मोदी सरकार की पहली नोटबंदी को SC ने ठहराया था सही पर कैश सर्कुलेशन 83 फीसदी बढ़ा
आरबीआई ने 2000 रुपए के नोट को सर्कुलेशन से बाहर किया है। यह नोट 30 सितंबर तक बैंकों में वापस कर सकेंगे। 31 मार्च 2023 से सर्कुलेशन में कमी आई है।

नोटबंदी के साढ़े छह साल बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा झटका दिया है। इस बार आरबीआई ने 2000 रुपए के नोट को सर्कुलेशन से बाहर करने का ऐलान किया है। यह नोट 2016 में बाजार में आया था। खास बात यह है कि मोदी सरकार की पहली नोटबंदी को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया था। लेकिन, कैश सर्कुलेशन 83 फीसदी ही बढ़ा।
हाल ही में आरबीआई ने जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि 500 और 1,000 रुपये के ऊंचे मूल्य के करेंसी नोटों के विमुद्रीकरण का देश में चलन में मुद्रा (CIC) पर कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं पड़ा। चलन में मुद्रा करीब 83 प्रतिशत बढ़ी है। 2000 हजार के नोट का मार्केट में आने का मकदस नोटबंदी के तहत बाजार से हटाई गई 500 और 1000 रुपए की पुरानी करंसी से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को काबू करना था।
2 हजार रुपए के नोटों की हिस्सेदारी सिर्फ 10.8 फीसदी
साल 2018 को 6.73 लाख करोड़ रुपए के नोट बाजार के सर्कुलेशन में थे। इसका मतलब बाजार में मौजूद कुल नोटों की हिस्सेदारी पहले 37.3% थी। आरबीआई ने भी दावे किए कि नोटबंदी के बाद से चलन में मुद्रा 83 फीसदी बढ़ी। लेकिन, 31 मार्च 2023 तो यह आंकड़ा घटकर 3.62 लाख करोड़ रुपए ही रह गया। इसका मतलब चलन में मौजूद कुल नोटों में से 2 हजार रुपए के नोटों की हिस्सेदारी सिर्फ 10.8 फीसदी ही रह गई। अब इससे साफ पता चला है कि दो हजार के नोटों का चलन न के बराबर हो गया है।












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