छत्तीसगढ़: जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र खा रहे हैं दर-दर की ठोकरें
रायगढ़। विशेष पिछड़ी जनजाति जिसके लिए सरकार कई कारगर कदम उठा रही है लेकिन एक ऐसी विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग भी हैं जिन्हें प्रशासन की लंबे समय से अनदेखी का सामना करना पड़ रहा है। जो अपने अधिकारों के लिए भटक रहे हैं लेकिन इनकी सुध कोई नहीं ले रहा है। आपको बता दें कि राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पण्डो जनजाति के लोग अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र नहीं बनने से शिक्षा और नौकरी से वंचित हो रहे हैं।

पण्डो जनजाति के 33 लोगों को आदिम जाति कल्याण विभाग ने विभिन्न पदों पर पदस्थ लोगों को नौकरी से हटा दिया था। तब से ये लोग दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। अब पण्डो जनजाति के लोग अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन कर रहे हैं। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ एवं लैलूंगा विकासखंड के वन क्षेत्र में रहनेवाले विशेष पिछड़ी जनजाति राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पण्डो जनजाति की करीब दो हजार आबादी है।
पण्डो जनजाति के 33 लोगों को वर्ष 2006 में तत्कालीन रायगढ़ कलेक्टर ने धरमजयगढ़ में शिविर लगाकर आदिमजाति कल्याण विभाग में सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति कराई थी। इस विशेष भर्ती अभियान में विभाग के द्वारा पण्डो जनजाति के 33 लोगों को जलवाहक, भृत्य व रसोईया के पद पर नियुक्त किया था, लेकिन वर्ष 2014-15 में उन सभी लोगों को नौकरी से हटा दिया गया।पण्डो जनजाति संघ के सचिव मोहन पण्डो का का कहना है कि उनके पास जाति प्रमाण पत्र नहीं है।
विशेष पिछड़ी जनजाति एवं राष्ट्रपति के दत्तकपुत्र होने के बाद भी हमे अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र नही दिया जा रहा। इसलिए अब वे बाल-बच्चों के साथ पण्डो जनजाति के लोग अनिश्चतकालीन धरना कर रहे है। इसी क्रम में वें मिनी स्टेडियम धरना स्थल से कलेक्टोरेट जाकर राष्ट्रपति, राज्यपाल,अजजा आयोग एवं मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। वे अपने पारम्परिक अस्त्र तीर-धनुष के साथ धरना स्थल पर बीते 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई प्रशासनिक पहल नहीं होने से पण्डो जनजाति के लोग खासे आक्रोशित नजर आ रहे हैं।












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