जिनके घर पैदा होगी बेटी उन्हें सरकार देगी स्पेशल इंसेंटिव
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। देश में तेजी से घटते लिंगानुपात पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है और कहा है कि उन परिवारों को इंसेंटिव दिया जायेगा जहां लड़की का जन्म हुआ हो। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को ऐसा निर्देश दिया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा है कि ऐसा करने से लोगों में यह संदेश जाएगा कि सरकार बच्चियों का ख्याल रख रही है। इतना ही नहीं इससे कन्या भ्रुण हत्या में भी खासा गिरावट आएगी और लिंगानुपात भी सुधरेगा।

न्यायाधीश दीपक मिश्र ने मंगलवार को कहा कि लड़कियों को भी अन्य लोगों की तरह रहने का उतना ही हक है। कोई भी इस इस हक को छीन नहीं सकता। उन्होंने कहा कि स्त्री भ्रूण हत्या जैसे घटनाएं समाज को असंतुलित कर रहे है। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में स्वैच्छिक संस्था वॉलन्टरी हेल्थ एसोसिएशन ने जनहित याचिका दाखिल की थी। उसके वकील कोलिन गोंजाल्विस ने कहा कि तकरीबन सभी राज्यों में लिंगानुपात गिरा है। जिन राज्यों ने हलफनामा दाखिल किया है, उन्होंने इसे स्वीकारा भी है।
कोर्ट ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या करने वालों के खिलाफ प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (पीएनडीटी) एक्ट के तहत ही मुकदमा दर्ज करना ही इसका हल नहीं है। जागरूकता अभियान चलाने की भी जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने लिंगानुपात पर हरियाणा, दिल्ली और यूपी के हलफनामों में दिए आंकड़ों पर संदेह जताया। कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों को इन तीनों राज्यों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ 3 दिसंबर को बैठक करने को कहा है ताकि संबंधित रजिस्टरों और रिकॉर्ड्स की जांच की जा सके। जिस आधार पर आंकड़े पेश किए गए हैं।
समिति को 10 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से 2011 के जनगणना के आंकड़े पेश करने पर सुप्रीम कोर्ट ने उसे फटकार लगाई और कहा, 'यह आंकड़े 2011 के हैं। हम 2014 में हैं। क्या आप यह कहना चाहते हैं कि अगले जनगणना के आंकड़े आने तक हमें 10 साल इंतजार करना होगा। ताजा अनुमान के मुताबिक, देश में हर साल पांच लाख भ्रूण हत्याएं होती हैं। यूनिसेफ की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2007 से लेकर अब तक भारत करीब एक करोड़ लड़कियां खो चुका है जबकि 1991 के बाद से 80 फीसदी जिलों में पुरुषों का जनसंख्या अनुपात तेजी से बढ़ा है।












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