Telangana विधानसभा चुनाव में गरमा रहा है पिछड़े वर्ग का मुद्दा, बीजेपी का दांव सफल, पहली रेस में निकली आगे
तेलंगाना विधानसभा चुनाव में इस बार पिछड़े वर्ग (Backward Classes) का मुद्दा गरमा रहा है। जातीय समूह अप्रत्याशित रूप से गोलबंद होने लगे हैं। आमतौर पर तेलंगाना में ऐसी स्थिति कम ही देखी गई है। 52% पिछड़े वर्ग की आबादी वाले राज्य में चुनाव से पहले इस तरह का रुझान अंतिम नतीजों में कुछ नया गुल भी खिला सकता है।
तथ्य यह है कि ज्यादातर जाति आधारित संगठन सभी बड़ी पार्टियों पर उचित संख्या में उनकी बिरादरी के उम्मीदवारों को टिकट नहीं देने का आरोप लगा रहे हैं। खासकर इस मामले में बीआरएस और कांग्रेस के हाथ ज्यादा तंग नजर आ रहे हैं।

तेलंगाना चुनाव में पिछड़ा वर्ग ठोक रहा है अपना दावा
मसलन, राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग कल्याण संघ के अध्यक्ष आर कृष्णैया ने कहा है कि भारत राष्ट्र समिति ने सिर्फ 23 सीटें ही पिछड़े वर्ग (BC) के प्रत्याशियों को दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीसी बंधु योजना को ठीक से लागू नहीं किया गया है और पिछले नौ वर्षों में इस वर्ग के लिए लोन रोक दिए गए हैं।
तेलंगाना में पिछड़ी जातियों के लिए लगभग 12 कॉर्पोरेशन हैं। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस ने सिर्फ (अबतक) 20 सीट दिए हैं। जो भी पार्टी कहेगी कि वह पिछड़े वर्गों के लिए कानून-बनाने वाली संस्थाओं में 50% तक आरक्षण देगी, हम उस पार्टी का समर्थन करेंगे।'
नजरअंदाज करने वाले दलों को सबक सिखाने की मिल रही है चेतावनी
पिछड़े वर्ग में एक जाति मुन्नुरू कापू भी है। इसके नेता यू श्रीनिवास पटेल ने कहा है कि बीआरएस को अपने उम्मीदवार बदलकर 23 सीटें मुन्नुरू कापू के उम्मीदवारों को दे देनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'जो भी पार्टी हमें नजरअंदाज करेगी उसे हम सबक सिखाएंगे।' इसी तरह की चेतावनी मुदिराज महासभा की ओर से भी दी गई है। इसके नेता ने आबादी के हिसाब से जातियों को टिकट बांटने के लिए कहा है।
इसी तरह से टॉडी टैपर संघ के अध्यक्ष बी बालाराज गौड़ भी उतने ही मुखर हैं। उनका कहना है कि 'सरकार को 50% शराब की दुकान गौड़ समाज को आवंटित करनी चाहिए। राजनीतिक दलों को गौड़ों के मुद्दों को घोषणापत्र में शामिल करना चाहिए।....'
तेलंगाना की आबादी में करीब 52% पिछड़ा वर्ग
पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी खासकर के इसके नेता राहुल गांधी जातिगत जनगणना को बहुत बड़ा मुद्दा बना रहे हैं। तेलंगाना में इसको लेकर एक सर्वे पहले ही हो चुका है, जिसके मुताबिक यहां 52% जनसंख्या पिछड़े वर्ग की है।
पिछड़े वर्ग के नेता को सीएम बनाने का भाजपा ने किया है दावा
लेकिन, इस मुद्दे को भुनाने में फिलहाल भाजपा अपने विरोधियों से काफी आगे निकलती दिख रही है। बीजेपी ने सत्ता में आने पर पिछड़े वर्ग (BC)के नेता को मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया है।
भाजपा इस रेस में निकली आगे
भारतीय जनता पार्टी ने तेलंगाना में 30 नवंबर को होने वाले चुनाव के लिए 119 सीटों में से अबतक कुल 88 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों की कुल संख्या 33 (सबसे ज्यादा) है। अभी 31 सीटों पर नामों की घोषणा होनी बाकी है।
यानि पार्टी इस चुनाव में टिकट देने में भी वह अन्य दलों की तुलना में हर तरह से पिछड़े वर्ग को प्राथमिकता दे रही है। क्योंकि, इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के उम्मीदवार तो रिजर्व सीटों के आधार पर पहले से ही निश्चित हैं।
पीएम मोदी 'पिछड़ा वर्ग गर्जना' में हो सकते हैं शामिल
अब पार्टी की आगे की योजना देखिए। अगले हफ्ते यानि 7 और 11 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेलंगाना में दो जनसभाएं आयोजित होने की संभावना है। हैदराबाद की सभा 'पिछड़ा वर्ग गर्जना' के नाम से आयोजित हो सकती है। दूसरी जनसभा भी इसी विषय पर केंद्रित होने की संभावना है।












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