Narendra Mann कौन हैं? जिनके कंधों पर 26/11 केस में तहव्वुर को फांसी तक पहुंचाने का जिम्मा, क्यों चुना गया?
Tahawwur Rana Extradition: करीब 17 साल का लंबा इंतजार, और आखिरकार 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पण संभव हुआ। यह सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत भी मानी जा रही है।
खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत का ये एक मजबूत उदाहरण बन गया है। लेकिन इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले में एक नाम और है जो लगातार सुर्खियों में है - और वो हैं नरेंद्र मान। अब सवाल ये कि आखिर कौन हैं ये नरेंद्र मान? आइए जानते हैं...

Who is Narendra Mann: कौन हैं नरेंद्र मान ?
नरेंद्र मान एक वरिष्ठ और अनुभवी वकील हैं, जिन्हें भारत सरकार ने तहव्वुर राणा के खिलाफ चल रहे 26/11 केस में विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) नियुक्त किया है। ये केस नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA के केस नंबर RC-04/2009/NIA/DLI के तहत चल रहा है, जिसमें राणा के अलावा डेविड कोलमैन हेडली भी शामिल हैं - जिसपर 2008 के हमलों की पूरी साजिश रचने का आरोप है।
नरेंद्र मान कोई नया नाम नहीं हैं। वो पहले भी सीबीआई के लिए कई बड़े मामलों की पैरवी कर चुके हैं। 2018 में जब SSC पेपर लीक कांड सामने आया था, तब भी वो ही सरकारी वकील थे जिन्होंने केस की अगुवाई की थी। उनके इसी अनुभव को देखते हुए सरकार ने अब उन्हें तहव्वुर राणा के केस की जिम्मेदारी सौंपी है।
नरेंद्र मान के हाथ 3 साल रहेगा विशेष लोक अभियोजक नियुक्त
गृह मंत्रालय ने 9 अप्रैल को एक गजट अधिसूचना जारी की, जिसमें बताया गया कि नरेंद्र मान को तीन साल के लिए एनआईए (NIA) की ओर से विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति तब तक वैध मानी जाएगी जब तक मामला पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता - या फिर तीन साल, जो भी पहले हो।
तिहाड़ जेल या आर्थर रोड जेल के अंडा सेल?
अब सवाल उठता है कि तहव्वुर राणा को भारत लाकर कहां रखा जाएगा? कुछ रिपोर्ट्स और सूत्रों की मानें तो उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल में नहीं, बल्कि मुंबई की उसी आर्थर रोड जेल के 'अंडा सेल' के पास रखा जा सकता है, जहां एक समय अजमल कसाब को रखा गया था। हालांकि, इस पर अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां राणा से कड़ाई से पूछताछ करने वाली हैं। उसे आतंकियों की तस्वीरें दिखाई जाएंगी, बयान लिए जाएंगे और मौजूद सबूतों से मिलान किया जाएगा। मकसद सिर्फ अदालत में उसे सजा दिलवाना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ इंटरनेशनल स्तर पर पुख्ता सबूत भी इकट्ठा करना है।
वर्चुअल पेशी
राणा की पेशी 10 अप्रैल को होनी थी, लेकिन चूंकि उस दिन महावीर जयंती की छुट्टी थी, इसलिए कोर्ट में उसकी वर्चुअल पेशी हो सकती है। केस अब दिल्ली की NIA कोर्ट में चलेगा, क्योंकि पहले ये केस मुंबई में था जिसे बाद में दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया। अब जब तहव्वुर राणा को भारत लाया जा रहा है, तो पूरा देश देख रहा है कि क्या नरेंद्र मान जैसे सख्त और अनुभव वकील इस केस को अंजाम तक पहुंचा पाएंगे। क्या वाकई राणा को उसके किए की सजा मिलेगी? आने वाले दिनों में ये मामला एक बार फिर देश की निगाहों में रहेगा।












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