यूपी में भाजपा को 40 सीटें! क्या यह नमो चाय का कमाल है?

सभी पार्टियाँ अपना प्रभुत्व कायम करने का हर संभव प्रयास कर रही है। ऐसे में नरेन्द्र मोदी भी भाजपा का पंचम लहराने को लिए देश के अलग अलग हिस्सों से जनता का समर्थन हासिल करने की भरसक कोशिश कर रहें हैं। अब देखना यह है कि क्या वाकई में इन सर्वेक्षणों के परिणाम सच साबित हो पायेंगे। सबसे अहम सवाल यह कि क्या यह सब वाकई में मोदी की वजह से हो रहा है?
उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 50 सीटों पर जीत की भाजपा की रणनीति को काफी हद तक मोदी के मिशन 272+ से लाभ मिल सकता है वो भी तब जब पार्टी के मामलों का कार्यभार मोदी के विश्वस्त सहयोगी अमित शाह के हाथ में है।
हालाँकि 2012 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की कमान अखिलेश सिंह के हाथों में जाती दिखी और तब हुए ओपीनियन पोल में भाजपा की सीट में थोड़़ी गिरावट दिखी पर 2013 और 2014 के ओपीनियन पोल में भाजपा की सीट में तेजी से उछाल आंका गया है। पहले जहां भातपा को 9 सीटें मिली थीं, अब 40 से 50 सीटें मिलने तक की उम्मीद जतायी जा रही है।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी जो मुज्फ्फरनगर दंगों और सैफई महोत्सव जैसे कारनामों से जनता की नज़रों में खटकने लगी है और जिसके कारण समाजवादी पार्टी की वोट बैंक राजनीति पर भी नकारात्मक असर पड़़ा है। भाजपा के लिए लाभकारी सिद्द हो सकती है, क्योंकि उम्मीद यह लगाई जा रही है कि मुज्फ्फरनगर दंगों से नाखुश मुस्लिम वोटर का वोट समाजवादी पार्टी को दरकिनार करते हुए भाजपा की झोली में जा सकता है। अमित शाह की माने तो मोदी की संगठनात्मक कुशाग्रता वोट बैंक को पार्टी की तरफ मोड़ सकती है।
मायावती बिगाड़ सकती हैं मोदी का गेम
परंतु पार्टी पर संकट भी कम नहीं है मायावती भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं, क्योंकि यूपी में बसपा सपा का एक प्रबल विरोधी दल है और जनता के समक्ष एक विकल्प भी।
दूसरी ओर अमित शाह जो बतौर गुजरात के पूर्व गृहराज्य मंत्री लगातार विवादों से जूझ रहें हैं पार्टी उन पर ज्यादा भार नहीं डाल सकती. लेकिन फिर भी अभी तक 44 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया जा चुका है और राज्य के नेता प्रतिनिधियों को अपने अपने जिलों में कैम्प के आयोजन का आदेश दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट प्रतिनिधि शाह को सौंप रहें हैं। शाह का कहना है कि इन कैम्पों का लक्ष्य 1.27 लाख मतदान केन्द्रो को कवर करना है।
मोदी स्वयं भी संभवत पू्र्वी उत्तर प्रदेश या वाराणासी से चुनाव लड़ सकते हैं जो कि निषिचत यूपी में सफलता की -शिट दे एक प्रभावषाली कदम हो सकता है साथ ही वो अपनी हिंदुत्ववादी कटटरपंथी छवि को सुधारने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या वास्तव में भाजपा की कोशिशें कारगार सिद्ध हो पाएगीं या मोदी यूपी में अपना जादू चलाने में असफल हो जाएगें।












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