तेलंगाना में यूं ही नहीं हारे KCR, सर्वे से पता चला रेवंत रेड्डी ने कैसे पलट दी बाजी?
तेलंगाना में के चंद्रशेखर राव (केसीआर) की सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में कल्याणकारी योजनाओं से जनता का दिल जीतना चाहा था। लेकिन, सर्वे से पता चला है कि वही कल्याणकारी योजनाएं उनपर भारी पड़ गईं और कांग्रेस ने पूरी बाजी ही पलट दी।
कांग्रेस ने गारंटियों के नाम पर तेलंगाना में जो वादों का पिटारा खोला था, बीआरएस की सरकार वैसी कई कल्याणकारी योजनाएं पहले से ही चला रही थी। इसके दम पर बीआरएस आत्मविश्वास से हैट्रिक लगाने की उम्मीद में बैठी थी।

तेलंगाना में योजनाओं के वंचित-लाभार्थियों ने किया खेल- सर्वे
लेकिन, लोकननीति-सीएसडीएस के सर्वे से पता चला है कि वोट देने वालों की बहुत बड़ी आबादी इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रही थी या उनतक इसका फायदा ही नहीं पहुंच पा रहा था।
इस सर्वे के मुताबिक सबसे ज्यादा पहुंच आसरा पेंशन योजना की रही और सबसे कम आवासीय योजना की देखी गई है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि योजनाओं का लाभ नहीं पाने वालों ने किस तरह से कांग्रेस को ज्यादा तादाद में वोट डाले हैं।
वंचित-लाभार्थियों ने कांग्रेस को जमकर डाले वोट-सर्वे
इस सर्वे के अनुसार कुल 79% योग्य लाभार्थियों को डबल बेडरूम हाउसिंग योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ा है। इनमें से 41% ने कांग्रेस को वोट दिया और बीआरएस को इनके सिर्फ 36% वोट मिले।
इसी तरह केसीआर किट के लाभ से वंचित रहने वाले कुल 51% लोगों में से 43% ने कांग्रेस को और 34% ने बीआरएस के पक्ष में मतदान किया है। इसी तरह फी रीइम्बर्स्मन्ट रीइंबर्समेंट स्कीम के कुल 50% वंचितों में से 42% ने कांग्रेस और 34% ने बीआएस के पक्ष में वोट दिए हैं।
बीआरएस ने योजना की पहुंच के दायरे पर नहीं दिया ध्यान?
वहीं आरोग्यश्री योजना के कुल 48% वंचितों में से 45% ने कांग्रेस और 30% ने बीआरएस को, कल्याण लक्ष्मी/शादी मुबारक के कुल 47% वंचितों में से 43% ने कांग्रेस, 32% ने बीआरएस को वोट दिया है।
इसी तरह से आसरा पेंशन स्कीम के कुल 35% वंचित लाभार्थियों में से 41% ने कांग्रेस और 30% ने भारत राष्ट्र समिति के लिए मतदान किया है।
वंचित-लाभार्थियों में दलित और ओबीसी वोटरों की बड़ी तादाद-सर्वे
केसीआर और उनकी बीआरएस सरकार के खिलाफ मतादाताओं ने कांग्रेस के मुकाबले जो बेरुखी दिखाई है, उसमें बड़ी संख्या दलित और ओबीसी वोटरों की भी है। यह वो वोटर हैं, जिनतक किसी वजह से बीआरएस सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा था।
सर्वे से पता चला है कि अनुसूचित जाति (SC) के कुल 82% वोटरों तक दलित बंधु योजना का लाभ नहीं पहुंच पा रहा था। उनमें से 30% ने कांग्रेस में भरोसा जताया है, जबकि 38% ने बीआरएस में विश्वास कायम रखा है।
इसी तरह से ओबीसी वोटरों में पिछड़ा वर्ग बंधु योजना (बीसी बंधु) का लाभ पूरा नहीं पहुंच पाया। कुल 83% इससे वंचित रह गए। उनमें से 43% ने कांग्रेस को वोट दिया। हालांकि, 45% ने लाभ नहीं मिलने के बावजूद भी केसीआर में भरोसा जमाए रखा।
केंद्र की योजनाओं का भी लाभ कम लोगों तक ही पहुंचा-सर्वे
इस सर्वे ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। इसके अनुसार केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी लाभार्थियों तक पहुंचने का दायरा तेलंगाना में बहुत कम रहा है। बीजेपी को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है।
जैसे कि इस सर्वे के मुताबिक राज्य में कुल 65% लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला। इनमें से 42% ने कांग्रेस को वोट दिया और 36% ने बीआरएस के हक में वोट डाला।
वहीं आयुष्मान भारत योजना के लाभ से कुल 59% लोग वंचित पाए गए, उनमें से 42% ने कांग्रेस को और 36% ने बीआरएस के लिए वोटिंग की। उज्जवला योजना का लाभ नहीं पाने वाले तेलंगाना में कुल 55% योग्य-लाभार्थी हैं, जिनमें से 41% ने कांग्रेस के लिए और 37% ने बीआरएस के लिए मतदान किया है।
मतदाताओं के बीच केसीआर और रेवंत रेड्डी की लोकप्रियता समान
यही नहीं सर्वे से यह भी जानकारी मिली है कि रेवंत रेड्डी ने बहुत ही जल्दी अपनी लोकप्रियता बनाने में सफलता प्राप्त की है। पहले यह माना जा रहा था कि निर्वतमान सीएम केसीआर की लोकप्रियता की तुलना में राज्य में कोई नेता नहीं है।
लेकिन, तथ्य यह है कि 29% वोटर केसीआर को फिर से अगला मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे तो रेवंत रेड्डी के लिए भी ऐसी ही इच्छा रखने वाले मतदाता भी 29% ही थे।
इसके अलावा तेलंगाना के वोटरों में यह धारणा बैठ गई कि बीआरएस, कांग्रेस से भी ज्यादा भ्रष्ट है और बाकी का काम कल्याणकारी योजनाओं के आवंटन में कमी ने पूरी कर दी।
119 सीटों वाली तेलंगाना विधानसभा में कांग्रेस ने 64 और और बीआरएस ने 39 सीटें जरूर जीती हैं। लेकिन, दोनों दलों के बीच वोट शेयर में मात्र 2.05% का अंतर है। बीआरएस को 37.35% वोट मिले हैं, वहीं कांग्रेस ने 39.40% वोट हासिल किए हैं।












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