Telangana Lok Sabha Chunav: तेलंगाना में भाजपा को नजरअंदाज करना क्यों आसान नहीं होगा?

Telangana Lok Sabha Election: तेलंगाना में बीजेपी को इस बार कितनी सीटें मिलेंगी, इसको लेकर चुनावी पंडितों की राय भले ही एक न हो, लेकिन इस बात पर लगभग आम सहमति है कि कर्नाटक के बाद अगर भारतीय जनता पार्टी के पास अभी सबसे ज्यादा चांस है तो वह तेलंगाना में ही है।

खासकर बीआरएस की सरकार जाने के बाद बीजेपी के लिए तेलंगाना की संभावनाएं कहीं बेहतर हुई हैं। तेलंगाना में लोकसभा की 17 सीटें हैं और 2019 में उनमें से 4 सीटें जीतकर बीजेपी ने बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषकों को झटका दिया था। अलबत्ता विधानसभा चुनावों में उसके प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव आती रही है।

telangana lok sabha chunav

तेलंगाना में बीजेपी के प्रदर्शन पर चुनावी पंडितों की नजर
मोटे तौर पर कुछ ऐसी बातें हैं जिसकी वजह से राजनीतिक पंडित तेलंगाना के लिए बीजेपी को इस बार काफी गंभीरता से ले रहे हैं। कुछ हफ्ते पहले ही चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी राज्य में भाजपा की ओर से चौंकाए जाने की भविष्यवाणी कर चुके हैं।

तेलंगाना और पीएम मोदी की लोकप्रियता
अगर तेलंगाना में आज भाजपा चुनावी रेस में नजर आ रही है और कहीं न कहीं मुख्य विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) पर हावी दिख रही है तो इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता एक बहुत बड़ी वजह है। खासकर तेलंगाना के शहरी इलाकों में इसका खाफी प्रभाव दिखता है।

निजाम के इतिहास से भी भाजपा को मदद
इसके अलावा जानकारों को लगता है कि निजाम शासन का इतिहास और प्रदेश में बीआरएस के अलावा किसी अन्य क्षेत्रीय ताकत की गैर-मौजूदगी बीजेपी का रास्ता आसान बना सकता है।

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक उस्मानिया यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के रिटायर्ड हेड के श्रीनिवासुलु ने कहा है, 'वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों ही धाराओं ने स्वतंत्रता के तुरंत बाद निजाम और उसके रजाकारों ( निजी मिलिशिया) के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। बीजपी ने इसे मुस्लिम शासक (निजाम) के खिलाफ हिंदुओं के संघर्ष के रूप में पेश किया है। हाल तक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के तौर पर बंदी संजय अपने बयानों के माध्यम से युवाओं तक पहुंचने की ऐसी ही कोशिश की है।'

निजाम-विरोधी छवि को आगे रखने के लिए हर साल 17 सितंबर को केंद्र सरकार ने हैदराबाद मुक्ति दिवस के रूप में भी मनाना शुरू किया है। बीते वर्षों में बीजेपी, बीआरएस पर यही आरोप लगाती रही है कि एआईएमआईएम को खुश करने के लिए वह इस उत्सव से दूर रहती है।

10 वर्षों में तेलंगाना में बड़ी ताकत बनी है बीजेपी
इस तरह से भाजपा बीते 10 वर्षों में राज्य में खुद को एक स्थापित राजनीतिक शक्ति के रूप में पेश कर चुकी है। उसके वोट शेयर में भी लोकसभा चुनावों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 2020 में ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के चुनाव में दूसरे नंबर की पार्टी के रूप में उभरकर वह अपने आलोचकों को भी नए नरेटिव तैयार करने को मजबूर कर चुकी है।

2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट शेयर कम जरूर हुआ है, लेकिन प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और देश का चुनाव होने की वजह से राजनीतिक पंडित इस बार इसे बहुत ही गंभीरता से ले रहे हैं, जिसमें सबसे बड़ा कारण भारत राष्ट्र समिति का लगातार गिरता ग्राफ है।

केसीआर की बेटी को हराकर चुनाव जीता था बीजेपी उम्मीदवार
2019 के लोकसभा चुनाव में जब केसीआर की लोकप्रियता चरम पर थी, तब भी निजामाबाद में भाजपा के नए चेहरे डी अरविंद उनकी बेटी के कविता को हरा चुके थे, जो अभी दिल्ली शराब घोटाले में तिहाड़ जेल में बंद हैं।

बीजेपी को जातीय समीकरण के पक्ष में होने की उम्मीद
बीजेपी को इस चुनाव में राज्य में जातीय समीकरण के अपने पक्ष में होने का यकीन है। बीजेपी के नेशनल पार्लियामेंटरी बोर्ड के सदस्य और राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के चेयरमैन का दावा है कि राज्य में 52% पिछड़े वर्ग, 18% दलित और मोटे तौर पर 9% अल्पसंख्यक हैं।

वे कहते हैं, 'पीएम मोदी पिछड़े वर्ग के सबसे बड़े चेहरे हैं। हमने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग बनाकर इसे कानूनी दर्जा दिया है और बीआरएस के कमजोर होने के बाद तेलंगाना में पिछड़ा वर्ग बीजेपी की ओर देख रहा है।'

बीआरएस के घटते ग्राफ और टीडीपी से दोस्ती ने बढ़ाई संभावनाएं
इसकी वजह ये बताई जा रही है कि संयुक्त आंध्र प्रदेश में पिछड़े वर्ग को टीडीपी ने अपने पक्ष में गोलबंद कर रखा था। लेकिन, जब तेलंगाना अलग हो गया तो उसके नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के पास बीआरएस का विकल्प ही रह गया।

बीजेपी के एक प्रवक्ता किशोर पोरेड्डी ने कहा, 'बीआरएस की घटती लोकप्रियता और 2023 के विधानसभा चुनावों में हार के साथ ही यह साफ है कि बीआरएस में गया टीडीपी वोट बैंक बीजेपी में आ जाएगा और वोटों का यह ट्रांजिशन बहुत ही आसानी से होगा, यह बहुत ही जल्द होगा और यह हो भी रहा है।'

वैसे भी आंध्र प्रदेश में अब फिर से चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी, बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा बन चुकी है और वहां दोनों दलों के अलावा जन सेना भी गठबंधन में चुनाव लड़ रही है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+