Telangana Election: गोशामहल सीट से टी राजा सिंह की उम्मीदवारी पर क्या सोचते हैं मुसलमान?

तेलंगाना विधानसभा चुनाव में इस बार हैदराबाद की गोशामहल सीट पूरे देश में चर्चा में है। बीजेपी ने फिर से विवादों में रहने वाले अपने एकमात्र एमएलए टी राजा सिंह को टिकट दिया है, जिन्हें उसने पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के बाद पिछले साल निलंबित कर दिया था।

उस घटना के बाद टी राजा सिंह को जेल भी जाना पड़ा था। लेकिन, इस बार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने उनका निलंबन वापस ले लिया और वह अपनी गोशामहल सीट से लगातार तीसरी बार भगवा लहराने के दावे के साथ मैदान में उतरे हुए हैं।

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गोशामहल सीट टी राजा सिंह बना राजा सिंह का गढ़
पुराने हैदराबाद में हमेशा से एआईएमआईएम और उसके चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी का दबदबा रहा है। लेकिन, ओवैसी की पार्टी के मुख्यालय के बगल वाली सीट गोशामहल को टी राजा सिंह ने करीब एक दशक से अपना गढ़ बना लिया है।

गोशामहल से दो-बार के एमएलए हैं टी राजा सिंह
46 वर्षीय टी राजा सिंह की छवि कट्टर हिंदुत्व के पैरोकार वाले नेता की है और उनका करियर हिंदू वाहिन और आरएसएस जैसे संगठनों से शुरू हुआ है। तथ्य ये है कि वे 2014 से ही लगातार दो बार गोशामहल सीट जीत चुके हैं और मतदाताओं के बीच काफी लोकप्रिय भी माने जाते हैं।

2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी अकेले गोशामहल सीट ही जीती थी और उसका श्रेय भी टी राजा सिंह को दिया जा सकता है। इस बार भी वह अपनी जीत को लेकर आत्मविश्वास से भरे हैं।

विकास के काम के चलते लोग देते हैं वोट- राजा सिंह
उन्होंने ईटी से कहा है, 'मैंने घर-घर जाकर प्रचार पूरा कर लिया है। इस बार तीसरी जीते के बाद मेरा लक्ष्य 2028 के चुनावों बिना एक दिन भी प्रचार किए इस ऑफिस में बैठे रहकर ही जीतना है। मैंने यहां विकास के जो काम किए हैं, लोग उसी वजह से मुझे वोट देते हैं।'

अपनी विवादित छवि को लेकर वह कहते हैं, 'मेरे राजनीतिक व्यक्तित्व के दो पहलू हैं। एक एमएलए के तौर पर मैं अपनी जनता और मेरे चुनाव क्षेत्र के विकास के लिए काम करता हूं। और एक राजनीतिज्ञ और एक गौरवशाली हिंदू के रूप में मैं अपने धर्म और हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए काम करता हूं। मैं यही हूं।'

हर गिरफ्तारी के बाद मिलती है पॉलिटिकल प्रमोशन- राजा सिंह
पिछले साल अपनी विवादित टिप्पणी की वजह से हुई गिरफ्तारी को लेकर उनका कहना है कि 'इसमें किसी तरह का प्लस या माइनस नहीं था। मेरी गिरफ्तारी पहली बार नहीं हुई थी। 2005 में वाईएसआर सरकार (कांग्रेस सरकार) ने कुछ राजनीतिक काम के लिए मुझे गिरफ्तार किया था और 2009 में मैं कॉर्पोरेटर चुना गया। 2010 में मैं फिर गिरफ्तार हुआ और जेल गया और 2014 में मैं एमएलए चुना गया। इसलिए हर बार जब मेरी गिरफ्तारी हुई, मेरा पॉलिटिकल प्रमोशन होता गया, क्योंकि जनता का समर्थन बढ़ता रहा।'

'ये कभी मुसलमानों का वोट नहीं मांगते।'
इस बार टी राजा सिंह के खिलाफ बीआरएस ने नंद किशोर व्यास और कांग्रेस ने प्रदेश महिला कांग्रेस की नेता मोगिली सुनीता को टिकट दिया है। ओवैसी की पार्टी ने इस सीट से प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। राजा सिंह का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ कि मुस्लिम वोट बीआरएस को जा सके। गोशामहल में राजा सिंह के समथर्कों में एक बात प्रचलित है कि 'ये कभी मुसलमानों का वोट नहीं मांगते।'

गोशामहल सीट पर करीब 2.7 लाख मतदाता हैं, जिसमें 70,000 मुसलमान हैं। खुद राजा लोढ़ा समाज से आते हैं, जिनकी जनसंख्या इस सीट पर काफी है। इसके अलावा मारवाड़ी, मराठी और उत्तर भारतीय लोगों की भी अच्छी आबादी यहां रहती है। शनिवार को उनके लिए प्रचार करने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे थे।

भाजपा पर आरोप है कि उसने तेलंगाना विधानसभा से ठीक पहले राजा सिंह का निलंबन इसलिए हटाया है ताकि उसे अपने हिंदुत्व वाले वोट बैंक को दूसरी सीटों पर भी सहेजने में आसानी हो।

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ध्रुवीकरण चाहती है बीजेपी- मुसलमान वोटर
मसलन, गोशामहल इलाके के रहने वाले मोहम्मद नाहिद कहते हैं, 'तथ्य ये है कि पिछले साल सार्वजनिक रूप से किए गए गंभीर अपराध के बावजूद भी बीजेपी ने राजा सिंह का निलंबन खत्म दिया और उन्हें पार्टी के उम्मीदवार के रूप में फिर से टिकट दिया, ये पार्टी की असली मंशा को जाहिर करता है। वे बस इस सीट पर किसी तरह से ध्रुवीकरण चाहते हैं।'

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