चालान के लिए यूपी पुलिस के मारपीट करने का सच

TWITTER

उत्तर प्रदेश के दो पुलिसकर्मियों के हाथों एक आदमी की उसके बच्चे के सामने पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है.

वीडियो के साथ ये दावा किया जा रहा है कि 'यूपी के सिद्धार्थनगर ज़िले में गाड़ी चेकिंग के दौरान मुँह मांगा रुपया न मिलने के कारण पुलिसवालों ने युवक को बेरहमी से पीटा'.

तीन मिनट के इस वीडियो की शुरुआत में दिखाई देता है कि एक युवक बीच सड़क पर बैठा हुआ है और उसे दो पुलिसवालों ने घेर रखा है. पास ही में एक छोटा बच्चा भी घूमता दिखाई देता है.

वीडियो में कुछ ही देर बाद एक पुलिसकर्मी वहाँ खड़े लोगों से मोटरसाइकिल की तरफ इशारा करते हुए उसे थाने ले जाने को कहते हैं और इसी बीच दूसरे पुलिसकर्मी उस युवक को पीटना शुरु कर देते हैं.

इसके बाद वीडियो में दिखता है कि दोनों पुलिसकर्मी युवक को लात-घूसों से बुरी तरह पीटते हैं और पिटने वाला व्यक्ति उनसे अपनी ग़लती पूछता रहता है.

सोशल मीडिया पर जिन लोगों ने इस वीडियो को शेयर किया है, उन्होंने इसे ट्रैफ़िक कानूनों में हुए बदलावों से जोड़कर पोस्ट किया है और लिखा है कि पुलिस ने गाड़ी चेकिंग के बाद जब युवक से पैसे ऐठने की कोशिश की तो दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और पुलिस ने इसी बात पर उसे पीट दिया.

सोशल मीडिया पर अब तक इस वीडियो को दस लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है और हज़ारों बार इस वीडियो को शेयर किया गया है.

SOCIAL MEDIA GRAB

बीबीसी के बहुत से पाठकों ने वॉट्सऐप के ज़रिये हमें यह वीडियो भेजा है और इस घटना का सच जानना चाहा है.

अपनी पड़ताल में हमने पाया कि पुलिस की मारपीट का यह वीडियो भ्रामक संदर्भ के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.

स्थानीय पुलिस और वीडियो में पिटते दिख रहे युवक से बात करके हमें पता चला कि ये मामला ट्रैफ़िक नियम तोड़ने, पुलिस के रिश्वत माँगने या चालान काटे जाने पर हुई मारपीट का नहीं है.

WHATSAPP WEB

क्या था पूरा मामला?

वायरल वीडियो को शेयर करते हुए बहुत से लोगों ने फ़ेसबुक पर लिखा था कि ये मामला यूपी में सिद्धार्थनगर ज़िले के खेसरहा थाने का है, इसलिए अपनी पड़ताल की शुरुआत हमने खेसरहा थानाध्यक्ष रामाशीष यादव से बातचीत के साथ की.

रामाशीष यादव ने बीबीसी से इस घटना की पुष्टि की और बताया, "यह 10 सितंबर 2019 की घटना है. टकारपुर पुलिस चौकी के अंतर्गत आने वाले सकरपुर नाम के चौराहे से जब मुहर्रम का जुलूस निकलने वाला था, उस समय रियाज़ुद्दीन उर्फ़ राजू और रिंकू पांडे के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया. अख़्तर नाम के एक लड़के ने दोनों के झगड़े की सूचना पुलिस को दी थी. अख़्तर राजू का दोस्त है."

"जब पुलिस मौक़े पर पहुँची तो रिंकू ने सिपाहियों के साथ बदतमीज़ी की और उनको गालियाँ देने लगा. इसी वजह से पुलिस ने रिंकू पांडे को पीटा. बाइक के चालान या पुलिस चैकिंग जैसी कोई बात हुई ही नहीं थी."

पुलिस के अनुसार रिंकू पांडे का रियाज़ुद्दीन नाम के जिस शख़्स से झगड़ा हुआ, वो सकरपुर इलाक़े का ही रहने वाला है.

रियाज़ुद्दीन ने बीबीसी को बताया, "हम मुहर्रम का जुलूस देखने के लिए सड़क पर खड़े थे. इतने में रिंकू मोटरसाइकिल पर आया और हमें गालियाँ देते हुए कहने लगा कि यहाँ क्यों खड़े हो, हटो वरना बाइक ऊपर चढ़ा देंगे. इस बात पर बहस हुई तो हमने पुलिस को फ़ोन कर दिया. पुलिस आयी तो उन्होंने रिंकू से थाने चलने को कहा जिस पर खींचतान हुई और फिर मारपीट भी."

'पुलिस ने नहीं मांगे पैसे'

वीडियो में पुलिस वाले जिस शख़्स को पीटते हुए दिख रहे हैं, उनका नाम है रिंकू पांडे जो सकरपुर इलाक़े में ही मोबाइल रिपेयरिंग की एक दुकान चलाते हैं.

बीबीसी ने रिंकू पांडे से भी बात की. उन्होंने बताया, "दोपहर क़रीब तीन बजे रियाज़ुद्दीन मेरी दुकान पर फ़ोन चार्ज करने के लिए आया था. मुझे दुकान बंद करने की जल्दी थी, इसलिए मैंने उसे मना कर दिया. इस पर रियाज़ुद्दीन ने मुझे धमकाया. फिर भी मुझे लगा कि ये बात यहीं ख़त्म हो गई है."

"पर जब रियाज़ुद्दीन ने मुझे चौराहे पर रोका तो हमारी बहस हो गई. इसके बाद उसके दोस्त अख़्तर ने पुलिस को फ़ोन कर दिया. पुलिस ने आकर मेरी बाइक की चाबी छीनने की कोशिश की जिसे लेकर मेरी पुलिस से बहस हुई. वो मुझे थाने चलने के लिए कह रहे थे. लेकिन देखते ही देखते उन्होंने मुझे मारना शुरु कर दिया."

बीबीसी ने जब उनसे सोशल मीडिया पर फैली अफ़वाह के बारे में सवाल किया तो रिंकू पांडे कहा, "पुलिस चेकिंग वाली बात झूठ है. पुलिस ने मुझसे पैसे नहीं मांगे थे. ना ही मैंने कोई ट्रैफ़िक नियम तोड़ा था."

रिंकू ने हमें बताया कि पहले पुलिस उनकी तहरीर पर शिक़ायत दर्ज करने को तैयार नहीं थी. लेकिन घटना के तीन दिन बाद यानी शुक्रवार (13 सितंबर 2019) शाम को पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की.

दोनों पुलिसकर्मी निलंबित

रिंकू पांडे को पीटने वाले पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई हुई, यह जानने के लिए हमने सिद्धार्थनगर ज़िले के एसपी धरमवीर सिंह से बात की.

उन्होंने बताया, "जिस वक़्त यूपी पुलिस के दारोगा विरेंद्र मिश्र और सिपाही महेंद्र प्रसाद ने रिंकू पांडे को पीटा, उस वक़्त रिंकू शराब के नशे में था. इस घटना की सूचना मुझे 11 सितंबर को मिली. दोनों पक्षों ने माना कि उनके बीच फ़ोन चार्जिंग को लेकर झगड़ा हुआ था."

"पर अपनी जाँच में हमने पाया है कि पूरे मामले में पुलिस का रवैया भी ठीक नहीं रहा. इसलिए दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है."

एसपी धरमवीर सिंह ने कहा कि दोनों पुलिसवालों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा-323, 504,और 166 के तहत मुक़दमा भी दर्ज कर लिया गया है.

सोशल मीडिया में किये गए दावों पर उन्होंने कहा कि पूरी घटना में कहीं भी बाइक चेकिंग या चालान से संबंधित कोई बात नहीं थी.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+