तेलंगाना चुनाव: पवन कल्याण की जन सेना पार्टी की एंट्री से रोचक हुआ मुकाबला, जानें कैसे?
तेलंगाना विधानसभा चुनावों में जन सेना पार्टी की एंट्री ने मुकाबला और रोचक कर दिया है। जनसेना पार्टी की मतदाताओं का ध्यान केंद्रित हुआ है और चुनावी मैदान में प्रतिद्वंदी उम्मीदवारों पर उनका प्रभाव पड़ा है। तेलंगाना, विशेषकर हैदराबाद में बसे आंध्र मूल के लोगों के वोट कई विधानसभा क्षेत्रों में नतीजे तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं और यही कारण है कि बीआरएस और कांग्रेस दोनों ही जीत हासिल करने के अपने प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।

पूर्व में हुए विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों में जन सेना पार्टी नहीं थी लेकिन इस चुनाव में आंध्र प्रदेश की इस पार्टी की एंट्री ने विशेष रूप से ग्रेटर हैदराबाद की सीमा में लगभग 40 लाख मतदाताओं को दोनों दलों द्वारा लुभाया जा रहा है। सेरिलिंगमपल्ली, कुकटपल्ली, पाटनचेरु, कुथबुल्लापुर, राजेंद्रनगर, एलबी नगर, उप्पल, मेडचल, मुशीराबाद और मल्काजगिरी निर्वाचन क्षेत्र बड़ी संख्या में आंध्र के मूल निवासियों के घर हैं।
बता दें राजनीतिक दलों का ध्यान अक्सर आंध्र के निवासियों के बीच कम्मा समुदाय पर होता है, इनके अलावा कापू, रेड्डी, ब्राह्मण, राजू और बीसी जैसी अन्य जातियों के निवासी भी तेलंगाना में रहते हैं। कम्मा, इन अन्य जातियों के मतदाताओं के साथ, ग्रेटर हैदराबाद और तेलंगाना के अन्य क्षेत्रों में बडी संख्या में बसी हुई है।
तेलंगाना के गठन होने के बाद हुए दो चुनावों में बीआरएस को चुनावों में बीआरएस को स्थानीय मतदाताओं से लाभ हुआ था, जेएसपी के इस बार के चुनाव में उम्मीदवार उतारने के फैसले ने राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने को मजबूर कर दिया है। आंध्र प्रदेश में जेएसपी के टीडीपी के साथ गठबंधन के साथ, उसे बड़ी संख्या में वोट मिलने की उम्मीद है, खासकर कापू मतदाताओं से पवन कल्याण की पार्टी को इस बार वोट मिलने की उम्मीद है।












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