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तेलंगाना को 10 जिले, ग्रेटर हैदराबाद होगी साझा राजधानी

नई दिल्‍ली/हैदराबाद। आंध्र प्रदेश में रायल-तेलंगाना के नाम से राज्‍य बनाने के विरोध में जहां कई जिलों में बंद घोषित किया, वहीं दिल्‍ली में बैठे नीति निर्धारकों ने गुरुवार रात को जो ड्राफ्ट तैयार किया है उसमें तेलंगाना को 10 जिले दिये गये हैं। आंध्रा से अलग होने के बाद तेलंगाना देश का 29वां राज्‍य होगा।

इस दौरान रायलसीमा के दो जिलों- कुरनूल और अनंतपुर को तेलंगाना को तेलंगाना में नहीं रखने का फैसला किया। असल में यही वो जिले हैं, जिन्‍हें तेलंगाना में शामिल किये जाने का पुरजोर विरोध हो रहा था। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के नेतृत्‍व हुई कैबिनेट की बैठक में तेलंगाना राज्‍य पर विधेयक के ड्रॉफ्ट को मंजूरी दी गई। इस बैठक में केंद्र के कई मंत्री शामिल हुए।

कैबिनेट के फैसले के अनुसार तेलंगाना में अब 10 जिले होंगे और यह आंध्र प्रदेश का सक्‍सेसर स्‍टेट होगा। आंध्र प्रदेश में अब 13 जिले रह जायेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बताया कि ग्रेटर हैदराबाद कम से कम अगले 10 सालों तक दोनों राज्‍यों की साझा राजधानी होगी। भारतीय संविधान की धारा 371डी के अंतर्गत दोनों राज्‍यों को केंद्र की ओर से बराबर सपोर्ट दिया जायेगा फिर चाहे वो किसी भी क्षेत्र में क्‍यों न हो। खास तौर से शिक्षा व रोजगार पर फोकस किया जायेगा।

असल में कैबिनेट की बैठक में रायलसीमा के जिन दो राज्‍यों को तेलंगाना में डालने की बात चल रही थी, उस पर तेलंगाना राष्‍ट्रीय समिति (टीआरएस) ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर वो जिले तेलंगाना में गये, तो फिर से आंदोलन शुरू किया जायेगा। दो जिलों को वापस आंध्र प्रदेश में डालने का दूसरा मुख्‍य कारण यह था कि रॉयल तेलंगाना बनाने से भाजपा को फायदा मिल सकता था। वैसे भी चार राज्‍यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की बढ़त देख पहले ही केंद्र सरकार हलकान है। हालांकि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि तेलंगाना के गठन के बाद भी 2014 में कांग्रेस के लिये चुनाव जीतना बेहद कठिन होगा।

यही कारण है कि कांग्रेस राज्‍य के गठन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है। विधेयक के ड्राफ्ट को अब राष्‍ट्रपति के पास भेजा जायेगा, जो आंध्र प्रदेश विधानसभा को संस्‍तुति के लिये भेजेंगे। इस विधेयक की प्रक्रिया को पूरा होने में अभी कम से कम छह महीने और लगेंगे। लेकिन यूपीए सरकार जल्‍दी-जल्‍दी निबटा कर इसी शीतकालीन सत्र में ही विधेयक को पेश करना चाहती है।

Violence

गुरुवार से टीआरएस द्वारा तेलंगाना क्षेत्र में बंद किया गया। यह बंद रायल-तेलंगाना के विरोध में था। इस दौरान एपीएसआरटीसी की बसें नहीं चलीं, सभी शिक्षण एवं निजी संस्‍थान बंद रहे। वैसे तो बंद शांतिपूर्ण रहा, लेकिन ओसमानिया विश्‍वविद्यालय में कुछ छात्रों ने हंगामा काटा।

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