Telangana Election: तेलंगाना में कांग्रेस की 'आखिरी दांव' की तैयारी, अब बस यात्रा की बारी
तेलंगाना पर आ रहे ओपिनियन पोल के नतीजों से कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं। चुनावों से पहले वोटरों से 6 गारंटियां उसे सत्ता पर काबिज होने की गारंटी लगने लगी है। कर्नाटक में यह फॉर्मूला निशाने पर लगा था, लिहाजा तेलंगाना में भी वह सबकुछ हो रहा है, जो पार्टी पड़ोसी राज्य में आजमा चुकी है।
कांग्रेस अब तेलंगाना विधानसभा चुनावों में भी 'बस यात्रा' निकालने की तैयारी में है। कर्नाटक में 'बस यात्रा' ने इसका सिक्का जमा दिया था और बीजेपी सत्ता से बेदखल हो गई थी। तेलंगाना में उसे लग रहा है कि अगर बीआरएस की 9 वर्षों की एंटी-इंकंबेंसी में 6 गारंटियों के बारे में बस यात्रा के माध्यम से मतदाताओं को समझा दिया जाए तो फिर हारने की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती।

तेलंगाना में कांग्रेस का 'आखिरी दांव'
'बस यात्रा' की योजना तैयार है, लेकिन अभी यह तय नहीं हो पा रहा है कि इसे नवरात्रि की शुरुआत से आरंभ किया जाए या फिर दशहरे के बाद से निकाली जाए। पार्टी का मकसद इसके माध्यम से मतदाताओं तक अपनी बातें तो ले जाने का है ही, पार्टी नेताओं में 'एकता' बनी हुई है, यह दिखाना भी है।
राहुल-प्रियंका-खड़गे के भी शामिल होने की बात
अभी तक की योजना से ये बात पक्की है कि इस 'बस यात्रा' में राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी अलग-अलग समय पर शामिल होंगे। लेकिन, पूरी 'बस यात्रा' के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ही इसकी अगुवाई करेंगे और पूरे राज्य में जाएंगे। बीच-बीच में बड़े नेता उनके साथ आएंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का हौसला बढ़ाएंगे।
कर्नाटक में लोकल बसों में घूम चुके हैं राहुल
इस साल कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान भी कांग्रेस ने ऐसी ही 'बस यात्रा' निकाली थी। कांग्रेस नेता राहुल तो लोकल बसों में भी सफर करते दिखे थे। पार्टी ने तेलंगाना में भी कर्नाटक की तरह सरकारी बसों में महिला यात्रियों को मुफ्त बस यात्रा का वादा कर रखा है।
गुलाम नबी आजाद ने पार्टी को दिया था आइडिया
दिलचस्प बात ये है कि पार्टी में चुनाव से पहले एकजुटता बनाए रखने और मतदाताओं के बीच अपना संदेश पहुंचाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने इस तरह की बस यात्रा का विचार पहली बार कर्नाटक और आंध्र प्रदेश (पूर्ववर्ती) से ही लॉन्च किया था। कांग्रेस को यह आइडिया पार्टी के तत्कालीन कर्नाटक और आंध्र प्रदेश प्रभारी महासचिव गुलाम नबी आजाद ने दिया था, जो अब अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं।
मीडिया और नौकरशाही पर कांग्रेस की नजर
तेलंगाना में कांग्रेस ने एक पैनल बनाने का भी फैसला किया है, जिसका काम मीडिया से लेकर सरकारी अफसरों तक पर निगरानी रखने की है। पार्टी का आरोप है कि कुछ अधिकारी सत्ताधारी दल के पक्ष में खुलकर काम कर रहे है। पार्टी का यह पैनल ऐसे तमाम लोगों के पक्षपात वाले कदमों का दस्तावेज तैयार करेगा।
कांग्रेस की योजनाओं को बीआरएस दे सकी है चुनौती
इस तरह से कांग्रेस तेलंगाना में पूरे विश्वास के साथ चुनाव मैदान में उतरी है। लेकिन, संभावना है कि उसकी 6 गारंटियों और बस यात्रा वाली योजनाओं को सत्ताधारी बीआरएस आगे बड़ी चुनौती दे सकती है। क्योंकि, पार्टी का घोषणापत्र 15 अक्टूबर को आने की संभावना है। माना जा रहा है कि इसमें कांग्रेस की 6 गारंटियों की काट वाली स्कीम का एलान हो सकता है।
घोषणापत्र जारी होने के बाद मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी पार्टी का औपचारिक चुनाव अभियान लॉन्च करेंगे और पूरे राज्य में रैलियां करेंगे। वैसे भी पार्टी उम्मीदवारों के नाम घोषित करने के मामले में कांग्रेस और बीजेपी से काफी आगे है। 119 सीटों में से उसके अधिकतर उम्मीदवार लंबे वक्त से चुनाव क्षेत्रों में अपना चुनाव अभियान भी चला रहे हैं।












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