शाहीन बाग में बच्चे की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, 12 साल की वीरता पुरस्कार विजेता ने लिखा था पत्र
नई दिल्ली। दिल्ली के शाहीन बाग में 15 दिसंबर से नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का विरोध हो रहा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने चार महीने के बच्चे की मौत के मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। चार महीने के बच्चे को उसकी मां अपने साथ लेकर विरोध प्रदर्शन में गई थी। शाहीन बाग से लौटने के बाद इस मासूम की सोते समय मौत हो गई थी। बाटला हाउस इलाके में रहने वाली महिला ने बताया था कि बच्चे को ठंड लग गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर 10 फरवरी यानी सोमवार को सुनवाई होगी। शाहीन बाग में बच्चे की मौत के मामले में बहादुरी पुरस्कार से अलंकृत छात्रा जेन गुणरत्न सदावर्ते ने सर्वोच्च अदालत को पत्र लिखकर मांग की थी कि इस तरह के प्रदर्शन में बच्चों को शामिल ना होने की इजाजत दी जाए। इस पत्र में कहा गया था कि ये मासूम बच्चों के जीवन के अधिकारों का हनन है।
साथ ही कहा गया था कि इसके लिए जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में गाइडलाइन बनाए। कोर्ट ने इस पत्र को याचिका मानते हुए बच्चे की मौत के मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। बता दें कि सोमवार को ही शाहीन बाग प्रदर्शन के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।
इसके पहले, शाहीन बाग के प्रदर्शन में शामिल होने वाली नाजिया ने बताया कि उनके बच्चे की मौत 30 जनवरी की रात प्रदर्शन से लौटने के बाद हो गई थी। नाजिया ने बताया था, 'मैं शाहीन बाग से देर रात एक बजे आई थी, उसे और अन्य बच्चों को सुलाने के बाद मैं भी सो गई। लेकिन सुबह उसे कोई हरकत ना करते देख मैं परेशान हो गई, सोते हुए ही उसकी मौत हो गई।' नाजिया ने बताया कि बच्चे को सर्दी लग गई और यही उसके लिए जानलेवा साबित हुई। दंपत्ति 31 जनवरी की सुबह उसे नजदीकी अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।












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