मोरबी के टूट चुके सस्पेंशन ब्रिज की कहानी, कैसे और कब बना था ये पुल
लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व मोरबी के राजा सर वाघजी ठाकोर ने सस्पेंशन ब्रिज का निर्माण कराया था.
उस समय इसे 'कलात्मक और तकनीकी चमत्कार' कहा जाता था.
इस पुल का उद्घाटन 20 फ़रवरी 1879 को मुंबई के तत्कालीन गवर्नर रिचर्ड टेम्पल ने किया था.
पुल के निर्माण के लिए आवश्यक सभी सामग्री इंग्लैंड से आई थी और निर्माण की लागत तब 3.5 लाख रुपए थी.
गुजरात के मोरबी में रविवार को माच्छू नदी पर बने सस्पेंशन ब्रिज के टूटने से सैकड़ों लोग नदी में गिर गए और कई लोगों की मौत हो गई.
समाचार लिखे जाने तक मरने वालों की संख्या 140 को पार कर चुकी है.

इस त्रासदी के बाद कई लोग अब भी लापता हैं और मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
वर्षों पुराना ये पुल मोरबी के शाही दिनों की याद दिलाता था. मोरबी के राजा सर वाघजी ठाकोर ने लगभग डेढ़ सौ साल पहले आधुनिक यूरोपीय तकनीक का उपयोग करके इस पुल का निर्माण कराया था.
मोरबी सस्पेंशन ब्रिज: एक 'कलात्मक और तकनीकी चमत्कार'
सस्पेंशन ब्रिज का उद्घाटन 20 फ़रवरी 1879 को मुंबई के तत्कालीन गवर्नर रिचर्ड टेम्पल ने किया था. पुल के निर्माण के लिए आवश्यक सभी सामग्री इंग्लैंड से आई थी और निर्माण की लागत तब 3.5 लाख रुपए थी.
सस्पेंशन ब्रिज के कारण शहर में बड़ी संख्या में पर्यटक आते थे और उस समय इसे एक 'कलात्मक और तकनीकी चमत्कार' के रूप में देखा जाता था.
https://www.youtube.com/watch?v=be5iG_k43og
सस्पेंशन ब्रिज 1.25 मीटर चौड़ा और 233 मीटर लंबा था. ये ब्रिज दरबारगढ़ पैलेस और शाही निवास नज़रबाग पैलेस को भी जोड़ता था.
वर्ष 2001 में गुजरात में आए विनाशकारी भूकंप से यह पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था.
इस पुल के निर्माण के पीछे सर वाघजी ठाकोर पर औपनिवेशिक काल के स्थापत्य का स्पष्ट प्रभाव था. वाघजी ठाकोर मोरबी शहर के विकास में तेज़ी लाने के लिए इससे प्रेरित हुए थे.
सर वाघजी ठाकोर ने 1922 तक मोरबी पर शासन किया. शाही काल के दौरान मोरबी शहर की प्लानिंग में यूरोपीय शैली का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.
शहर के मुख्य चौराहे को 'ग्रीन चौक' के नाम से जाना जाता है, जहाँ तीन अलग-अलग दरवाज़ों के माध्यम से पहुँचा जा सकता है.
इन तीनों दरवाज़ों के निर्माण में राजपूत और इतालवी शैली का मेल साफ़ देखा जा सकता है.
मोरबी ज़िले की वेबसाइट के अनुसार, सस्पेंशन ब्रिज मोरबी रॉयल्टी के 'प्रगतिशील और वैज्ञानिक दृष्टिकोण' को प्रदर्शित करता है.
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पुल का मालिक कौन है?
अंग्रेजी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक़ इस पुल का मालिकाना हक़ फ़िलहाल मोरबी नगर पालिका के पास है.
नगर पालिका ने हाल ही में ओरेवा ग्रुप के साथ एक समझौता पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया था और 15 वर्षों के लिए पुल के रख-रखाव और संचालन का काम उसे सौंपा था.
https://www.youtube.com/watch?v=rKZd0sbIfQk
ओरेवा समूह के एक प्रवक्ता ने समाचार पत्र को बताया, "कई लोगों ने पुल को बीच से हिलाने की कोशिश की और प्रथम दृष्टया यही लगता है कि इसी वजह से पुल गिर गया."
हाल ही में पुल की मरम्मत के बाद इसे 26 अक्तूबर को जनता के लिए खोल दिया गया था. हालाँकि नगर पालिका का कहना है कि उसे इसकी जानकारी नहीं दी गई है.
मोरबी नगर पालिका के मुख्य अधिकारी संदीप सिंह झाला ने बताया, "पुल मोरबी नगर पालिका की संपत्ति है, लेकिन हमने इसे कुछ महीने पहले 15 साल के लिए ओरेवा समूह को रख-रखाव और प्रबंधन के लिए सौंप दिया था. हालाँकि निजी फ़र्म ने हमें बिना सूचित किए लोगों के लिए खोला था. इसलिए हम पुल का सुरक्षा ऑडिट नहीं कर सके."
सस्पेंशन ब्रिज के लिए टिकटों की बिक्री भी ओरेवा ग्रुप ही करती थी. 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 12 रुपए और वयस्कों के लिए 17 रुपए टिकट की क़ीमत रखी गई थी.
ओरेवा ग्रुप घड़ियों से लेकर ई-बाइक तक कई तरह के इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट बनाती है. कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक़ कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी घड़ी निर्माता कंपनी है.
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क्या है पूरी घटना?
माच्छू नदी पर बना पुल रविवार शाम क़रीब साढ़े छह बजे ढह गया जिससे कई लोग नदी में गिर गए.
आईजी अशोक यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अब तक 141 लोगों की मौत हो चुकी है और दो लोग अब भी लापता हैं.
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मोरबी त्रासदी में मारे गए लोगों के परिवार को 2 लाख रुपए और प्रधान मंत्री राहत कोष से घायलों को 50,000 रुपए की सहायता राशि की घोषणा की है.
इसके साथ ही गुजरात सरकार ने आर्थिक मदद का भी एलान किया है.
ग़ौरतलब है कि पुल को छह महीने पहले मरम्मत के लिए बंद कर दिया गया था और चार दिन पहले 26 अक्तूबर को जनता के लिए खोला गया था.
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