दिल्ली की कैंसर कॉलोनी की कहानी, डॉक्टर ने हाथ कटवाने के लिए कह दिया..

पिंकी शर्मा
BBC
पिंकी शर्मा

"मेरा ऑपरेशन पहले हुआ था, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं पहले जाऊँगी. हम आपस में बस यही बात करते थे कि पता नहीं भगवान का बुलावा हम दोनो में से पहले किसको आए."

51 साल की पिंकी शर्मा की आँखों में आंसू हैं.

वो बताती हैं कि उनके पति कांति स्वरूप को कैंसर था. एक साल पहले पति को खो चुकीं पिंकी ख़ुद भी स्तन कैंसर से लड़ रही हैं.

फ़िलहाल वो पीने के पानी की सप्लाई का काम करती हैं. उनके दो विवाहित बच्चे हैं लेकिन वो अपना इलाज नहीं करा रही हैं और अपना पैसा बच्चों के लिए बचा रही हैं.

इसकी वजह वो बताती हैं, "अगर अपने ऊपर ख़र्चा करती हूँ तो घर पर बच्चों के लिए कुछ भी नहीं रहता, और अगर नहीं करती हूँ तो जीने की उम्मीद हर किसी को मरते टाइम तक ये रहती है कि हमें ज़िंदगी और मिले चाहे जिस भी कंडीशन में हो…"

"कभी-कभी दर्द होता है, चुभन होती है पर मैं उसे इग्नोर करती हूँ..."

अवैध जींस डाइंग फ़ैक्ट्री
BBC
अवैध जींस डाइंग फ़ैक्ट्री

अवैध जींस डाइंग फ़ैक्ट्रियां

यह कहानी अकेले पिंकी की नहीं है. पूर्वी दिल्ली के शिव विहार इलाक़े में पिंकी जैसे और भी लोग हैं जो कैंसर से जूझ रहे हैं.

कुछ लोग तो इस इलाके को कैंसर कॉलोनी के नाम से बुलाने लगे हैं. यहाँ रहने वाले लोगों का मनना है कि अवैध जींस डाइंग फ़ैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल इसके लिए ज़िम्मेदार है.

शिव विहार के इस इलाक़े में आपको पिंकी जैसे कैंसर पीड़ित हर दूसरी-तीसरी गली में मिल जाएंगे.

हालांकि, प्रशासन के पास इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है.

ऐसे ही एक कैंसर पीड़ित 17 साल के आलोक हैं. वे बताते हैं, "मेरा ऑपरेशन हुआ था लेकिन उसके बाद भी एक के बाद एक कई फुंसियां निकल आईं. फिर दूसरे अस्पताल में दिखाया जहां कैंसर के मर्ज की पहचान हुई और हाथ काटने को बोल दिया."

"उस वक़्त का दुःख तो बहुत होता है लेकिन पापा ने बोला कि मजबूरी है, हाथ कटवा लो... मर जाओगे…"

आलोक
BBC
आलोक

कपड़े रंगने वाले केमिकल

दिल्ली स्थित फोर्टिस अस्तपाल के डॉक्टर प्रदीप जैन बताते हैं, "एक ही इलाक़े में इतने सारे कैंसर के मामले सामने आने की वजह कपड़ों को रंगने वाले केमिकल हो सकते हैं."

उनका कहना है कि हमारे देश में इसे लेकर कोई ख़ास रिसर्च नहीं हुई है.

वे कहते हैं, "कोई भी केमिकल किसी भी तरह से अगर शरीर में दाखिल होता है, चाहे वो सांस के रास्ते ही क्यों न हो, फेफड़े या फिर त्वचा के ज़रिए या खाने की नली से अंदर जाए... और अगर ये भारी मात्रा में हो तो नुक़सान होना तय है."

"सैंद्धांतिक रूप से इस बात की पूरी संभावना है कि ये सब चीज़ें कैंसर पैदा कर सकती हैं."

सवाल ये उठता है कि ये केमिकल किस तरह से पानी और खाने का हिस्सा बन रहे हैं.

डॉक्टर प्रदीप जैन बताते हैं, "कपड़ों को रंगने के काम आने वाले केमिकल्स नाली के रास्ते ग्राउंड वाटर (भूजल) में मिल जाते हैं और जब लोग ये पानी पीते हैं तो आहिस्ता-आहिस्ता ये केमिकल उनके शरीर तक पहुंचने लगता है. ये कैंसर का कारण हो सकता है."

नाला
BBC
नाला

सीबीआई जांच के आदेश

ऐसा नहीं है कि प्रशासन को इस मामले की भनक नहीं है.

पिछले साल मई में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले का ख़ुद ही संज्ञान लिया था और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को जांच के आदेश दिए थे.

सीबीआई ने यहां से पानी के सैंपल लिए, जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाक़ी है.

पूर्वी दिल्ली के मेयर बिपिन बिहारी कहते हैं कि इस मामले में अवैध फ़ैक्ट्रियों पर कार्रवाई की गई है.

उन्होंने बताया, "हाई कोर्ट के आदेश की तामील करते हुए दिल्ली सरकार ने एक सर्वे करवाया था. सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस इलाके में 239 फ़ैक्ट्रियां अवैध रूप से चल रही थीं. इन फ़ैक्ट्रियों का चालान काटा गया और उन्हें सील कर दिया गया है."

"इन फ़ैक्ट्रियों की बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के आदेश दिए गए हैं."

शिव विहार
BBC
शिव विहार

अवैध फ़ैक्ट्रियां ज़रूर सील कर दी गई हैं लेकिन चोरी-छिपे ये काम अभी भी जारी है.

हमने ऐसी ही फैक्ट्रियां चलाने वालों से बात करने की कोशिश की लेकिन वे कुछ नहीं बोले.

यहां कई परिवार ऐसे हैं, जिनमें कई सदस्यों कैंसर से बीमार हैं और उन्हें इलाज के साथ-साथ सरकार की मदद का भी इंतज़ार है.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+