CJI के खिलाफ साजिश के आरोप पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अमीर और शक्तिशाली लोग कोर्ट नहीं चला सकते

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को न्यायिक वितरण की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने की व्यवस्थित कोशिशों की आलोचना करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि जब हमें देश के अमीर और शक्तिशाली लोगों को बताना होगा कि आप इस तरह कोर्ट को नहीं चला सकते हैं। जस्टिस अरुण मिश्रा ने ये बात कही जो कि जस्टिस नरीमन और जस्टिस दीपक गुप्ता के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में वकील उत्सव बैंस के उन आरोपों पर सुनवाई कर रहे हैं। वकील उत्सव बैंस का आरोप है कि रंजन गोगोई को दोषी ठहराने के लिए कोर्ट के फिक्सरों और असंतुष्ट कर्मचारियों द्वारा एक साजिश रची गई है।

सुप्रीम कोर्ट दो बजे सुनाएगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट दो बजे सुनाएगा फैसला

दालत ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा, बैंस ने ये आरोप कोर्ट मे काम काम करने वाले फिक्सरों पर लगाया है। जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि देश में ये चीजें लंबे समय से चल रही है। इतनी सारी चीजें चल रही हैं। फिक्सिंग बात बहुत गंभीर है। कोर्ट आज दोपहर 2 बजे अपना आदेश सुनाएगी। अरुण मिश्रा ने कहा कि ये मत सोचें कि सुप्रीम कोर्ट को धरती के किसी कोने से रिमोट कंट्रोल द्वारा चलाया जा सकता है, चाहे वो राजनीतिक शक्ति हों या आर्थिक शक्ति।

'लोगों को सच्चाई पता चलनी चाहिए'

'लोगों को सच्चाई पता चलनी चाहिए'

जस्टिस अरुण मिश्रा ने आगे कहा कि ये एक व्यवस्थित खेल है। बहुत सारी चीजें सामने नहीं आईं है। इस देश के लोगों को सच्चाई पता होनी चाहिए। मामलो के लंबित होने पर लैटर लिखने की परंपरा की उन्होंने निंदा की और कहा कि ये अदालतों को प्रभावित करता है। धन की ताकत के जरिए लोग रजिस्ट्री को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। किसी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करें, वो बदनाम कर देंगे। ये नहीं चल सकता। ये कोर्ट फली नरीमन, नानी पालखीवाला और के पारासरन से बना है। ये आपकी और हमारी संस्था नहीं है।

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'बड़े मामले प्रभावित करने की कोशिश'

'बड़े मामले प्रभावित करने की कोशिश'

जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि जब भी हम बड़े लोगों से जुड़े बड़े मामलों की सुनवाई शुरू करते हैं, तो उस समय ऐसी चीजें होती हैं। लैटर लिखकर हमें प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि जस्टिस के तौर पर हम चिंतिंत हैं कि ये क्या हो रहा है? सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच के लिए दबाव डाला। बैंच ने कहा कि हमें तय करना होगा किस कार्यप्रणाली को अपनाना है।

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