क्या तमिलनाडु के एकनाथ शिंदे ना बनने पर भाजपा ने किया Senthil Balaji को टारगेट?
तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को उस वक्त भूचाल आ गया, जब मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य के विद्युत मंत्री वी सेंथिल बालाजी के घर पर छापा मारा। इसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले को लेकर सत्ताधारी डीएमके बीजेपी और मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगा रही।
दरअसल डीएमके का आरोप है कि बीजेपी दक्षिण भारत में पूरी तरह से साफ हो गई है। ऐसे में वो तमिलनाडु में सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही। उसने वी सेंथिल बालाजी को तमिलनाडु का एकनाथ शिंदे बनाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं माने। इस वजह से उन्हें टारगेट किया जा रहा।

पार्टी नेता ये भी बोल रहे कि अगर सेंथिल बीजेपी की बात को मान लें, तो आज और अभी वो इस केस में बरी हो जाएंगे।
क्या किया था एकनाथ शिंदे ने?
2019 के विधानसभा चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे (शिवसेना) ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई, लेकिन पिछले साल शिवसेना में बगावत हो गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे 15 विधायकों के साथ सूरत चले गए। इसके बाद वो गुवाहाटी पहुंचे।
धीरे-धीरे उनके समर्थन में विधायकों की संख्या बढ़ती चली गई। जिस पर उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा दे दिया। फिर 40 विधायकों के साथ शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। अब इस राजनीतिक घटनाक्रम से तमिलनाडु की हालिया कार्रवाई को जोड़कर देखा जा रहा।
क्या है तमिलनाडु का समीकरण?
2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर रखा था। जिसमें उसे 234 में से 159 सीटें मिलीं। इसमें अकेले डीएमके की 133 सीटें थीं। वहीं एआईएडीएमके ने 66 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि बीजेपी 4 सीट पर ही सिमट गई।
ICU में भर्ती
वहीं दूसरी ओर ईडी की छापेमारी की बाद सेंथिल बीमार पड़ गए। उनको सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जब ईडी टीम उन्हें गिरफ्तार कर रही थी, तो वो गाड़ी में फूट-फूटकर रोते नजर आए।












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