट खराब होना शुरू हुआ जो अब तक जारी है...

कांग्रेस से कम वोट शेयर पाकर भी बीजेपी ने जीतीं 72 ज्‍यादा सीटें

कांग्रेस से कम वोट शेयर पाकर भी बीजेपी ने जीतीं 72 ज्‍यादा सीटें

कांग्रेस के खराब स्‍ट्राइक का विश्‍लेषण करने के लिए ज्‍यादा पीछे जाने की जरूरत नहीं है। 2014 लोकसभा चुनाव का ही उदाहरण लेते हैं। इस चुनाव में कांग्रेस को 19.3 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सिर्फ 44 सीटों पर जीत प्राप्‍त हुई। अब 2009 में बीजेपी के प्रदर्शन पर नजर डालते हैं। 2009 लोकसभा चुनाव बीजेपी ने लालकृष्‍ण आडवाणी के नेतृत्‍व में लड़ा था और पार्टी को कांग्रेस के हाथों सत्‍ता गंवानी पड़ी थी, लेकिन तब भी बीजेपी का स्‍ट्राइक रेट काफी बेहतर था। बीजेपी को 2009 में 18.5 प्रतिशत वोट मिले थे और वह 116 सीटें में सफल रही थी। मतलब 2014 में कांग्रेस को बीजेपी की तुलना में वोट ज्‍यादा पर सीटें 72 कम प्राप्‍त हुईं।

सबसे कम वोट शेयर पाकर बीजेपी ने प्राप्‍त किया बहुमत

सबसे कम वोट शेयर पाकर बीजेपी ने प्राप्‍त किया बहुमत

2014 लोकसभा चुनाव में जहां कांग्रेस 19.3 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्‍त कर सिर्फ 44 सीटें हासिल कर सकी, वहीं बीजेपी ने स्‍ट्राइक रेट के मामले में रिकॉर्ड बना डाला। नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में बीजेपी ने सिर्फ 31 प्रतिशत वोट हासिल कर 282 सीटों पर जीत हासिल कर ली। इससे पहले कांग्रेस ने 1967 में 40.8 प्रतिशत वोट के साथ 283 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन दोनों परिणामों की तुलना करें तो बीजेपी को करीब 10 प्रतिशत वोट कम मिले, जबकि उसने कांग्रेस से सिर्फ एक सीट कम हासिल की। एक प्रकार से वोट शेयर के मामले में यह बीजेपी का खराब रिकॉर्ड है, लेकिन उसका यही खराब रिकॉर्ड कांग्रेस की मुसीबत बनता जा रहा है।

30 प्रतिशत वोट पाने के बाद भी राजस्‍थान में एक भी सीट नहीं जीत सकी कांग्रेस

30 प्रतिशत वोट पाने के बाद भी राजस्‍थान में एक भी सीट नहीं जीत सकी कांग्रेस

मध्‍य प्रदेश चुनाव की बात करें तो 2008 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38 फीसदी वोट शेयर के साथ 143 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, कांग्रेस 32 प्रतिशत वोट प्राप्‍त करने के बाद भी सिर्फ 71 सीटें ही पाई। इसी प्रकार से 2013 में बीजेपी ने 45 फीसदी वोट शेयर के साथ 165 सीटों पर कब्जा किया तो कांग्रेस 36 प्रतिशत वोटों के साथ सिर्फ 58 सीटें जीत सकी। अब 2014 लोकसभा चुनाव में राजस्‍थान के नतीजों पर भी गौर लीजिए। बीजेपी ने 55.6 प्रतिशत वोट शेयर के साथ राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों भगवा फहरा दिया, जबकि कांग्रेस पार्टी 30.7 प्रतिशत वोट पाने के बाद भी एक सीट पर भी जीत दर्ज नहीं कर पाई।

छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस ने खराब स्‍ट्राइक रेट के चलते बार-बार गंवाई सत्‍ता

छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस ने खराब स्‍ट्राइक रेट के चलते बार-बार गंवाई सत्‍ता

छत्तीसगढ़ में 2008 विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो बीजेपी ने 40 फीसदी वोट शेयर के साथ 50 सीटों पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस 39 प्रतिशत वोट के साथ 38 सिर्फ सीटें जीत पाई। महज 1 प्रतिशत वोट का अंतर और कांग्रेस को 1 सीटें कम मिलीं। इसी प्रकार से छत्‍तीसढ़ में 2013 विधानसभा में बीजेपी ने 41 फीसदी वोट के साथ 49 सीटों पर जीत हासिल की तो कांग्रेस 40 प्रतिशत वोटों के साथ 39 सीटें ही जीत पाई। छत्‍तीसगढ़ लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की समस्‍या और भी ज्‍यादा बढ़ गई। 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 49.7 फीसदी वोटों के साथ छत्तीसगढ़ की कुल 11 में से 10 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस 39.1 प्रतिशत वोट प्राप्‍त करने के बाद भी केवल एक ही सीट जीत सकी।

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