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Telangana: BC आरक्षण मामले के बीच तेलंगाना स्थानीय निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान, जानें कब होगी वोटिंग?

Telangana Local Body Elections 2025: तेलंगाना में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने सोमवार, 29 सितंबर को चुनावी शेड्यूल का ऐलान कर दिया। यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब राज्य में पिछड़ी जातियों (BC) के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण का मामला हाईकोर्ट में लंबित है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त रानी कुमुदिनी ने बताया कि ZPTC और MPTC चुनाव दो चरणों में, जबकि ग्राम पंचायत चुनाव तीन चरणों में होंगे। बता दें कि तेलंगाना का ये निकाय चुनाव कुल 12,733 ग्राम पंचायतों और 1,12,288 वार्डों के लिए होंगे।

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किन चरणों में होगा चुनाव

SEC ने बताया कि ZPTC और MPTC चुनाव दो चरणों में होंगे, जबकि ग्राम पंचायतों के चुनाव तीन चरणों में संपन्न होंगे। राज्य निर्वाचन आयुक्त रानी कुमुदिनी ने प्रेस वार्ता में कहा कि सबसे पहले ZPTC और MPTC के चुनाव होंगे, उसके बाद ग्राम पंचायत चुनाव होंगे।

MPTC और ZPTC चुनाव:

  • चरण 1: 23 अक्टूबर
  • चरण 2: 27 अक्टूबर

ग्राम पंचायत चुनाव:

  • चरण 1: 31 अक्टूबर
  • चरण 2: 4 नवंबर
  • चरण 3: 8 नवंबर

इस चुनाव में 12,733 ग्राम पंचायतों और 1,12,288 वार्डों के लिए मतदान होगा। MPTC और ZPTC के लिए कुल 5,749 और 565 सीटें होंगी। चुनाव के लिए कुल 1.12 लाख मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। PTC और ZPTC के उम्मीदवार 9 अक्टूबर से अपने नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद ग्राम पंचायत चुनाव के उम्मीदवार अपने नामांकन जमा करेंगे।

BC Reservation Case: क्या है BC आरक्षण और क्यों है बहस?

हालांकि BC आरक्षण पर मामला हाईकोर्ट में लंबित है, बावजूद इसके 28 सितंबर की शाम को राजपत्र नोटिफिकेशन जारी कर आरक्षण को सभी जिलों और मंडलों में अंतिम रूप दिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को हाईकोर्ट में होगी।

इससे पहले हाईकोर्ट ने सरकार पर सवाल उठाया था कि जब संबंधित बिल राज्यपाल के पास लंबित था, तब BC आरक्षण के लिए सरकारी आदेश जारी करना सही नहीं था। न्यायालय ने राज्य से पूछा था कि क्या चुनाव स्थगित किए जाएं या कोर्ट खुद निर्णय ले।

BC आरक्षण क्या है?

BC (Backward Classes) आरक्षण यानी पिछड़ी जातियों के लिए सरकारी नौकरियों, शिक्षा संस्थानों और पंचायत चुनाव जैसी जगहों पर निश्चित संख्या में आरक्षण या कोटा तय करना। इसका उद्देश्य समाज में पिछड़ी जातियों को मुख्यधारा में लाना और समान अवसर देना है।

भारत में संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की अनुमति है। राज्य सरकारें अलग-अलग प्रतिशत तय करती हैं, जैसे तेलंगाना में BC के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण प्रस्तावित है।

आरक्षण पर बहस क्यों?

BC आरक्षण हमेशा से ही राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रहा है। कभी-कभी सरकार आरक्षण लागू करती है जबकि संबंधित बिल राज्यपाल या न्यायपालिका की मंजूरी के लिए लंबित होता है। तेलंगाना में भी इसी कारण हाईकोर्ट में मामला लंबित है।

कई बार चुनावों से पहले आरक्षण बढ़ाने या कम करने को लेकर राजनीतिक विवाद होता है। विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि सरकार इसका राजनीतिक फायदा उठा रही है। कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ कहते हैं कि आरक्षण से योग्यता और समान अवसरों पर असर पड़ सकता है। वहीं इस आरक्षण के समर्थक कहते हैं कि पिछड़ी जातियों को समाज में बराबरी का अवसर देना जरूरी है।

तेलंगाना के स्थानीय निकाय चुनावों में इसका असर

BC आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीखें जारी कर दीं। इससे राजनीतिक बहस तेज हो गई कि क्या आरक्षण को अंतिम रूप देने के बिना चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहीं है। हालांकि, SEC ने स्पष्ट किया है कि चुनाव समय पर और निष्पक्ष रूप से संपन्न होंगे। अधिकारियों ने कहा कि सभी जिलों और मंडलों में चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से कराए जाएंगे।

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