वो 7 मामले जिन्हें नहीं सुनेंगे शिकायत करने वाले चार जज
चार न्यायाधीशों के प्रेस कांफ्रेंस करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सात मामलों की सूची जारी की है, जिन्हें संवैधानिक पीठ सुनेगी. यह संवैधानिक पीठ इस हफ़्ते से सुनवाई करने जा रही है.
लेकिन इस बेंच में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चारों न्यायधीश जे. चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कूरियन जोसेफ़ में से कोई भी शामिल नहीं है.
चारों न्यायधीशों ने सुप्रीम कोर्ट में किसी बेंच को केस दिए जाने में लोकतंत्र की अवहेलना होने के आरोप लगाए थे.
इससे पहले आधार को चुनौती देने वाले मामले के लिए संवैधानिक पीठ का गठन किया गया था, जिसमें मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायाधीश एके सीकरी, एएम खनविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण शामिल थे.
जानिए वो सात मामले, जिनकी सुनवाई करेगी संवैधानिक पीठ
धारा 377 की वैधता
मौजूदा वक्त में भारत में दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बनाए गए समलैंगिक सम्बन्धों को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है. अपराध साबित होने पर 10 साल तक की जेल से लेकर उम्रकैद तक की सज़ा हो सकती है.
आईपीसी की धारा-377 में कहा गया है कि किसी पुरुष, महिला या जानवर के साथ 'अप्राकृतिक सम्बन्ध' बनाना अपराध है. सुप्रीम कोर्ट धारा-377 पर फिर से विचार करेगा.
सबरीमाला में महिलाओं का प्रवेश
दूसरा मामला केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को लेकर है.
सबरीमला मंदिर में दस से 50 साल तक की महिलाएं, जो रजस्वला हैं, उनके प्रवेश पर पाबंदी है. इसका सामाजिक संगठनों और महिलाओं विरोध कर रही हैं. रजस्वला महिलाएं यानी जिनका मासिक धर्म होता हो.
इसके पीछे की मान्यता यह है कि इस मंदिर के मुख्य देवता अयप्पा ब्रह्मचारी थे. ऐसे में इस तरह की महिलाओं के मंदिर में जाने से उनका ध्यान भंग होगा.
पारसी महिला की धार्मिक पहचान
अगला मामला पारसी महिला के गैर-पारसी परिवार में शादी के बाद धार्मिक पहचान को लेकर है.
एक पारसी महिला ने गैर-पारसी लड़के से शादी की थी. जिसके बाद उन्हें एक पारसी मंदिर में प्रवेश देने से मना कर दिया गया.
इसका महिला ने विरोध किया था. इसके बाद मामला गुजरात हाई कोर्ट में गया जहां महिला की याचिका को ख़ारिज कर दिया गया था.
व्यभिचार पर दंडनीय कानून की वैधता
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आईपीसी की धारा 497 के तहत व्यभिचार में केवल पुरुषों के लिए सज़ा के प्रावधान को चुनौती दी गई है.
इस कानून के तहत शादी के बाद संबंध पाए जाने पर सिर्फ पुरुष अपराधी ठहराया जा सकता है महिला नहीं.
हालांकि, ये कानून कहता है कि अगर कोई पुरुष किसी शादीशुदा महिला से बिना उसके पति की सहमति से संबंध बनाता है तो उस पुरुष को इस धारा के तहत सज़ा हो सकती है.
सांसदों/विधायकों पर आपराधिक मामले
इस मामले में याचिका दायर की गई है कि जिन सांसदों या विधायकों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं उन्हें ट्रायल कोर्ट में आरोप निर्धारित होने के साथ ही अयोग्य करार दे देना चाहिए.
वर्तमान कानून के मुताबिक कोई सांसद या विधायक किसी मामले में दोषी होने पर सजा की अवधि के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता है.
इसके अलावा संवैधानिक पीठ टैक्स और उपभोक्ता कानून से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई करेगी.
-
Delhi NCR Weather Today: दिल्ली-NCR में होगी झमाझम बारिश, दिन में छाएगा अंधेरा, गिरेगा तापमान -
युद्ध के बीच ईरान ने ट्रंप को भेजा ‘बेशकीमती तोहफा’, आखिर क्या है यह रहस्यमयी गिफ्ट -
Gold Silver Price: सोना 13% डाउन, चांदी 20% लुढ़की, मार्केट का हाल देख निवेशक परेशान -
Ram Navami Kya Band-Khula: UP में दो दिन की छुट्टी-4 दिन का लंबा वीकेंड? स्कूल-बैंक समेत क्या बंद-क्या खुला? -
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा पंचतत्व में विलीन, पिता का भावुक संदेश और आखिरी Video देख नहीं रुकेंगे आंसू -
'मुझे 10 बार गलत जगह पर टच किया', Monalisa ने सनोज मिश्रा का खोला कच्चा-चिट्ठा, बोलीं-वो मेरी मौत चाहता है -
Petrol-Diesel Shortage: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल समेत ईंधन की कमी है? IndianOil ने बताया चौंकाने वाला सच -
कौन हैं ये असम की नेता? जिनके नाम पर हैं 37 बैंक अकाउंट, 32 गाड़ियां, कुल संपत्ति की कीमत कर देगी हैरान -
Iran Vs America: ईरान ने ठुकराया पाकिस्तान का ऑफर, भारत का नाम लेकर दिखाया ऐसा आईना, शहबाज की हुई फजीहत -
LPG Crisis: एलपीजी संकट के बीच सरकार का सख्त फैसला, होटल-रेस्टोरेंट पर नया नियम लागू -
Trump Florida defeat: ईरान से जंग ट्रंप को पड़ी भारी, जिस सीट पर खुद वोट डाला, वहीं मिली सबसे करारी हार -
Who is Aryaman Birla Wife: RCB के नए चेयरमैन आर्यमन बिड़ला की पत्नी कौन है? Virat Kohli की टीम के बने बॉस












Click it and Unblock the Notifications