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बढ़ सकती है चुनाव खर्च की सीमा, जानिए अब कितने रुपए तक व्यय कर सकेंगे उम्मीदवार ?

नई दिल्ली, 30 नवंबर: चुनाव आयोग उम्मीदवारों की खर्च की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। पिछले साल अक्टूबर में इसने इसके लिए एक समिति गठित की थी, जिसकी सिफारिशें मान ली गईं तो लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों की खर्च की सीमा बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। हालांकि, कोविड महामारी की वजह से खर्चों में हुए इजाफे को लेकर पिछले साल चुनाव आयोग ने इसमें अस्थाई बढ़ोतरी का प्रबंध भी किया था, लेकिन वह भी मौजूदा दौर में अपर्याप्त माना जा रहा है। इसलिए एक एक्सपर्ट कमिटी से सुझाव मांगे गए थे। हो सकता है कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले ही उम्मीदवारों को कानूनी तौर पर और ज्यादा पैसे खर्च करने की छूट मिल जाए।

बढ़ सकती है चुनाव खर्च की सीमा

बढ़ सकती है चुनाव खर्च की सीमा

लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों का चुनाव खर्च जल्द ही बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी जो लोकसभा में चुनाव खर्च की सीमा 77 लाख रुपये रखी गई है, इसमें बहुत ज्यादा इजाफा होने वाला है। अगर चुनाव आयोग तैयार हुआ तो इसी तरह की बढ़ोतरी विधानसभा के चुनावों में भाग्य आजमाने वाले उम्मीदवारों को भी मिल सकती है और वह भी पहले से कहीं ज्यादा रकम कानूनी तौर पर चुनावों में खर्च कर सकेंगे। जानकारी के मुताबिक मतदाताओं की संख्या बढ़ने और चुनाव में होने वाले खर्चे बढ़ने की वजह से चुनाव खर्च की सीमा की समीक्षा के लिए चुनाव आयोग ने एक विशेष समिति गठित की थी, उसने आयोग को चुनाव खर्च की सीमा में बढ़ोतरी के लिए कई तरह के विकल्प सुझाए हैं।

2014 में बढ़ाई गई थी चुनाव खर्च की सीमा

2014 में बढ़ाई गई थी चुनाव खर्च की सीमा

माना जा रहा है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर आने वाले कुछ हफ्तों में चुनाव आयोग इसपर कोई फैसला ले सकता है। बता दें कि लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में प्रत्याशियों की खर्च की सीमा कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961 के नियम 90 के तहत तय किए जाते हैं, जिसमें किसी तरह के बदलाव के लिए कानून मंत्रालय की मंजूरी भी लेनी पड़ती है। चुनाव खर्च की सीमा वह होती है, जो एक उम्मीदवार कानूनी तौर पर एक चुनाव में खर्च कर सकता है। इसमें पिछली बार 2014 में बदलाव किए गए थे और 2018 में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विभाजन के बाद भी बदला गया था। अस्थाई तौर पर थोड़ी बढ़ोतरी पिछले साल भी की गई थी।

2020 में अस्थाई तौर पर बढ़ा चुनाव खर्च

2020 में अस्थाई तौर पर बढ़ा चुनाव खर्च

2020 में कोरोना महामारी की वजह से चुनाव आयोग ने चुनाव खर्च की सीमा में अस्थाई तौर पर बदलाव किया था। इस हिसाब से अभी लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों की चुनाव खर्च की सीमा 77 लाख रुपये और विधानसभा चुनावों के लिए 30 लाख रुपये निर्धारित है। महामारी से पहले यह सीमा क्रमश: 70 लाख रुपये और 28 लाख रुपये ही निर्धारित थी। अक्टूबर, 2020 में पैनल गठित करते समय चुनाव आयोग के बयान में कहा गया था, 'पिछले 6 वर्षों में सीमा नहीं बढ़ाई गई थी, बावजूद इसके कि 2019 में मतदाताओं की संख्या 83.4 करोड़ से बढ़कर 91.0 करोड़ हो गई और आज की तारीख में यह 92.1 करोड़ हो चुकी है। इसके अलावा, इस अवधि में लागत मुद्रास्फीति सूचकांक 2019 में 220 से बढ़कर 280 और अब 301 हो चुका है। '

अब कितने रुपए तक खर्च कर सकेंगे उम्मीदवार ?

अब कितने रुपए तक खर्च कर सकेंगे उम्मीदवार ?

जानकारी के मुताबिक भारतीय चुनाव आयोग के डायरेक्टर जनरल उमेश सिन्हा और भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी हरीश कुमार की दो सदस्यीय समिति ने जो नई सिफारिशें की हैं, उसके मुताबिक लोकसभा में चुनाव खर्च की सीमा मौजूदा 77 लाख रुपये से बढ़कर 90 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक की जा सकती है। अगर इसी को आधार मानें तो विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को 35 से 38 लाख रुपये तक खर्च करने की छूट मिल सकती है। बता दें कि यह सीमा सिर्फ उस खर्च के बारे में है, जिसका ब्योरा उम्मीदवार कानूनी रूप से चुनाव आयोग को परिणाम आने के 30 दिन के अंदर देने के लिए बाध्य हैं। वैसे कहा जाता है कि उम्मीदवारों का खर्च इस सीमा से कहीं ज्यादा होता है। तय सीमा से ज्यादा खर्च जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 123 (6) के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है।

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    चुनाव में किन चीजों पर होता है खर्च ?

    चुनाव में किन चीजों पर होता है खर्च ?

    किसी भी चुनाव में उम्मीदवारों के चुनाव खर्च में प्रचार के लिए गाड़ियों का इस्तेमाल, मुहिम से जुड़े उपकरणों पर खर्च, चुनावी रैलियां, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया पर होने वाले खर्च, बैनर,पर्चे चुनाव क्षेत्र के दौरों पर होने वाले खर्च और बाकी सामग्रियों को शामिल किया जाता है। मौजूदा दौर में सोशल मीडिया और पब्लिसिटी भी चुनाव खर्च का बहुत बड़ा जरिया बन चुका है। (चुनावों से संबंधित तस्वीर प्रतीकात्मक)

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