Nehru Memorial Museum: 59 साल पहले म्यूजियम बने तीन मूर्ति भवन से हट चुका है पंडित नेहरू का नाम, 10 रोचक बातें
Nehru Memorial Museum और 27 जून का खास कनेक्शन है। आज से 59 साल पहले म्यूजियम में बदला तत्कालीन प्रधानमंत्री आवास- तीन मूर्ति भवन एक बार फिर से चर्चा में तब आया जब वर्तमान सरकार ने इसका नाम बदल दिया। खास बात ये कि इससे पंडित नेहरू का नाम हट गया।
तीन मूर्ति भवन पंडित नेहरू का आधिकारिक निवास था। ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के बाद भारत को संप्रभु, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में तैयार करने का श्रेय पंडित जवाहर लाल नेहरू को दिया जाता है।

27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। इसके एक महीने बाद 27 जून को तीन मूर्ति भवन का नाम नेहरू मेमोरियल म्यूजियम कर दिया गया। इसमें आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री से जुड़ी तमाम यादें सहेजी गई हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली वर्तमान केंद्र सरकार ने नेहरू मेमोरियल म्यूजियम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री म्यूजियम एंड सोसायटी (PMMS) कर दिया है। सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना भी हुई।

नाम बदले जाने की कवायद के बीच ये जानना बेहद दिलचस्प है कि आखिर तीन मूर्ति भवन भारत के इतिहास में क्यों इतनी अहमियत रखता है। कभी प्रधानमंत्री आवास रहा यह भवन अब संग्रहालय और सोसायटी है। 27 जून के दिन नाम बदला गया था।
आज इस भवन के तीसरी बार नाम बदले जाने के 59 साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में इस भवन से जुड़ी 10 रोचक बातें जानने का ये मौका बेहद खास है। जानिए कुछ प्रमुख ऐतिहासिक तथ्य-
तीन मूर्ति भवन को मूल रूप से "फ्लैगस्टाफ हाउस" के नाम से जाना जाता था और इसे 1930 में भारत में ब्रिटिश सेना के कमांडर इन चीफ के लिए बनाया गया था।
भारत की आजादी से 17 साल पहले बने इस भवन के वास्तुकार रॉबर्ट टोर रसेल थे। उन्होंने इस ऐतिहासिक इमारत की डिजाइन के अलावा ब्रिटिश हुकूमत में कनॉट प्लेस की भी डिजाइन बनाई थी।
तीन मूर्ति भवन नाम के पीछे खास बात है। तीन मूर्तियों के बारे में इतिहासकार बताते हैं कि ब्रिटिश मूर्तिकार लियोनार्ड जेनिंग्स ने एक स्मारक बनाया। यह स्मारक 1922 में तत्कालीन तीन रियासतों जोधपुर, हैदराबाद और मैसूर से जुड़ा था।
तीनों रियासतों में शामिल भारतीय सैनिकों और ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सैनिकों ने जब पहले विश्व युद्ध में शहादत दी तो उनकी याद में तीन मूर्ति भवन परिसर में स्मारक बनाया गया।
1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, तीन मूर्ति भवन प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास बना। 1964 में पंडित नेहरू के निधन के बाद इसे संग्रहालय, पुस्तकालय और तारामंडल के रूप में डेवलप किया गया। भवन भारतीय संस्कृति मंत्रालय के तहत आता है।
तीन मूर्ति भवन में जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड का मुख्यालय भी है। इसी परिसर में नेहरू मेमोरियल लाइब्रेरी भी है, जहां इतिहास में रुचि रखने वाले छात्र और शोधकर्ता अक्सर आते हैं।
कुछ बेहद लोकप्रिय और दुर्लभ पुस्तकें इस लाइब्रेरी में मिलती हैं। पुस्तकालय में पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की लिखी बातों के अलावा उनके भाषणों को भी सहेजा गया है।
समय बीतने के साथ-साथ ऐतिहासिक परिसर में खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए नेहरू तारामंडल भी डेवलप किया गया। खगोलीय शिक्षा को बढ़ावा देने के मकसद से बनाए गए इस सेंट पर सोयुज टी-11 प्रमुख आकर्षण है।
बता दें कि सोयुज टी-11 रूस के सहयोग वाला अंतरिक्ष यान था। 1984 में इसी यान से भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा को उनके अंतरिक्ष सूट और मिशन जर्नल के साथ अंतरिक्ष भेजा गया था।
अंतरिक्ष जाने वाले राकेश शर्मा के बारे में बहुचर्चित प्रकरण है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा, अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है? इस पर राकेश शर्मा ने जवाब दिया, 'सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा..।'
1964 में पंडित नेहरू की 75वीं जयंती पर तत्कालीन राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन ने तीन मूर्ति भवन राष्ट्र को समर्पित किया।अब भारत की आजादी के 75 साल बाद नेहरू मेमोरियल म्यूजियम प्राइम मिनिस्टर्स म्यूजियम एंड सोसाइटी (PMMS) हो चुका है।
सोसाइटी के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। उपाध्यक्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हैं। सोसायटी के सदस्यों में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण, धर्मेंद्र प्रधान, जी किशन रेड्डी, अनुराग ठाकुर समेत 29 हस्तियां शामिल हैं।
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