पाक परस्त गिलानी ने अपने को ‘भारतीय’ कहा
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) अब तो आपने अपने को मान लिया कि आप हिन्दुस्तानी हैं सैयद अली शाह गिलानी साहब। आप भारत के सबसे बड़े अलगाववादी नेता हैं। सारे देश के राष्ट्रवादी लोग आपसे नफरत करते हैं। आप भारत की रोटी खाने के बाद भारत को कोसते हैं।

आप पाकिस्तान परस्त हैं।शुक्रवार को जिलानी साहब श्रीनगर के पासपोर्ट दफ्तर में पहुंचे। वहां पर उन्होंने उन डाक्यूमेंट्स को भरा जो उन्हें पासपोर्ट विभाग के अफसरों ने दिए थे। उन्होंने उन्हें भरा। इस क्रम में उन्होंने लिखा कि वे भारतीय हैं। अब सवाल ये उठता है कि हमेशा पाकिस्तान के हकों की बात करने वाले जिलानी साहब को अपने को भारतीय बताते हुए शर्म नहीं आई। वे शर्मसार नहीं हुए।
बेटी से मिलना
चूंकि उन्हें अपने बेटी से मिलने के लिए देश से बाहर जाना है। इसलिए उन्होंने नए पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। 88 साल के जिलानी साहब सऊदी अरब जाने के लिए पासपोर्ट मांग रहे है। वहां पर उनकी बेटी रहती है।
घोऱ देश विद्रोही
वन इंडिया ने एक बार पहले भी लिखा था कि सैयदअली शाह गिलानी घोर भारत विरोधी है। कायदे से तो पाकिस्तान का झंडा फहराने वाले इंसान को भारतीय पासपोर्ट मांगना ही नहीं चाहिए था। उन्हें नवाज शरीफ से पासपोर्ट मांग लेना चाहिए था।
शर्त रखते
जानकार तो कहते हैं कि सरकार को उनसे कहना चाहिए था कि पासपोर्ट देने के बदले में उन्हें देश विरोधी हरकतों से दूर रहना होगा। आपको याद ही होगा कि गिलानी के पासपोर्ट के सवाल पर राज्य की गठबंधन सरकार में नेताओं में अलग-अलग राय सामने राय रखी थी। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती चाहती थीं कि गिलानी को पासपोर्ट दे दिया जाए।
उधर बीजेपी गिलानी से उनके देश विरोधी कृत्यों के लिए माफी मांगने के लिए कह रही थी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि गिलानी ने अपने को भारतीय बताकर साबित कर दिया कि उनका भारत के बिना गुजारा नहीं है। उधर, भारत सरकार ने उन्हें पासपोर्ट देने का फैसला करके सदाश्यता का ही परिचय दिया।











Click it and Unblock the Notifications