Tamil Nadu Girl Medical : बेटी ने पूरा किया दिवंगत पिता का सपना, दूध बेचने वाली मां की लाडली डॉक्टर बनेगी

Tamil Nadu Girl Medical Seat पाने के बाद दिवंगत पिता का सपना पूरा करने को लेकर सुर्खियों में है। इस बच्ची ने कड़ी मेहनत से पूरे प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। Tamil Nadu Girl Medical Seat Dream of late Father

Tamil Nadu Girl Medical Seat पाने के बाद दिवंगत पिता का सपना पूरा करने को लेकर सुर्खियों में है। इस बच्ची ने कड़ी मेहनत से पूरे प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। पिता को खोने के बावजूद इस होनहार बेटी ने हौसला नहीं खोया और अब डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने जा रही है। इस प्रेरक कामयाबी से आने वाले दिनों में कई युवा इंस्पायर हो सकते हैं। जानिए इस होनहार बेटी ने कैसे लिखी कामयाबी की कहानी

मेडिकल कॉलेज में दाखिले का संकल्प

मेडिकल कॉलेज में दाखिले का संकल्प

मेडिकल एजुकेशन सबसे कठिन पाठ्यक्रम में एक माना जाता है। डॉक्टर बनने का संकल्प लेने वाले लाखों छात्र हर साल परीक्षाएं देते हैं। कुछ हजार लोगों को ही कॉलेजों में दाखिला मिल पाता है। ऐसी ही संकल्प की कहानी है एक बिटिया की। इस होनहार बेटी के पिता का सपना था कि बेटी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला हो जाए, लेकिन पिता की सांसें थम गईं और वे काल के गाल में समा गए।

2016 में पिता को खोया

2016 में पिता को खोया

आज से करीब 6 साल पहले इस होनहार बिटिया के पिता सड़क दुर्घटना का शिकार हुए थे। साल 2016 में अपने पिता को खोने वाली वृंदा पिता मद्रास मेडकिल कॉलेज में एडमिशन ले चुकी है। वृंदा को जब मेडिकल कॉलेज में दाखिले की सूचना मिली तो उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के बाद बेटी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, लेकिन पिता के न रहने का गम भी सताता है।

आंखों से खुशी के आंसू निकल आए

आंखों से खुशी के आंसू निकल आए

तमिलनाडु की लड़की बी वृंदा को 7.5% सरकारी स्कूल के छात्र कोटे के तहत मद्रास मेडिकल कॉलेज में मेडिकल सीट मिली है। सीट मिलने के बाद वृंदा के दिवंगत पिता का सपना पूरा हुआ है। जब वृंदा को आवंटन पत्र मिला, तो उसकी आंखों से खुशी के आंसू निकल आए। वृंदा के मन में ये बात आई कि पिता अगर जीवित होते तो उन्हें और भी गर्व होता।

नीचे देखें वृंदा की तस्वीर---

मंदिर के पुजारी थे पिता, साथ नहीं होने का गम

मंदिर के पुजारी थे पिता, साथ नहीं होने का गम

वृंदा की कामयाबी पर दी न्यू इंडियनएक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2016 में एक सड़क दुर्घटना में वृंदा के पिता का निधन हो गया। मंदिर के पुजारी के रूप में काम करने वाले पिता का सपना था कि वृंदा बड़ी होकर एक डॉक्टर बने। वृंदा ने बताया, मद्रास मेडिकल कॉलेज में सीट मिलने पर मैंने पिता का सपना पूरा किया। सपना भले ही पूरा हो गया है लेकिन ये सोचकर दिल टूट जाता है कि इस खुशी के मौके और कामयाबी को सेलिब्रेट करने के लिए पिता उसके साथ नहीं हैं।

बिना प्राइवेट कोचिंग NEET परीक्षा में पास

बिना प्राइवेट कोचिंग NEET परीक्षा में पास

कामयाबी की कहानी के बारे में वृंदा कहती हैं कि खुशी को साझा करने के लिए पिता का साथ न होना मेरा दिल तोड़ देता है। वृंदा ने तमिलनाडु के विल्लुपुरम के एक सरकारी मॉडल स्कूल में पढ़ाई की। बिना किसी प्राइवेट कोचिंग के अपने पहले प्रयास में मेडिकल इंट्रेंस परीक्षा- NEET पास कर डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं।

मां दूध की दुकान पर काम करती हैं

मां दूध की दुकान पर काम करती हैं

भले ही वृंदा को मद्रास मेडिकल कॉलेज में सीट अलॉट हो गई है, लेकिन कामयाबी की ये यात्रा वृंदा के लिए इतनी आसान नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया, "मेरी मां मिल्क बूथ पर काम करती हैं। मेरी दो बड़ी बहनें हैं। मेरा परिवार मेरे लिए निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकता था। ऐसे में शिक्षकों ने परीक्षा को पास करने में मेरी बहुत मदद की। मैंने भी मेडिकल इंट्रेंस एग्जाम की तैयारी के लिए अपना 100% दिया।"

वृंदा पढ़ाई में होशियार रहीं

वृंदा पढ़ाई में होशियार रहीं

NEET में 467 अंक हासिल करने वाली वृंदा बताती हैं कि तमिलनाडु इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में उन्हें 200 कट-ऑफ अंकों में से 200 अंक आए थे। शतप्रतिशत अंक हासिल करने वाली वृंदा सरकारी स्कूल की एकमात्र छात्रा थीं। 7.5% सरकारी स्कूल कोटा श्रेणी में वृंदा की रैंक शीर्ष पर थी।

पिता को श्रद्धांजलि, डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा

पिता को श्रद्धांजलि, डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा

एमबीबीएस परीक्षा की तैयारी के बाद मद्रास मेडिकल कॉलेज में सीट पाने वाली वृंदा एक सरकारी अस्पताल में मरीजों की सेवाएं देना चाहती हैं। उन्होंने कहा, डॉक्टर बनने के बाद वे गरीबों की सेवा करना चाहती हैं। वृंदा ने कहा, "मैंने गरीब लोगों की पीड़ा करीब से देखी है। बकौल वृंदा, "अब अपने पिता को श्रद्धांजलि के रूप में डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना चाहती हूं।"

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