तेलंगाना चुनाव: पूर्व कम्युनिस्ट गढ़ों में वामपंथी वोटों का समर्थन पाने की कांग्रेस को है बड़ी उम्मीद
तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 30 नवंबर को होगा। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टीभारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को सत्ता से बेदखल करने के लिए वामपंथी मतदाताओं का समर्थन पाने की उम्मीद कर रही है। कांग्रेस को इस समर्थन की उम्मीद खासकर नलगोंडा और खम्मम जैसे पूर्व कम्युनिस्ट गढ़ों में है।

जबकि कांग्रेस ने तेलंगाना में सीपीआई को एक सीट कोठामुडेम दी है। इस सीट से सीपीआई के राज्य सचिव कुमामनेवी संबाशिव राव चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है कि वो बाकी 115 निर्वाचन सीटों किस पार्टी को समर्थन करेगी।
बता दें सीपीआई (एम) अपने दम पर तेलंगाना में 19 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन राज्य की बाकी सीटों पर वह कांग्रेस का समर्थन कर सकती है।
पार्टी के सूत्रों के अनुसार सीपीआई (एम) कांग्रेस का समर्थन कर सकती है। नलगोंडा समेत तेलंगाना राज्य के पूर्व कम्युनस्टि गढ़ जिनमें नलगोंडा, नाकरेलन, भोंगिर, अलेयर और मिर्यालागुडा के निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
बता दें 2014 में वामपंथ कांग्रेस और बीआरए के बीच बंट गया था, वहीं पिछले चुनाव में ये पूरी तरह से के चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली पार्टी में स्थानांतरित हो गया था। बीआरएस (तत्कालीन टीआरएस) ने 2014 में अविभाजित नलगोंडा जिले के 12 विधानसभा क्षेत्रों में से छह में जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस ने पांच और सीपीआई ने महज एक सीट पर जीत हासिल की थी।
वहीं 2018 की बात की जाए तो बीआरएस ने इस क्षेत्र में 12 में से 9 सीटों पर जीत हासिल की थी और कांग्रेस ने तीन सीटें जीती थी। उपचुनावों में हुजूरनगर और मुनुगोडे की दो सीटें सत्तारूढ़ बीआरएस ने छीन ली थी , जिसके बाद उसकी सीटें 11 हो गईं थीं।
गौरतलब है कि वामपंथी वोटों का खिसक कर बीआरएस में जाने की प्रमुख वजह के चंद्रशेखर राव सरकार की कल्याणकारी योजनाएं हैं। वहीं आगामी चुनाव में कांग्रेस को उम्मी है कि सीपीआई के साथ उनका गठबंधन वामपंथी वोटों को उनके खाते में स्थानांतरित कर देगा।
खम्मम के मधिरा से चौथी बार फिर से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा वाम दलों के समर्थन से कई निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस को काफी मदद मिलेगी, खासकर खम्मम और नलगोंडा के अविभाजित जिलों में इस बात की उम्मीद प्रबल है।












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