TATA Sons vs Cyrus Mistry : 144 साल पुरानी कंपनी के मुखिया बने, जानिए, 4 साल में ही क्यों टूटा टाटा का भरोसा ?
दुर्घटना में साइरस मिस्त्री की मौत के बाद लोग टाटा संस के पूर्व चेयरमैन मिस्त्री और टाटा के बीच विवाद के बारे में भी जानने की दिलचस्पी ले रहे हैं। जानिए क्या था टाटा-सायरस मिस्त्री विवाद ? tata vs cyrus mistry shapoorji
नई दिल्ली, 04 सितंबर : बिजनेस टायकून Cyrus Mistry अब इस दुनिया में नहीं रहे। असामयिक मौत पर पीएम मोदी समेत बिजनेस वर्ल्ड के तमाम लोगों ने दुख जताया है। साइरस मिस्त्री टाटा संस के छठे अध्यक्ष थे। अक्टूबर 2016 में विवाद होने के बाद साइरस को टाटा संस चेयरमैन पोस्ट से हटा दिया गया था। दिसंबर 2012 में अध्यक्ष का पदभार संभालने वाले Cyrus Mistry और TATA का विवाद सुर्खियों में रहा था। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे इस मामले में साइरस मिस्त्री को देश की सबसे बड़ी अदालत से भी राहत नहीं मिली और वे तीन महीने बाद ही इस दुनिया से रुखसत हो गए।
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144 साल का इतिहास, साइरस केवल 'दूसरे' अध्यक्ष
साइरस की मौत भी ऐसी दर्दनाक हुई, जिसे देखकर रूह कांप जाए। टाटा के साथ विवाद गहराने के बाद साइरस मिस्त्री को महज चार साल बाद 2016 में अपना पद गंवाना पड़ा, लेकिन 2012 में साइरस टाटा संस के 144 साल के इतिहास में सिर्फ दूसरे नॉन टाटा फैमिली मेंबर थे, जिसे अध्यक्ष बनने का मौका मिला। ऐसे में सवाल लाजमी है कि क्या साइरस का टाटा संस से अलग होना, टाटा का भरोसा तोड़ने की सजा रही ?

चार साल में विवाद हुआ, हटाए गए मिस्त्री
साइरस मिस्त्री टाटा संस के छठे अध्यक्ष थे। अक्टूबर 2016 में विवाद होने के बाद साइरस को टाटा संस चेयरमैन पोस्ट से हटा दिया गया था। रतन टाटा की सेवानिवृत्ति की घोषणा के बाद दिसंबर 2012 में अध्यक्ष का पदभार संभालने वाले Cyrus Mistry के हटने के बाद एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला।

साइरस को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं
टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए गए साइरस मिस्त्री कार्रवाई से असंतुष्ट थे। फैसले को देश की सबसे बड़ी अदालत में चुनौती दी गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने विगत मई में सपूरजी पल्लोनजी (एसपी) समूह की इस याचिका को खारिज कर दिया था। याचिका में साइरस ने 2021 के फैसले की समीक्षा की मांग की थी। देश की सबसे बड़ी अदालत ने टाटा समूह के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसके तहत साइरस को टाटा संस के कार्यकारी अध्यक्ष पद से हटाया था। बता दें कि सपूरजी पल्लोनजी समूह में साइरस मिस्त्री डायरेक्टर रहे थे।

साइरस टाटा के टॉप पर, 144 वर्षों के इतिहास में पहली बार !
साइरस मिस्त्री स्वर्गीय पल्लोनजी मिस्त्री के छोटे बेटे थे। शापूरजी पलोनजी समूह के मालिक साइरस टाटा समूह के सबसे बड़े शेयर होल्डर थे। मिस्त्री 2006 में निदेशक के रूप में टाटा समूह में शामिल होने से पहले टाटा ग्रुप की दूसरी कंपनियों के बोर्ड में गैर-कार्यकारी पदों पर रहे थे। मिस्त्री, साल 2012 में टाटा के 144 वर्षों के इतिहास में टाटा परिवार के बाहर के दूसरे ऐसे व्यक्ति रहे जो टाटा संस के शीर्ष पद तक पहुंचे। हालांकि, केवल चार वर्षों तक पद पर रह सके मिस्त्री को विवादों के कारण पद से हटना पड़ा था। गौरतलब है कि 1868 में अस्तित्व में आई टाटा संस अब 2022 में 154 साल से अधिक पुरानी कंपनी हो चुकी है।

TATA बनाम साइरस मिस्त्री
साइरस मिस्त्री ने कंपनी भीतर कॉरपोरेट गवर्नेंस के कमजोर होने की बात भी कही थी। हालांकि, साइरस मिस्त्री पर आरोप लगा था कि उवह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। टाटा समूह के मुताबिक, साइरस ने भरोसे का दुरुपयोग किया। साइरस पर आरोप लगा था कि वह टाटा ग्रुप के सभी बड़ी फर्मों पर नियंत्रण हासिल करना चाहते थे। रतन टाटा के साथ सीधे टकराव वाली स्थिति में आने के बाद साइरस ने आरोप लगाया था कि एक समय रतन टाटा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को बेचना चाहते थे। हालांकि, टाटा ग्रुप ने साइरस के आरोपों का खंडन किया था।

54 साल के साइरस की पढ़ाई
मिस्त्री टाटा संस के मनोनीत अध्यक्ष के रूप में अपनी नियुक्ति से पहले कंस्ट्रक्शन सेक्टर की दिग्गज कंपनी शापूरजी पल्लोनजी समूह के प्रबंध निदेशक थे। वह 1991 में एक निदेशक के रूप में शापूरजी पल्लोनजी समूह में शामिल हुए। 4 जुलाई 1968 को जन्मे मिस्त्री ने इंपीरियल कॉलेज ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड मेडिसिन, लंदन से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने लंदन बिजनेस स्कूल से प्रबंधन में मास्टर डिग्री भी हासिल की।












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