तेलंगाना चुनाव: KCR की 'पिंक पार्टी' का 2014-18 में दबदबा, जानिए कैसे लगातार बढ़े वोट शेयर
तेलंगाना राज्य गठन के बाद से अब तक हुए चुनावों में भारत राष्ट्र समिति (पूर्व में तेलंगाना राष्ट्र समिति) का दबदबा कायम रहा है। पार्टी को अब तक मिले वोट शेयर को देखें तो ये साफ हो जाता है कि राज्य में किस तरह बीआरएस की लोकप्रियता बढ़ी है। तेलंगाना में टीडीपी और वाईएसआरसीपी की पकड़ कमजोर पड़ने के साथ पिछले चुनावों बीआरएस का सीधा मुकाबला कांग्रेस से हो गया। लेकिन कांग्रेस की वोट शेयर का ग्राफ गिरता गया। हालांकि 2018 में एक बार वोट शेयर में बढ़त देखी गईं लेकिन सीटें उम्मीद से काफी कम थीं।
तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री केसीआर अब तीसरी बार चुनावी मैदान में हैं। बीआरएस की ओर से दावा किया जा रहा है कि पार्टी इस बार भी जीत दर्ज करेगी। ऐसे में तेलंगान के पिछले कुछ चुनावों की बात करें तो तेलंगान गठन से पहले कांग्रेस और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) आंध्र प्रदेश में प्रमुख पार्टियां थीं, जिनके पास सबसे अधिक वोट शेयर थे। लेकिन 2014 में तेलंगाना के गठन के बाद बीआरएस ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के साथ मिलकर राज्य में चुनाव लड़ती है।

वहीं टीडीपी धीरे-धीरे तेलंगाना में कमजोर होती गई। उसकी फोकस अब आंध्र प्रदेश पर है। तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब भारत राष्ट्र समिति) टीडीपी का ही एक गुट था, जिसके पार्टी से असंतुष्ट होकर अलग होने के बाद अलग पार्टी बनी। वहीं 2011 में कांग्रेस से अलग हुई पार्टी वाईएसआर कांग्रेस 2014 में तेलंगाना की सीटों पर चुनाव लड़ी। लेकिन वर्ष 2018 के चुनावों तक इसका भा राज्य से सफाया हो गया।
तेलंगाना में पार्टियों को प्रदर्शन
आंध्र प्रदेश में तेलंगाना राज्य की मांग पूरी होने से एक दशक पहले यानी 2004 तक बीआरएस आंध्र प्रदेश में केवल एक छोटी पार्टी थी। बीआरएस ने 2004 में अपने पहले चुनाव में 26 सीटें और 2009 में 10 सीटें जीती थीं। अब ये तेलंगाना की प्रमुख पार्टी है। वर्ष 2009 के चुनाव में कांग्रेस और टीडीपी को क्रमशः 50 और 39 सीटें जीतीं। जबकि 2014 में हुए चुनावों में टीआरएस(बीआरएस) की पहली बार सरकार बनी। उस वक्त बहुत कम अंतर से बीआरएस ने सीटों पर जीत दर्ज की थी। टीआरएस ने राज्य की 63 विधानसभा सीटों और 17 लोकसभा सीटों में से 11 पर जीत हासिल की थी।
वहीं 2018 के चुनाव में बीआरएस को 88 सीटें मिली और वोट शेयर 47% रहा। इस बार बीआरएस का वोट शेयर लगभग 13 प्रतिशत बढ़ा। वहीं कांग्रेस ने अपना वोट शेयर 3% से अधिक बढ़ाकर 28.3% कर लिया। जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी टीआरएस का दबदबा कायम रहा। पार्टी ने तेलंगाना की 17 में से 11 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा का लोकसभा प्रदर्शन विधानसभा चुनावों की तुलना में काफी बेहतर था, उसने 4 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस 3 सीटें जीतने में सफल रही।
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