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आतंकवादियों ने असम-मेघालय तक बिछाया जाल

बर्दवान। नेशनल इनवेस्टिगेटिंग एजेंसी यानी एनआईए अक्‍टूबर के पहले हफ्ते में हुए बर्दवान ब्‍लास्‍ट की जांच को अब सिर्फ पश्चिम बंगाल तक ही सीमित नहीं रखना चाहती है। एनआईए को अब इस ब्‍लास्‍ट के तार नॉर्थ ईस्‍ट के दो अहम राज्‍य असम और मेघालय से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि अब एजेंसी ने फैसला किया है कि वह इस ब्‍लास्‍ट की जांच को असम और मेघालय तक लेकर जाएगी।

असम बना आतंकियों का गढ़

एनआईए के सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक असम में भारी संख्‍या में आतंकवादियों ने शरण ले रखी है। बर्दवान ब्‍लास्‍ट ने एनआईए को मजबूर कर दिया है कि वह इन आतंकियों के बारे में भी पड़ताल करे।

इस केस की प्राथमिक जांच और छह युवाओं से हुई पूछताक्ष के बाद एनआईए को पता चला है कि असम पश्चिम बंगाल में जमात-ए-मुजाहिद्दीन के लिए काफी हद तक मददगार साबित हुआ था। आतंकियों ने भारत में घुसपैठ के लिए और छिपने के लिए असम को सुरक्षित स्‍थान के तौर पर प्रयोग किया।

एनजीओ आए शक के दायरे में

असम पुलिस कुछ एनजीओ के सिलसिले में एनआईए के साथ अहम जानकारियां साझा करेगी। यह वह एनजीओ हैं जिन पर आरोप हैं कि उन्‍होंने जेएमबी को असम में भी मॉड्यूल सेट करने में मदद की। इस समय कम से कम असम में आठ ऐसे एनजीओ हैं जिन पर बराबर नजर रखी जा रही है।

जेएमबी ने अपने संचालन के काफी लंबे समय से रणनीतियों पर खासा काम किया। इस संगठन ने पिछले चार वर्षों के दौरान करीब 180 आतंकियों को असम में दाखिल कराया। इसके बाद जेएमबी ने इन आतंकियों को अलग-अलग बैच में बांट दिया।

यहां भी नेताओं की ओर से मदद

इनका मुख्‍य मॉड्यूल पश्चिम बंगाल में स्थित था। एआईए सूत्रों की ओर से यह दावा भी किया गया है कि बारापेटा में इन आतंकियों अपने छिपने के लिए कई जगहें बनाई थीं। पश्चिम बंगाल की ही तरह असम में भी इस ग्रुप को कुछ स्‍थानीय नेताओं की मदद मिली। बीजेपी की ओर से एआईडीयूएफ पर इस संगठन को मदद देने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इस दावे को फिलहाल खारिज कर दिया गया है।

जेएमबी ने दी पूरी ट्रेनिंग

असम में छह युवकों की गिरफ्तारी के बाद से जांच एजेंसी को इस पहलू पर और ज्‍यादा काम करने के लिए मौका मिला है। इन युवकों की ओर से जांचकर्ताओं को बताया गया है कि उन्‍हें इस पूरे केस में तैयार रहने के लिए कहा गया था।

इन युवकों के मुताबिक इन्‍हें जेएमबी की ओर से इसी ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षण दिया गया था। इन युवकों का दावा है कि पहले इन्‍हें पश्चिम बंगाल के मध्‍यम ग्राम में दाखिल कराया गया जहां पर इन्‍हें दस्‍तावेज दिए गए। इसके बाद इन्‍हें असम भेज दिया गया जहां इन्‍हें तैयार रहने के लिए कहा गया।

असम मॉड्यूल से ऑपरेटिव्‍स को एक तरह का सुरक्षा कवच देने के लिए कहा गया था। एनआईए के अधिकारियों का मानना है कि कई जेएमबी सदस्‍य पहले असम गए जहां पर उन्‍हें शरण मिली। इस पूरे प्रकरण का भांडाफोड़ होने के बाद वह बांग्‍लादेश चले गए।

कई पहलूओं की होगी जांच

एनआईए असम में मौजूद कुछ स्‍थानीय तत्‍वों की भी जांच करेगा। असम में कुछ ऐसे एनजीओ हैं जिन्‍हें कुछ स्‍थानीय राजनेता चला रहे हैं और इन एनजीओ पर पिछले कुछ वर्षों से नजर रखी जा रही है। कुछ अलगाववादी संगठनों के खिलाफ भी जांच की जा रही हैं जिन पर पिछले कुछ वर्षों से घुसपैठियों की मदद करने का आरोप है।

असम में आतंकी संगठनों को बांग्‍लादेश से काफी मदद मिल रही है। खासतौर पर हरकत-उल-जिहादी इस्‍लामी खासतौर पर बांग्‍लादेश का वह संगठन है जो आतंकियों की मदद करता आ रहा है। इसी संगठन की मदद की वजह से ही हूजी-बी ने अपना मॉड्यूल हैदराबाद में स्‍थापित करने में सफलता हासिल किया जिसे शाहिद बिलाल लीड करता है।

अल कायदा की भी कोशिश

पश्चिम बंगाल और असम में आंतक पिछले कई वर्षों से आपस में जुड़ा हुआ है। इसी तरह के कुछ संगठन जैसे जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्‍लादेश और हूजी-बी जिनका संचालन बांग्‍लादेश के बाहर से होता है लेकिन इन दोनों संगठनों ने असम और पश्चिम बंगाल को अपनी जमीन को मजबूत करने के लिए खासतौर पर प्रयोग किया।

हाल ही में असम के मुख्‍यमंत्री की ओर से यह बयान भी दिया गया था कि इस बात विश्‍वसनीय इंटेलीजेंस सूचना उन्‍हें मिली है कि राज्‍य में अल कायदा अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है। असल मायनों में अल कायदा हूजी-बी और जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्‍लादेश का ही साझीदार है।

भारत के डॉजियर की अहम बातें

भारत, बांग्‍लादेश के अनुरोध पर उसके साथ बर्दवान ब्‍लास्‍ट से जुड़ी अहम फाइंडिंग्‍स को साझा करेगा। पहले ही दोनों देशों की इंटेलीजेंस एजेंसियां इस केस में आपस में कई अहम जानकारियां साझा कर रही हैं। एनआईए को शुरुआती जांच में इस बात का पता चला है कि जेएमबी के 58 मॉड्यूल्‍स पश्चिम बंगाल में सक्रिय थे। भारत इस जानकारी को बांग्‍लादेश के साथ साझा करेगा।

इसके अलावा भारत की ओर से बांग्‍लादेश को उन आठ अहम ऑपरेटिव्‍स के नाम भी बताए जाएंगे जो इस पूरे प्रकरण को अंजाम देने के लिए बांग्‍लादेश से पश्चिम बंगाल पहुंचे थे। इनमें से कौसर का नाम भी शामिल हैं। बांग्‍लादेश भारत के इस डॉजियर की पूरी पड़ताल करेगा जिससे इन ऑपरेटिव्‍स को पकड़ने में मदद हासिल हो सकेगी।

इस डॉजियर से संगठन को मिल रही आर्थिक मदद के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी। एनआईए के मुताबिक सारे पैसे को बांग्‍लादेश के एक बैंक में जमा किया गया और फिर से कुवैत के रास्‍ते पश्चिम बंगाल में मौजूद मॉड्यूल की मदद को भेजा गया। फिलहाल यह प्राथमिक स्थिति है और एनआईए अभी अंतिम रिपोर्ट को तैयार कर रही है।

भारत के इस डॉजियर में दोनों देशों के बीच मौजूद सीमाओं पर सुरक्षा को और कड़ा करने की बात भी कही गई है। भारत की ओर से बांग्‍लादेश को वह सभी फॉरेंसिक सुबूत भी भेजे जाएंगे जो उसने जांच के दौरान इकट्ठा किए थे।

अजित डोवाल पहुंचे थे बांग्‍लादेश

गौरतलब है कि एनएसए अजित डोवाल ने सोमवार को पश्चिम बंगाल का दौरा किया था और उन्‍हें प्रशासन के साथ इस केस से जुड़ी सारी जांच के बारे में बात की थी। वहीं एनएसए को इस बारे में भी पता लगा है कि बांग्‍लादेश में जेएमबी के अभी भी करीब 130 मॉड्यूल हैं जो सक्रिय हैं। इस बात को भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि जेएमबी के सदस्‍य किसी भी सूरत में बांग्‍लादेश से भारत में शरण न ले सकें।

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