TDP Yuva Galam: नारा लोकेश की लीडरशिप में पदयात्रा के एक महीने, चित्तूर-तिरुपति जिले में हुआ जनसंपर्क
टीडीपी नेता नारा लोकेश की पदयात्रा युवा गालम के एक महीने पूरे हो गए हैं। चित्तूर और तिरुपति जिलों के नौ विधानसभा क्षेत्रों में एक महीने तक जनसंपर्क किया गया।

आंध्र प्रदेश की विपक्षी पार्टी तेलुगू देशम पार्टी (TDP) चुनाव से पहले जनाधार बढ़ाने का प्रयास कर रही है। जनसंपर्क के मकसद से टीडीपी के राष्ट्रीय महासचिव नारा लोकेश बहुचर्चित 'युवा गालम पदयात्रा' कर रहे हैं। यात्रा के एक महीने पूरे हो चुके हैं। अब तक संयुक्त चित्तूर जिले में 9 विधानसभा क्षेत्रों में यात्रा हो चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश उनके गृह निर्वाचन क्षेत्र कुप्पम से भी गुजरे। टीडीपी राज्य भर में नारा लोकेश की 400 दिनों की 4,000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा से बड़ी उम्मीदें लगा रही है।
2024 के आम चुनावों से पहले TDP पार्टी कैडर का मनोबल बढ़ाने में जुटी है। प्रमुख विपक्षी दल टीडीपी के लिए इस चुनाव को "करो या मरो" जैसी स्थिति माना जा रहा है। चंद्रबाबू नायडू की पार्टी के जनाधार पर टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) की रिपोर्ट के अनुसार जब नारा लोकेश की योजनाओं का खुलासा किया गया तो पार्टी के रैंक और फ़ाइल में अधिक उत्साह था। इसका आधार 2004, 2014 और 2019 के आम चुनावों में आंध्र प्रदेश में सत्ता परिवर्तन रहा। 18-19 साल पहले भी डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी, नारा चंद्रबाबू नायडू और वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने राज्यव्यापी पदयात्राएं कर बहुमत हासिल किया।

नारा लोकेश का मामला इसलिए अलग है क्योंकि भले ही उन्होंने एक राज्यव्यापी पदयात्रा शुरू की है, वह कम से कम इस बार तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं बनने जा रहे हैं, क्योंकि चुनाव में उनके पिता एन चंद्रबाबू नायडू TDP उम्मीदवार होंगे। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चौथा टर्म हासिल करने की कोशिशों में जुटे चंद्रबाबू नायडू अगले साल के आम चुनाव से पहले पूरी ताकत झोक रहे हैं। शायद यही मुख्य कारण है जिससे नारा लोकेश की पदयात्रा में उतने उत्साह का अभाव है जितना डॉ वाईएस राजशेखर रेड्डी, नारा चंद्रबाबू नायडू और वाईएस जगन मोहन रेड्डी की पदयात्राओं के दौरान दिखा था।












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