Telangana Tunnel Collapse: टनल में फंसे 8 मजदूरों को बचाने के लिए रेलवे का खास प्लान, ऐसे बाहर आएंगे मजदूर
Telangana Tunnel Collapse News: तेलंगाना के नगरकुरनूल जिले में एक निर्माणाधीन सुरंग का हिस्सा गिरने से आठ मजदूर अंदर फंस गए थे। छह दिनों से चल रहे बचाव अभियान में अब दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) की विशेषज्ञ टीम भी शामिल हो गई है। रेलवे के पास खास तरह के औजार हैं, जैसे 'प्लाज्मा कटर' और 'ब्रोको कटिंग मशीन', जो मलबे को काटने और हटाने में मदद कर रहे हैं।

रेलवे क्यों कर रहा है मदद?
दरअसल, सुरंग में भारी धातु और स्टील का मलबा जमा हो गया था, जिसे हटाना मुश्किल हो रहा था। इसलिए, जिला प्रशासन ने रेलवे से मदद मांगी। रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि उनके पास धातु काटने के लिए खास उपकरण और विशेषज्ञ हैं, जो बचाव कार्य को तेज कर सकते हैं।
नगरकुरनूल के जिला प्रशासन ने बचाव कार्य में दक्षिण मध्य रेलवे से मदद मांगी थी, क्योंकि इस दुर्घटना में भारी धातु और स्टील के मलबे का ढेर बन गया था, जिससे बचाव कार्य में रुकावट आ रही थी। एससीआर ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और अपनी टीम को घटना स्थल पर तैनात किया। ए. श्रीधर, दक्षिण मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि रेलवे के पास धातु काटने की विशेषज्ञता है और इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की उपलब्धता ने बचाव कार्यों को गति दी है।
एससीआर ने अपने विशेषज्ञों की दो टीमों को घटना स्थल पर भेजा है, जिनमें डिवीजनल मैकेनिकल इंजीनियर एस. मुरली के नेतृत्व में पहला बैच शामिल था। यह टीम मलबे को काटने और हटाने का काम कर रही है। इसके अलावा, सिकंदराबाद से दो तकनीशियनों और 13 वेल्डरों का एक और दल भी बचाव कार्य में मदद कर रहा है। शनिवार की सुबह दूसरे बैच ने भी अपने कार्य को शुरू कर दिया। पुलिस अधीक्षक वैभव गायकवाड़ ने पुष्टि की कि मलबे को हटाने और पानी निकालने का काम लगातार जारी है। बचाव दल सुरंग के अंदर जाने के लिए हर दिन सुबह 7 बजे से कार्य शुरू कर रहा है।
तेलंगाना के सिंचाई मंत्री, उत्तम कुमार रेड्डी ने बृहस्पतिवार को बताया कि बचाव अभियान जोरों पर है और उम्मीद की जा रही है कि यह अभियान अगले दो दिनों में पूरा हो जाएगा। मंत्री ने यह भी कहा कि टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को गैस कटर से काटकर टुकड़ों में निकाला जाएगा, ताकि उसके रास्ते से मलबा हटाया जा सके और फंसे हुए कर्मचारियों तक पहुंचा जा सके।
बचाव कार्य के इस महत्वपूर्ण दौर में सेना, नौसेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम भी शामिल हो गई है। साथ ही, पर्वतीय क्षेत्रों में खुदाई करने में माहिर 'रैट माइनर्स' की टीम भी अपना योगदान दे रही है। इन सबका मुख्य उद्देश्य सुरंग के भीतर फंसे आठ लोगों को सुरक्षित निकालना है।
फंसे हुए आठ लोगों में मनोज कुमार (उत्तर प्रदेश), श्री निवास (उत्तर प्रदेश), सनी सिंह (जम्मू कश्मीर), गुरप्रीत सिंह (पंजाब), संदीप साहू, जेगता जेस, संतोष साहू और अनुज साहू (सभी झारखंड के) शामिल हैं। इनमें से दो इंजीनियर और दो ऑपरेटर हैं, जबकि बाकी चार मजदूर हैं, जो एसएलबीसी सुरंग परियोजना पर काम कर रहे थे। इन सभी कर्मचारियों का संबद्ध ठेकेदार 'जयप्रकाश एसोसिएट्स' है, जो एसएलबीसी सुरंग परियोजना का कार्य देख रहा है।
यह घटना नगरकुरनूल जिले के सुरंग क्षेत्र में हुई, जहां पिछले कुछ दिनों से भारी मलबे और अन्य तकनीकी बाधाओं के कारण बचाव कार्य में देरी हो रही थी। लेकिन अब दक्षिण मध्य रेलवे की विशेषज्ञ मदद से स्थिति में सुधार आया है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही सभी आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा।
बचाव अभियान की टीम और अन्य संबंधित एजेंसियां पूरी तरह से इस प्रयास में जुटी हुई हैं, ताकि किसी भी तरह के सुरक्षा खतरे के बिना फंसे हुए कर्मचारियों की जान बचाई जा सके।












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