शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटाने की याचिका पर SC में सुनवाई आज
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जिस तरह से दो महीने से अधिक समय से शाहीन बाग में प्रदर्शन चल रहा है, उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई है। दरअसल शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर पहले हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तीन लोगों संजय हेगड़े, साधना रामचंद्रन और वजाहत हबीबुल्लाह को मध्यस्थ नियुक्त किया है। तीनों मध्यस्थों से शाहीन बाग जाकर प्रदर्शनकारियों से बात करने और ऐसा कोई रास्ता निकालने को कहा था जिससे प्रदर्शन की वजह से बंद रास्ता खुल जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बीते हफ्ते लगातार चार दिन तक मध्यस्थ धरनास्थल पर गए और बातचीत की। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दी।

बता दें कि 15 दिसंबर से शाहीन बाग में धरना चल रहा है। इससे दिल्ली को नोएडा से जोड़ने वाली सड़क बंद है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संजय हेगड़े, साधना रामचंद्रन और वजाहत हबीबुल्लाह को मध्यस्थ नियुक्त किया था।शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत के बाद मध्यस्थों ने अपनी सीलबंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा कर दी थी। सीलबंद लिफाफे में तीनों मध्यस्थों ने रिपोर्ट दी थी। इससे पहले सोमवार को इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में 26 फरवरी को तारीख दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त वार्ताकार वजाहत हबीबुल्ला ने सड़क बंद होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दायर किया था, उसमें रास्ता बंद होने में पुलिस को भी जिम्मेदार ठहराया था। हबीबुल्लाह ने अपने हलफनामे में कोर्ट को बताया था कि शाहीन बाग में शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था। यहां राहगीरों को असुविधा हो रही है, क्योंकि धरना स्थल से दूर पुलिस ने सड़क पर बेवजह बैरिकेड्स लगा रखे हैं। इससे पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लोगों को शांतिपूर्वक और कानूनी रूप से विरोध करने का पूरा हक है।












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