TDP प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की DMK के स्टालिन से मुलाकात क्या है खतरे की घंटी?
Chandrababu Naidu and Stalin Meeting: लोकसभा चुनाव 2024 के बाद लगातार तीसरी बार देश में एनडीए ( NDA) की सरकार बनना तय हो चुका है। नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे क्योंकि एनडीए के अहम सहयोगी बिहार सीएम और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार और टीडीपी के चंद्रबाबू ने भी मोदी सरकार बनाने के लिए समर्थन दे दिया है।
वहीं एनडीए के साथ सरकार बनाने के समर्थन के ऐलान के बाद अचानक टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की तमिललाडु के सीएम स्टालिन से मुकाकात हुई। याद रहे सीएम स्टालिन की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) विपक्षी इंडिया गठबंधन में शामिल हैं। वो ही इंडिया गठबंधन जो 234 सीटों पर जीत हासिल कर मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है।
चंद्रबाबू नायडू की स्टालिन से मुलाकात के बाद तमाम तरह के कयास लगने शुरू हो चुके हैं। क्या ये मुलाकात भाजपा के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनाने जा रही एनडीए के लिए खतरे की घंटी हैं या कुछ और....?

2024 के किंगमेकर चंद्रबाबू नायडू
बता दें इस बार के चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत ना मिल पाने के कारण ये एनडीए गठबंधन की सरकार होगी, अकेली भाजपा की नहीं। जिसमें किंगमेकर टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और जेडीयू प्रमुख और बिहार के सीएम नीतीश कुमार हैं। क्योंकि भाजपा को इस चुनाव में 240 सीटें ही मिली हैं वहीं उसके एनडीए गठबंधन को 293 सीटें मिली हैं।
क्यों लग रहे कयास?
नायडू और नीतीश कुमार भले ही दोनों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है लेकिन नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू दोनों ही ऐसे नेता हैं जिनका इतिहास एनडीए गठबंधन से पलटी मारने का हैं। इसलिए चुनाव परिणाम के बाद दोनों ही नेताओं की इंडिया गठबंधन में शामिल किसी भी पार्टी प्रमुख से मुलाकात के बाद ऐसे कयास लगना लाज़मी है।
इसकी वजह है की 234 सीटों पर जीत हासिल करने वाले इंडिया गठबंधन जोड़-तोड़ कर संख्याबल 272 कर केंद्र में इंडिया अलांयस की सरकार बनाने का सपना संजोए है और उसे पूरा करने का प्रयास भी कर रहा है।
नायडू स्टालिन मुलाकात क्या सच में है खतरे की घंटी?
हालांकि, स्टालिन और चंद्रबाबू नायडू की ये मुलाकात दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई थी और तमिलनाडु सीएम स्टालिन ने नायडू को लोकसभा चुनाव के साथ आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव 2024 में प्रचंड बहुमत हासिल करने और सरकार बनाने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी थी। जहां तक स्टालिन के बाद चंद्रबाबू नायडू के पाला बदलकर एनडीए के बजाय इंडिया गठबंधन को सपोर्ट करने की जो अलकलें हैं वो कोरे कयास ही हैं।
एनडीए के साथ आर चंद्रबाबू नायडू बने 2024 के किंगमेकर
इसकी वजह है कि इस चुनाव के पहले 70 साल के चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के वो नेता हैं जिनकी तेलगू देशम पार्टी प्रदेश में हाशिये पर पहुंच चुकी थी, वो इस बार के चुनाव में एनडीए के गठबंधन के साथ चुनाव लड़कर जहां आंध्र प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने जा रही है वहीं केंद्र में नायडू को किंगमेकर बना दिया है।
याद रहे लोकसभा चुनाव में नायडू की टीडीपी ने 16 सीटें जीती हैं और आंध्र प्रदेश विधान सभा चुनाव में 135 सीटें जीतकर कमबैक किया है। इसलिए भारी बहुमत से जीतकर कमबैक करने वाली टीडीपी के मुखिया नायडू जो एक चतुर राजनेता हैं वो फिलहाल ऐसा कोई कदम उठाने के मूड में नहीं नजर आ रहे हैं।
स्टालिन और नायडू की दोस्ती
तो ऐसे में तमिलनाडु के स्टालिन से चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात केवल एक औपचारिक मुलाकात थी क्योंकिे दक्षिण भारत के ये दोनों दिग्गज नेता गहरे दोस्त है। इसके अलावा द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) प्रमुख एमके स्टालिन के पिता स्वर्गीय एम. करुणानिधि से भी नायडू की गहरी दोस्ती रही है।
याद रहे पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में जीत हासिल कर चंद्रबाबू नायडू एक बार फिर मुख्यमंत्री बनकर सत्ता संभालने जा रहे हैं और तमिनाडु और आंध्र प्रदेश दोनों पड़ोसी राज्य हैं और पानी समेत राज्य संबंधी अन्य मुद्दों पर दोनों की दोस्ती काफी मायने रखती है।
2024 के चुनाव के बाद केंद्र बन रही एनडीए सरकार में नायडू की अहम भागीदारी भी दोनों ही राज्यों के हितों के लिए अहम हैं। जिसका जिक्र स्टालिन ने नायडू से मुलाकात के बाद अपनी पोस्ट में लिखा है, उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि वह (नायडू) केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, दक्षिणी राज्यों के हितों की वकालत करेंगे और हमारे अधिकारों की रक्षा करेंगे।"












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