‘द एक्सिडेन्टल प्राइम मिनिस्टर’ में गांधी परिवार पर हमले का माध्यम बने हैं डॉ मनमोहन
नई दिल्ली। द एक्सिडेन्टल प्राइम मिनिस्टर में प्रधानमंत्री की भूमिका निभाने वाले अनुपम खेर ने अपनी मां का एक फ़िल्म रिव्यू ट्वीट किया है। इसे उन्होंने "मदर ऑफ ऑल रिव्यूज़ : दुलारी रिव्यूज़ ऑफ द एक्सिडेन्टल प्राइम मिनिस्टर" बताया है।

अनपुम खेर और उनकी मम्मी के बीच संवाद में फ़िल्म रिव्यू समझिए
अनुपम खेर : मम्मी कल आपने पिक्चर देखी मेरी?
अनुपम खेर की मां : मैं तो मैं..चुप रह..मैंने क्या हो गया मेरे को दिल को...मैंने कहा-ये बिट्टू है नहीं..या और कोई है..करता क्या है तुम. मुझे समझ ही नहीं आती..
अनुपम खेर : क्या करता हूं मम्मी, एक्टिंग करता हूं
मां : एक्टिंग क्या, ऐसे एक्टिंग करते हैं? देखो..ऐसे ...(ऐक्टिंग करके दिखाती हैं) ये भी नहीं हंस रहा देख, देख बेवकूफ...देख रहा है मेरे को...
अनुपम खेर : अच्छी लगी कि नहीं?
मां : मुझे बहुत अच्छी लगी। सब दुनिया को अच्छी लगी। इन्होंने टिकटें बुक करीं। कल के लिए। हां..दिल्ली में...
अनुपम खेर : और मनमोहन सिंहजी अच्छे लग रहे हैं आपको इस फ़िल्म में?
मां : और मनमोहन सिंह बहुत अच्छा लगा। बहुत ही। ऐसा शरीफ था वो बेचारा। लगता था दूर से ही शरीफ हैं।
अनुपम खेर : है ना?
मां : तभी लोग..शरीफ को बेवकूफ मानते हैं। ये नहीं पता कि वे बहुत तेज होते हैं।
अनुपम खेर : हां...मेरी ऐक्टिंग अच्छी है न, मतलब सौ में से कितने मार्क्स दोगे?
मां : सौ में से सौ? क्या बात कर रही हो मां?....

अनुपम ने लाचार, मजबूर मगर देशभक्त के रूप में रोल निभाया
वाकई अनुपम खेर की मां ने फ़िल्म द एक्सिडेन्टल प्राइम मिनिस्टर का जो रिव्यू दिया है उसमें फ़िल्म की पूरी समीक्षा है। अनुपम खेर अपने स्वाभाव के विपरीत नज़र आते हैं। उनका शरीर भी मनमोहन सिंह की तरह व्यवहार करते हुए खामोशी को उछल-उछल कर बयां करता है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बेचारे भी लगे हैं, शरीफ भी। कई की नज़रों में बेवकूफ़ भी और किसी-किसी के लिए बहुत तेज भी। फिर भी अनुपम खेर को उनकी एक्टिंग के लिए नम्बर देने का पैमाना उनकी मां से अलग हो सकता है, फिर भी अनुपम खेर ने लाजवाब एक्टिंग की है ये सभी दर्शक बता रहे हैं।
फ़िल्म में मनमोहन सिंह मतलब शरीफ, बेवकूफ और तेज व्यक्ति भी
पूरी फ़िल्म दरअसल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को शरीफ, बेवकूफ और नतमस्त होकर 10 साल तक प्रधानमंत्री रह जाने वाले बहुत तेज व्यक्ति के रूप में दर्शाया गया है। मगर, कहानी का संदेश कहानी का मुख्य पात्र नहीं है। कहानी एक व्यक्ति, एक परिवार और उनके हाथों में समूचा देश- यही दिखाने की कोशिश की गयी है। निशाना सोनिया गांधी है, कांग्रेस है। निशाना परिवारवाद, वंशवाद के नाम पर गांधी-नेहरू परिवार है।

कॉस्मेटिक्स से लेकर मेकअप तक में गांधी परिवार के लिए नकारात्मक भाव
आम तौर पर किसी फ़िल्म में आप मेकअप से संदेश पा लेते हैं कि कौन विलेन है और कौन हीरो। सोनिया गांधी के किरदार में सुजान बर्नेट के तीखी भवें और गहरे मेकअप उन्हें बिना कहे विलेन साबित कर रहे हैं। यहां तक कि राहुल के रूप में अर्जुन माथुर और प्रियंका के रूप में आहना ने खुद को इस तरह पेश किया है मानो वे एक्टिंग नहीं, मिमिक्री कर रहे हों। गांधी परिवार के सदस्यों के लिए भूमिका को इस तरह गढ़ा गया है और पात्रों ने उसे इस रूप में जीया है मानो वे एक्टिंग नहीं कर रहे हों, हास्य गढ़ रहे हों।
संजय बारू की भूमिका में अक्षय खन्ना दिखे जबरदस्त
संजय बारू के रूप में अक्षय खन्ना की भूमिका हीरो वाली है। वे ‘सच बताने वाले' के तौर पर हैं। लिहाजा सारे डायलॉग उनके अनुकूल हैं। अपने किरदार से अक्षय खन्ना ने संजय बारू की किताब को किसी हद तक जीवंत बना दिया है। परीक्षा की हर घड़ी में डॉ मनमोहन सिंह को देशभक्त साबित किया है, वहीं लाचार और मजबूर भी दिखाया है। कुछ इस तरह, जिससे दर्शकों को उनके प्रति सहानुभूति हो। डॉ मनमोहन सिंह के लिए सहानुभूति का अर्थ सोनिया गांधी और उनके परिवार के लिए नफरत या गुस्सा होता है। मगर, ये बात कही नहीं गयी है, महसूस करने लायक है।

फ़िल्म में मनमोहन सिंह बेचैन भी दिखे, गुस्से में भी
न्यूक्लियर डील के समय डॉ मनमोहन सिंह की ओर उठी उंगली हो या फिर राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री की कैबिनेट में पारित बिल को फाड़ने की घटना, मनमोहन सिंह के मन की बेचैनी दिखाई गयी, परेशानी और गुस्सा भी दिखाया गया है। मगर, यह सब दिखाते हुए गांधी परिवार के प्रति एक अलग सोच पैदा हो, इसका भी ख्याल रखा गया है।
वैचारिक पूर्वाग्रह के साथ बनी है फ़िल्म
यह फ़िल्म अनपुम खेर को अच्छी लग सकती है क्योंकि वे एक राजनीतिक विचारधारा के साथ जुड़े हैं। वह विचारधारा गांधी परिवार की विचारधारा से उलट है। मगर, किसी कांग्रेसी को कतई अच्छी नहीं लग सकती। इसलिए आम कांग्रेसी इस फ़िल्म पर गुस्सा दिखा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में सिनेमाघर मालिकों ने फ़िल्म को दिखाने से मना कर दिया है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रदेश में गुस्सा दिखाया है। वहीं, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाने से मना किया है। उनका कहना है कि असहमत होने के बावजूद वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ हैं।

राजनीतिक दुष्प्रचार का माध्यम नज़र आयी फ़िल्म
जिस तरह से सोशल मीडिया पर बीजेपी समर्थक फ़िल्म देखने से लेकर प्रतिक्रियाओं को व्यक्त करने में होड़ दिखा रहे हैं उससे भी यही लगता है कि यह फ़िल्म चुनावी फ़िल्म बन गयी लगती है। फ़िल्म बनाने वाले निर्माता-निर्देशक हों या एक्टर सबने एक ख़ास सोच को अंजाम दिया है। फ़िल्म का मकसद कांग्रेस को कोसना, वंशवाद और परिवारवाद की निन्दा करना और ये सब कहने के लिए डॉ मनमोहन सिंह के किरदार को पकड़ना- यही फ़िल्म का मकसद है। संजय बारू की किताब इस कहानी को रोचक बनाने में माध्यम की तरह इस्तेमाल हुई है। राहुल गांधी ने जब प्रधानमंत्री के प्रस्तावित बिल का मसौदा फाड़ा था, तब संजय बारू प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार की भूमिका से भी हट चुके थे।
-
'शूटिंग सेट पर ले जाकर कपड़े उतरवा देते थे', सलमान खान की 'हीरोइन' का सनसनीखेज खुलासा, ऐसे बर्बाद हुआ करियर -
Delhi NCR Weather Today: दिल्ली-NCR में होगी झमाझम बारिश, दिन में छाएगा अंधेरा, गिरेगा तापमान -
युद्ध के बीच ईरान ने ट्रंप को भेजा ‘बेशकीमती तोहफा’, आखिर क्या है यह रहस्यमयी गिफ्ट -
Gold Silver Price: सोना 13% डाउन, चांदी 20% लुढ़की, मार्केट का हाल देख निवेशक परेशान -
Ram Navami Kya Band-Khula: UP में दो दिन की छुट्टी-4 दिन का लंबा वीकेंड? स्कूल-बैंक समेत क्या बंद-क्या खुला? -
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा पंचतत्व में विलीन, पिता का भावुक संदेश और आखिरी Video देख नहीं रुकेंगे आंसू -
'मुझे 10 बार गलत जगह पर टच किया', Monalisa ने सनोज मिश्रा का खोला कच्चा-चिट्ठा, बोलीं-वो मेरी मौत चाहता है -
Petrol-Diesel Shortage: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल समेत ईंधन की कमी है? IndianOil ने बताया चौंकाने वाला सच -
कौन हैं ये असम की नेता? जिनके नाम पर हैं 37 बैंक अकाउंट, 32 गाड़ियां, कुल संपत्ति की कीमत कर देगी हैरान -
Iran Vs America: ईरान ने ठुकराया पाकिस्तान का ऑफर, भारत का नाम लेकर दिखाया ऐसा आईना, शहबाज की हुई फजीहत -
LPG Crisis: एलपीजी संकट के बीच सरकार का सख्त फैसला, होटल-रेस्टोरेंट पर नया नियम लागू -
Trump Florida defeat: ईरान से जंग ट्रंप को पड़ी भारी, जिस सीट पर खुद वोट डाला, वहीं मिली सबसे करारी हार












Click it and Unblock the Notifications