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SYL नहर मामला क्या है, जो हरियाणा-पंजाब को 43 साल से लड़वा रहा? अब CM भगवंत मान-नायब सिंह आमने-सामने

SYL Canal Dispute in Hindi: सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद को सुलझाने के लिए पंजाब-हरियाणा एक बार फिर आमने-सामने हैं। इसी विवाद को लेकर बुधवार को एक अहम बैठक दिल्ली में हो रही है। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अगुवाई में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी पहुंचे हैं। बैठक का उद्देश्य 43 साल से लंबित जल बंटवारे के विवाद का समाधान निकालना है, जिसे लेकर दोनों राज्यों के बीच तनातनी बनी हुई है।

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Satluj Yamuna Link Nahar: सतलुज-यमुना लिंक विवाद

पंजाब-हरियाणा के बीच एसवाईएल नहर का विवाद साल 1981 में शुरू हुआ, जब केंद्र की मध्यस्थता में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच सतलुज-ब्यास नदी के जल बंटवारे का समझौता हुआ था। इसके तहत हरियाणा को 3.5 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी देने के लिए 214 किलोमीटर लंबी सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर बनाने का निर्णय लिया गया। इसमें 122 किलोमीटर पंजाब में और 92 किलोमीटर हरियाणा में बननी थी। हरियाणा ने नहर का अपना हिस्सा बना लिया, लेकिन पंजाब ने 1982 में काम ठप कर दिया। पंजाब का तर्क है कि उसके पास खुद पर्याप्त जल नहीं है, जबकि हरियाणा अपने हिस्से के पानी की मांग पर अड़ा है।

केंद्र की कई कोशिशें नाकाम

SYL नहर को लेकर केंद्र सरकार की कई बार मध्यस्थता की कोशिशें हो चुकी हैं। पूर्व जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अगुवाई में भी दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच बैठक हो चुकी है, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कह दिया था कि राज्य में जल संकट है और वह हरियाणा को पानी नहीं दे सकता।

पंजाब ने लौटा दी अधिग्रहित जमीन

मीडिया की खबरों के अनुसार SYL नहर निर्माण के लिए पंजाब में जो जमीन अधिग्रहीत की गई थी, उसे राज्य सरकार ने किसानों को लौटा दिया है। साथ ही 2004 में पंजाब विधानसभा ने एक कानून पारित कर 1981 के समझौते को निरस्त कर दिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में इस कानून को खारिज कर दिया और नहर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता और अगली सुनवाई

मई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि वह दोनों राज्यों के बीच SYL विवाद पर मध्यस्थता कर हल निकाले। उसी आदेश के तहत केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने यह ताजा बैठक बुलाई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट में होनी है।

हरियाणा की मांग, पंजाब की आपत्ति

  • हरियाणा का पक्ष: उसे 3.5 MAF पानी मिलना चाहिए, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भी पुष्ट हो चुका है।
  • पंजाब का रुख: राज्य जल संकट से गुजर रहा है, ऐसे में किसी और राज्य को पानी देना संभव नहीं।

क्या कभी खत्म होगी सतलुज-यमुना लिंक लड़ाई?

चार दशक बीत चुके हैं, लेकिन SYL नहर की तस्वीर अभी भी अधूरी है। हरियाणा अपनी प्यास बुझाने की राह देख रहा है, जबकि पंजाब खुद के अस्तित्व की लड़ाई का हवाला दे रहा है। आज की यह बैठक इस लम्बे विवाद में कोई नया मोड़ लाती है या फिर एक और अधूरी कोशिश बनकर रह जाती है - इसका जवाब 13 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई तक शायद साफ हो जाए।

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